Sunday, April 12, 2026
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होर्मुज संकट के बीच चीन के पड़ोस से आई अच्छी खबर, यह देश बनेगा भारत का एनर्जी कवच


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होर्मुज संकट के बीच भारत के लिए एक बड़ी राहत भूटान से आई है, जहां लंबे समय से अटका पुनात्सांगछू जलविद्युत परियोजना फिर से शुरू हो गया है. यह प्रोजेक्ट भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने में अहम भूमिका निभा सकता है. भूटान में बन रही यह परियोजना भारत को सस्ती और स्थिर बिजली उपलब्ध कराएगी. खासकर ऐसे समय में जब वैश्विक तेल सप्लाई को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है, यह प्रोजेक्ट भारत के लिए एक मजबूत बैकअप साबित हो सकता है.

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प्रोजेक्ट की लागत 10000 करोड़ रुपये से ज्यादा हो चुकी है. (AI)

नई दिल्ली. पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर बने अनिश्चित माहौल के बीच भारत के लिए एक अहम रणनीतिक राहत भूटान से आई है. ऐसे समय में जब वैश्विक ऊर्जा सप्लाई पर दबाव बना हुआ है, भारत अपने पड़ोसी देशों के साथ मिलकर वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों को मजबूत करने की दिशा में तेजी से काम कर रहा है. इसी कड़ी में भूटान में भारत की मदद से बन रही पुनात्सांगछू-I जलविद्युत परियोजना (Punatsangchhu-I Hydropower Project) एक बार फिर सुर्खियों में है. करीब सात साल तक तकनीकी समस्याओं की वजह से रुका यह प्रोजेक्ट अब दोबारा शुरू हो गया है, जिससे भारत की ऊर्जा सुरक्षा को नई मजबूती मिलने की उम्मीद है.

इस प्रोजेक्ट की शुरुआत बड़े उत्साह के साथ हुई थी, लेकिन 2013 में बांध के पास पहाड़ी धंसने की घटना ने पूरे काम को झटका दे दिया. यह समस्या इतनी गंभीर थी कि विशेषज्ञों को यह तय करने में ही कई साल लग गए कि निर्माण दोबारा शुरू करना सुरक्षित है या नहीं. देरी का सीधा असर लागत पर पड़ा और जो प्रोजेक्ट शुरुआती दौर में कुछ हजार करोड़ रुपये में पूरा होने वाला था, उसकी लागत अब बढ़कर 10000 करोड़ रुपये से ज्यादा हो चुकी है. इसके बावजूद भारत और भूटान दोनों ने इस परियोजना को जारी रखने का फैसला किया, क्योंकि इसका रणनीतिक महत्व बहुत बड़ा है.

भारत के लिए ‘एनर्जी इंश्योरेंस’ क्यों

भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा अभी भी आयातित तेल और गैस से पूरा करता है. ऐसे में जब वैश्विक स्तर पर तनाव बढ़ता है और तेल की कीमतें ऊपर जाती हैं, तो इसका सीधा असर देश की अर्थव्यवस्था पर पड़ता है. ऐसी स्थिति में हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट भारत के लिए एक तरह का ‘एनर्जी इंश्योरेंस’ बन जाते हैं. भूटान से मिलने वाली बिजली न सिर्फ सस्ती होती है, बल्कि इसकी कीमत स्थिर रहती है, जिससे पावर सेक्टर को झटके कम लगते हैं.

क्लीन एनर्जी और कार्बन टारगेट में मदद

यह परियोजना सिर्फ आर्थिक ही नहीं, पर्यावरण के लिहाज से भी अहम है. हाइड्रोपावर एक क्लीन एनर्जी सोर्स है, जिससे कार्बन उत्सर्जन नहीं होता. भारत ने अपने कार्बन उत्सर्जन को कम करने और रिन्यूएबल एनर्जी को बढ़ावा देने के जो लक्ष्य तय किए हैं, उन्हें हासिल करने में इस तरह के प्रोजेक्ट बड़ी भूमिका निभाते हैं.

जियोपॉलिटिकल मायने भी बड़े

यह प्रोजेक्ट सिर्फ बिजली उत्पादन तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे बड़ा जियोपॉलिटिकल एंगल भी है. चीन के करीब स्थित भूटान में भारत की मजबूत मौजूदगी इस क्षेत्र में रणनीतिक संतुलन बनाए रखने में मदद करती है. ऐसे समय में जब दुनिया ऊर्जा सुरक्षा को लेकर नए समीकरण बना रही है, भारत हिमालयी क्षेत्र में अपने ‘एनर्जी बैंक’ को मजबूत कर रहा है. यही वजह है कि पुनात्सांगछू जलविद्युत परियोजना को सिर्फ एक इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट नहीं, बल्कि भविष्य की रणनीतिक तैयारी के रूप में देखा जा रहा है.

प्रोजेक्ट 2 पहले पूरा, लेकिन असली गेम प्रोजेक्ट 1

दिलचस्प बात यह है कि इसी श्रृंखला का दूसरा प्रोजेक्ट पुनात्सांगछू-II जलविद्युत परियोजना (Punatsangchhu-II Hydropower Project) पहले ही पूरा होकर चालू हो चुका है. इसकी वजह यह रही कि वहां भौगोलिक स्थितियां ज्यादा स्थिर थीं और निर्माण में कोई बड़ी बाधा नहीं आई. 2025 से यह प्रोजेक्ट भारत को बिजली सप्लाई कर रहा है, जिससे दोनों देशों के बीच ऊर्जा सहयोग और मजबूत हुआ है. हालांकि असली गेम-चेंजर पुनात्सांगछू-I को माना जा रहा है, क्योंकि इसकी क्षमता ज्यादा है और यह भारत के पावर ग्रिड को और मजबूत करेगा.

भारत-भूटान रिश्तों की मजबूती

ऊर्जा सहयोग भारत और भूटान के रिश्तों की सबसे मजबूत कड़ी रहा है. इस प्रोजेक्ट के जरिए दोनों देशों के बीच आर्थिक और रणनीतिक साझेदारी और गहरी होती है. भारत जहां इस परियोजना में निवेश करता है, वहीं बदले में उसे लंबे समय तक स्थिर दरों पर बिजली मिलती है. इससे दोनों देशों को फायदा होता है और क्षेत्रीय स्थिरता भी बढ़ती है.

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Jai Thakur

जय ठाकुर 2018 से खबरों की दुनिया से जुड़े हुए हैं. 2022 से News18Hindi में सीनियर सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं और बिजनेस टीम का हिस्सा हैं. बिजनेस, विशेषकर शेयर बाजार से जुड़ी खबरों में रुचि है. इसके अलावा दे…और पढ़ें



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