Thursday, April 9, 2026
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800 ग्राम के प्रीमेच्योर नवजात को ​मिला नया जीवन: 2 माह के निःशुल्क इलाज के बाद स्वस्थ होकर घर लौटा बच्चा – Sirohi News




सिरोही जिला अस्पताल में एक प्रीमेच्योर नवजात शिशु का सफल इलाज किया गया। जन्म के समय मात्र 800 ग्राम वजन वाले इस बच्चे को ‘बेबी खुशबू’ नाम दिया गया था। दो महीने के इलाज के बाद उसे गुरुवार को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है। जिला अस्पताल के शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. सुरेश बोराणा ने बताया कि मां खुशबू, जो बालदा राजपुरा की निवासी हैं, लगभग छह माह की गर्भवती थीं। उन्हें अचानक पेट दर्द और रक्तस्राव की गंभीर समस्या हुई, जो गर्भपात जैसी स्थिति थी। समय रहते उन्हें सिरोही जिला अस्पताल लाया गया, जहां डॉक्टरों ने तत्काल चिकित्सा सुविधा प्रदान की। जन्म के बाद नवजात की गंभीर स्थिति को देखते हुए डॉ. बोराणा और नर्सिंग स्टाफ ने तुरंत कार्रवाई करते हुए शिशु को विशेष नवजात देखभाल इकाई (SNCU) में भर्ती कराया। नवजात शिशु दो माह से अधिक समय तक एसएनसीयू में भर्ती रहा। इस दौरान डॉ. सुरेश बोराणा और उनकी टीम ने बच्चे की लगातार निगरानी की और समर्पित इलाज प्रदान किया। अत्यंत नाजुक स्थिति के बावजूद, चिकित्सा टीम के अथक प्रयासों से बच्चे की सेहत में धीरे-धीरे सुधार आया। इलाज में कंगारू मदर केयर (KMC) की महत्वपूर्ण भूमिका रही। इस पद्धति में शिशु को मां के सीने से त्वचा-से-त्वचा संपर्क में रखा जाता है। इससे बच्चे का तापमान नियंत्रित रहता है, वजन बढ़ने में मदद मिलती है और संक्रमण का खतरा कम होता है। यह मां और शिशु के बीच भावनात्मक जुड़ाव को भी मजबूत करता है।

दीर्घकालीन इलाज के बाद अब बच्चे का वजन बढ़कर 1700 ग्राम हो गया है। वह पूरी तरह स्वस्थ है और डॉक्टरों की संतुष्टि के बाद उसे सुरक्षित रूप से घर भेज दिया गया है। इस पूरी प्रक्रिया में एसएनसीयू स्टाफ के पूरण सिंह, मुकेश सैनी, सोनाराम, निखिल व्यास, सिंधु मीणा और दीपक का विशेष योगदान रहा। गौरतलब है कि सिरोही जिला अस्पताल में कंगारू मदर केयर के लिए अलग से स्टाफ की व्यवस्था की गई है। कंगारू मदर केयर टीम कॉर्डिनेटर रेखा नरूका, मानसी बिष्ट एवं स्टाफ सदस्य रवीना, मोनिका, हीना, बिंदु, अनुष्का, सोनल, खुशी एवं लक्ष्मी ने 24 घंटे प्रीमेच्योर बच्चों की देखभाल में पूर्ण समर्पण के साथ सहयोग प्रदान किया। अस्पताल प्रशासन ने इस उपलब्धि पर पूरी टीम को बधाई दी है और इसे नवजात देखभाल के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया है। पहले भी किया प्रीमेच्योर बच्चों का किया सफल इलाज सिरोही जिला अस्पताल में पहले भी चंदा पत्नी वीसाराम, निवासी शिवगंज और रिंकू पत्नी राणाराम के दो जुड़वा प्रीमेच्योर बच्चों सफल इलाज किया गया। जिनका जन्म के समय वजन लगभग 900 ग्राम था। उन्हें लगभग डेढ़ माह तक एस.एन.सी.यू. में भर्ती रखकर डॉ. सुरेश बोराणा के मार्गदर्शन में सफलतापूर्वक इलाज किया गया। निजी अस्पताल में 10 से 15 लाख रुपए का खर्चा
इस प्रकार के प्रीमेच्योर शिशुओं के उपचार में निजी अस्पतालों में भर्ती रहने पर लगभग 10 से 15 लाख रुपए तक का खर्च आता है। वहीं, जिला अस्पताल सिरोही के प्रमुख चिकित्सा अधिकारी डॉ. वीरेंद्र महात्मा एवं मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. मलकेश मीणा के सहयोग से सभी आवश्यक उपकरण एवं दवाइयां अस्पताल में उपलब्ध कराई जाती हैं, जिससे मरीजों को यह समस्त सुविधाएं निशुल्क प्राप्त हो पाती हैं।



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