गोंडा4 मिनट पहले
- कॉपी लिंक
गोंडा जिले के नंदनी निकेतन में 1 से 7 जनवरी तक आयोजित राष्ट्र कथा महोत्सव के दौरान मां अन्नपूर्णा भंडारे ने एक नई मिसाल कायम की। सात दिनों के भीतर करीब 6 लाख श्रद्धालुओं के लिए भोजन तैयार किया गया। खास बात यह रही कि यह भोजन पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह के निजी खर्च से नहीं, बल्कि गोंडा समेत उत्तर प्रदेश के कई जिलों से आए श्रद्धालुओं द्वारा दान में दी गई सामग्री से तैयार हुआ।
इस राष्ट्र कथा महोत्सव में बथुआ सबसे अधिक चर्चा का विषय रहा। गोंडा ही नहीं, बल्कि मिर्जापुर और बनारस तक से लोग अपने बच्चों के साथ भंडारे में बथुआ दान करने पहुंचे। भंडारे में श्रद्धालुओं को चावल, उड़द और बथुआ से बनी सगपहिता दाल, पत्ता गोभी, आलू-मटर-टमाटर की सब्जी और छोले की सब्जी परोसी गई, जिसे शुद्ध सरसों के तेल और घी में तैयार किया गया।

7 लाख लड्डुओं का प्रसाद, 2 लाख अभी शेष
महोत्सव के दौरान शुद्ध घी से बने करीब 7 लाख लड्डू प्रसाद के रूप में वितरित किए गए। इसके अलावा 2 लाख से अधिक लड्डू शेष हैं, जिन्हें 8 जनवरी को बृजभूषण शरण सिंह के जन्मदिन के अवसर पर श्रद्धालुओं को वितरित किया जाएगा। 6 लाख से अधिक पत्तल और चम्मच भी खर्च हुए।
भंडारे में खर्च हुई सामग्री
- 5000 क्विंटल आलू
- 200 क्विंटल घी
- 500 लीटर सरसों का तेल
- 150 क्विंटल बथुआ
- 145 क्विंटल उड़द दाल
- 100 क्विंटल छोला
- 100 क्विंटल पत्ता गोभी
- 200 क्विंटल आटा
- 250 क्विंटल चावल

बच्चों से बुजुर्गों तक ने ग्रहण किया प्रसाद
छोटे बच्चों से लेकर 70 वर्ष तक के बुजुर्गों ने मां अन्नपूर्णा भंडारे में पहुंचकर प्रसाद ग्रहण किया। भंडारा स्थल पर जन सहयोग केंद्र बनाया गया था, जहां लोग अपनी इच्छा अनुसार सामग्री दान कर रहे थे। दान में आई सामग्री से ही प्रसाद बनाकर श्रद्धालुओं को वितरित किया गया।

मिर्जापुर से आया सबसे ज्यादा 2 क्विंटल बथुआ
मिर्जापुर की स्वयं सहायता समूह की महिलाओं ने जब पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह का वीडियो देखा, जिसमें उन्होंने पनीर की जगह सगपहिता बनाने की बात कही थी, तो महिलाओं ने दो क्विंटल बथुआ भेजने का संकल्प लिया। फोन पर बात कर बृजभूषण शरण सिंह ने उन्हें संकल्प दिलाया।
इसके बाद भारतीय कुश्ती संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष संजय सिंह उर्फ बबलू बनारस से मिर्जापुर पहुंचे और महिलाओं द्वारा एकत्र किया गया बथुआ लेकर नंदनी निकेतन जन सहयोग केंद्र पहुंचे। यह बथुआ सातों दिन प्रसाद में शामिल रहा। इसके अलावा एक वीडियो सामने आया, जिसमें गोंडा के 7 और 8 साल के दो बच्चे खुद खेत से बथुआ निकालकर जन सहयोग केंद्र में दान करते नजर आए।

1200 कारीगरों ने बनाया 6 लाख लोगों का भोजन
मां अन्नपूर्णा भंडारे की कैटरिंग की जिम्मेदारी रामू कैटर्स, अयोध्या को दी गई थी। कुल 1200 कारीगरों ने इसमें काम किया, जिनमें 1000 पुरुष और 200 महिलाएं शामिल थीं। महिलाएं पूड़ी बेलने के साथ सब्जी की कटाई का काम भी कर रही थीं। सुबह 3 बजे से शाम 8 बजे तक लगातार प्रसाद तैयार कर श्रद्धालुओं को खिलाया गया। इस तरह सात दिनों में करीब 1200 स्थानीय लोगों को रोजगार मिला। सभी कारीगर गोंडा और अयोध्या के ही निवासी थे।

5 जनवरी को बंद किया गया जन सहयोग केंद्र
5 जनवरी को पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह ने सोशल मीडिया और भंडारा स्थल पर पहुंचकर जन सहयोग केंद्र बंद करने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि अधिक सामग्री आने पर उसका सही उपयोग नहीं हो पाएगा।अब बची हुई सामग्री से 8 जनवरी को जन्मदिन के अवसर पर 2 लाख से अधिक लोगों के लिए भंडारे का आयोजन किया जाएगा। जन सहयोग केंद्र बंद होने के बाद भी कई लोग सामग्री लेकर पहुंचे, लेकिन उन्हें विनम्रतापूर्वक वापस कर दिया गया।


