नई दिल्ली. भारत के सबसे सफल कारोबारियों की बात होती है तो अक्सर बड़े कारोबारी परिवारों के नाम सामने आते हैं. लेकिन देश में कुछ ऐसे उद्यमी भी हैं जिन्होंने बिना किसी बड़े कारोबारी बैकग्राउंड के अपनी कंपनियां खड़ी कीं. इनमें किसी ने आर्थिक तंगी देखी तो किसी ने नौकरी छोड़कर बिजनेस शुरू करने का जोखिम उठाया. इन कारोबारियों ने अलग अलग क्षेत्रों में काम किया और लाखों करोड़ रुपये की कंपनियां खड़ी कीं. किसी ने डिजिटल पेमेंट की दुनिया बदल दी, तो किसी ने फूड डिलीवरी, होटल, ब्यूटी और रिटेल के कारोबार को नया रूप दिया. इनकी कहानी संघर्ष के साथ सही समय पर सही फैसला लेने की भी कहानी है.
ऐसे उद्यमियों में विजय शेखर शर्मा से लेकर फाल्गुनी नायर तक शामिल हैं. हालांकि, सभी का नाम यहां ले पाना संभव नहीं है. इसलिए अभी हम यहां सिर्फ 5 उद्यमियों के बारे में बात करेंगे.
विजय शेखर शर्मा
कॉलेज में ही उन्होंने कोडिंग सीखी और एक वेबसाइट बनाई, जिसे बाद में करीब 10 लाख रुपये में बेच दिया. साल 2000 में उन्होंने वन97 कम्युनिकेशंस शुरू की. शुरुआती दौर में आर्थिक संकट इतना बढ़ा कि उन पर करीब 32 लाख रुपये का कर्ज हो गया. साल 2010 में इसी कंपनी के तहत पेटीएम शुरू हुआ. साल 2016 की नोटबंदी के बाद डिजिटल पेमेंट तेजी से बढ़ा और पेटीएम देश के सबसे चर्चित डिजिटल पेमेंट प्लेटफॉर्म में शामिल हो गया.
दीपिंदर गोयल
आईआईटी के बाद उन्होंने बैन एंड कंपनी में नौकरी की. ऑफिस में उन्होंने देखा कि लंच के समय कर्मचारी मेन्यू देखने के लिए परेशान होते थे. इसी समस्या से उन्हें बिजनेस आइडिया मिला. साल 2008 में उन्होंने पंकज चड्ढा के साथ फूडीबे डॉट कॉम शुरू किया. साल 2010 में इसका नाम बदलकर जोमैटो कर दिया गया. शुरुआत मेन्यू की जानकारी देने से हुई और कंपनी बाद में फूड डिलीवरी में उतरी. साल 2021 में जोमैटो का आईपीओ आया. इसके बाद ब्लिंकिट के अधिग्रहण ने कंपनी को क्विक कॉमर्स के बड़े खिलाड़ियों में शामिल कर दिया.
रितेश अग्रवाल
भारत में घूमने के दौरान उन्होंने बजट होटलों की खराब स्थिति देखी. इसी समस्या को अवसर बनाकर उन्होंने साल 2012 में ओरावल स्टेस शुरू किया. साल 2013 में इसे ओयो रूम्स के रूप में रीब्रांड किया गया. शुरुआत में रितेश खुद होटल के कमरों की सफाई से लेकर ग्राहकों की शिकायतों तक संभालते थे. धीरे धीरे ओयो ने बजट होटल कारोबार को एक स्टैंडर्ड मॉडल में बदल दिया और भारत के बाहर भी अपना कारोबार फैलाया.
फाल्गुनी नायर
साल 2012 में उन्होंने करीब 2 करोड़ रुपये की अपनी पूंजी से नायका शुरू किया. उनका लक्ष्य भारत में ब्यूटी और कॉस्मेटिक प्रोडक्ट्स के लिए भरोसेमंद ऑनलाइन प्लेटफॉर्म बनाना था. शुरुआत में ब्रांड्स को ऑनलाइन बेचने के लिए मनाना और ग्राहकों का भरोसा जीतना बड़ी चुनौती थी. साल 2021 में नायका का आईपीओ आया और फाल्गुनी नायर भारत की प्रमुख सेल्फ मेड महिला अरबपतियों में शामिल हो गईं. आज नायका का ऑनलाइन कारोबार होने के साथ देशभर में सैकड़ों स्टोर का नेटवर्क भी है.
राधाकिशन दमानी
वैल्यू इन्वेस्टिंग के जरिए उन्होंने बड़ी पूंजी बनाई. इसके बाद उन्होंने रिटेल कारोबार में उतरने का फैसला किया. साल 2002 में मुंबई के पवई में डीमार्ट का पहला स्टोर खोला गया. दमानी ने किराए की दुकानों के बजाय जमीन खरीदकर स्टोर बनाने पर जोर दिया. कम खर्च, कम विज्ञापन और कम कीमत पर सामान बेचने के मॉडल ने डीमार्ट को तेजी से आगे बढ़ाया. साल 2017 में एवेन्यू सुपरमार्ट्स का आईपीओ आया और इसके बाद दमानी देश के सबसे अमीर कारोबारियों में शामिल हो गए.

