Thursday, January 15, 2026
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हिमाचल प्रदेश में विधानसभा में संशोधन विधेयक पेश, धारा-118 में दूसरी बार अब क्या बदलाव कर रही सुक्खू सरकार? एक-एक डिटेल जानिये


धर्मशाला. हिमाचल प्रदेश की सुक्खू सरकार ने बहुचर्चित धारा-118  में संशोधन करने की तैयारी शुरू कर दी है. सरकार इस धारा का सरलीकरण करना चाहती है और इसके लिए मंगलवार को धर्मशाला के तपोवन में विधान सभा के शीतकालीन सत्र के पांचवे दिन सरकार ने सदन में संशोधन विधेयक प्रस्तुत किया. साथ ही दुकानों या अन्य वाणिज्यिक संस्थानों में केंद्र सरकार के एक्ट में हुए संशोधन के अनुरूप प्रदेश में भी काम करने के घंटे बढ़ाने के लिए संशोधन विधेयक प्रस्तुत किया गया. अब इस पर विधानसभा के शीत सत्रमें चर्चा होगी.

जानकारी के अनुसार, राज्य सरकार कारोबार में आसानी के लिए और आर्थिकी को मजबूत करने के लिए टेडैंसी एंड लैंड रिफॉर्म एक्ट की धारा 118 में संशोधन करना चाहती है. इसको लेकर राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी ने आज सदन में संशोधन विधेयक प्रस्तुत किया.

विपक्ष ने इसको लेकर पहले से कई सवाल उठा रही है, लेकिन मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा कि धारा 118 में कोई ज्यादा छेड़खानी नहीं की जाएगी. सीएम ने कहा कि जिन लोगों ने धारा 118 के तहत कोई कार्य करने के लिए अगर जमीन खरीदी है और वो 5 साल में काम पूरा नहीं कर पाता है तो उसे एक्सटेंशन देने के लिए सरकार के पास कोई शक्ति नहीं है. सरकार इस अधिकार के लिए संशोधन लेकर आई है लेकिन इसमें शर्त ये रखी गई है कि 5 सालों में अगर 70 फीसदी कार्य पूरा किया होगा, उसे एक साल की एक्सटेंशन दी जाएगी और ये एक्सटेंशन पेनेल्टी के साथ दी जाएगी. सदन में आपदा को लेकर की जा रही चर्चा और प्रश्नकाल के दौरान विपक्ष की ओर से लगाए जा रहे आरोपों का भी जवाब दिया.

जानकारी के अनुसार, इस विधेयक के पारित होने के बाद प्रदेश में 100 फीसदी कृषक सदस्यों वाली सहकारी समितियों को भू-अधिनियम की धारा 118 के तहत मंजूरी की आवश्यकता नहीं होगी. सरकार का दावा है कि सहकारी समितियों को मिलने वाली इस छूट से प्रदेश में रोजगार सृजन के साथ-साथ नए उद्यमों की स्थापना में तेजी आएगी और ग्रामीण क्षेत्रों में अल्पावधि के लिए पट्टे (लीज) पर पूर्ण रूप से तैयार भवन ले सकेंगे. ग्रामीण इलाकों में भी 10 वर्षों की अवधि के लिए पट्टे पर इमारतें लेने की छूट दी जाएगी. इसमें धारा 118 की मूंजरी की जरूरत नहीं रहेगी.

हिमुडा के भवनों को लेकर भी छूट देगी सरकार

प्रस्तावित संशोधन विधेयक में कहा गया है कि हिमुडा के साथ-साथ निजी बिल्डरों द्वारा बनाई गई इमारतों या फ्लैट को खरीदने की छूट भी लोगों को मिलेगी. यह छूट इन इमारतों को बाद में खरीदने वालों को भी मिलेगी, साथ ही गैर कृषक पूरी तरह से निर्मित भवन खरीद सकेंगे.

इसके साथ ही प्रदेश में दुकानों या अन्य वाणिज्यिक संस्थानों में केंद्र सरकार के एक्ट में हुए संशोधन के अनुरूप प्रदेश में भी काम करने के घंटे बढ़ाने के लिए उद्योग मंत्री हर्षवर्धन चौहान ने संशोधन विधेयक प्रस्तुत किया. इस संशोधन के अनुसार प्रदेश में भी निजी क्षेत्र के कामगार साल के तीन महीनों में 144 घंटे का ओवर टाइम कर सकेंगे. इसके लिए हिमाचल प्रदेश दुकान एवं वाणिज्यिक प्रतिष्ठान स्थापना संशोधन अधिनियम में बड़े बदलाव प्रस्तावित किए गए हैं, जिसे आज सदन प्रस्तुत किया गया.

इस विधेयक में प्रस्तावित किए गए संशोधनों के अनुसार, अधिनियम की धारा 7 में निर्धारित ओवरटाइम की सीमा को बदला जाएगा. प्रदेश में वर्तमान में यह सीमा प्रति तिमाही 50 घंटे है, जिसे बढ़ाकर 144 घंटे प्रति तिमाही किया जाएगा,  ओवरटाइम का भुगतान सामान्य प्रति घंटा मजदूरी के दोगुने के आधार पर किया जाएगा, ताकि कर्मचारियों को अधिक आय के अवसर मिल सकें.

क्या है धारा 118

हिमाचल प्रदेश में काश्तकारी और भूमि सुधार अधिनियम, 1972 के तहत धारा 118 एक ऐसा कानून है, जो गैर-हिमाचलियों को हिमाचल प्रदेश में कृषि भूमि खरीदने पर रोक लगाता है. हिमाचल के पहले सीएम वाई एस परमार को इस धारा को लागू करने का श्रेय जाता है. उनका मुख्य उद्देश्य था कि राज्य के छोटे किसानों और आम लोगों की जमीन बची रहे औऱ अमीर और बाहरी लोग जमीन ना खरीद सके. हालांकि, गैर-कृषकों को जमीन खरीदने की अनुमति सरकार केवल उस स्थिति में देती है, जब यहां पर कोई इंडस्ट्री या फैक्ट्री जैसा प्रोजेक्ट लगाना हो. यदिक धारा 118 का उल्लंघन होता है तो जमीन का ट्रांसफर अवैध माना जाता है. हालांकि, सुक्खू सरकार ने इस एक्ट में दूसरी बार संशोधन किया है औऱ डेरा ब्यास को जमीन देने के लिए बीते सत्र में संशोधन विधेयक पास किया था.



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