Sunday, April 12, 2026
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93 नामों को दी मंजूरी; CJI गवई का ऐतिहासिक कार्यकाल: SC, OBC–BC समुदायों के 21 जज बने हाईकोर्ट का हिस्सा


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CJI BR Gavai: जस्टिस बीआर गवई ने अपने छह महीने के कार्यकाल में सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की अगुवाई की. इस दौरान 93 जज नियुक्त हुए, जिनमें एस, ओबीसी, बीसी, अल्पसंख्यक और महिला न्यायाधीश भी शामिल हैं. जस्टिस बीआर गवई 23 नवंबर को सीजेआई के पद से रिटायर हो जाएंगे.

जस्टिस बीआर गवई 23 नवंबर को रिटायर हो जाएंगे. (फाइल फोटो)

नई दिल्ली. प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) के रूप में जस्टिस बीआर गवई के लगभग छह महीने के कार्यकाल के दौरान देश के विभिन्न उच्च न्यायालयों में अनुसूचित जाति (एस) वर्ग के 10 न्यायाधीशों, जबकि अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) और पिछड़ा वर्ग (बीसी) के 11 न्यायाधीशों की नियुक्ति की गई.

जस्टिस गवई देश के पहले बौद्ध और दूसरे दलित प्रधान न्यायाधीश हैं. उन्होंने सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम का नेतृत्व किया, जिसने अल्ग-अलग हाईकोर्ट में जजों के रूप में नियुक्ति के लिए सरकार को 129 नामों की सिफारिश की, जिनमें से 93 नामों को मंजूरी दी गई.

जस्टिस गवई के कार्यकाल के दौरान पांच न्यायाधीशों – जस्टिस एनवी अंजारिया, जस्टिस विजय बिश्नोई, जस्टिस एएस चंदुरकर, जस्टिस आलोक अराधे और जस्टिस विपुल मनुभाई पंचोली की भी शीर्ष अदालत में नियुक्ति हुई. सुप्रीम कोर्ट की वेबसाइट पर 14 मई से लेकर अब तक अपलोड किए गए न्यायाधीशों की नियुक्ति संबंधी विवरण के मुताबिक, जब जस्टिस गवई भारत के प्रधान न्यायाधीश बने, उसके बाद सरकार की ओर से उच्च न्यायालयों में नियुक्ति के लिए मंजूर किए गए 93 नामों में अल्पसंख्यक समुदायों के 13 न्यायाधीशों और 15 महिला न्यायाधीशों के नाम शामिल थे.

विवरण के अनुसार, न्यायमूर्ति गवई के कार्यकाल में जिन न्यायाधीशों की नियुक्ति को मंजूरी दी गई, उनमें से पांच पूर्व या सेवारत न्यायाधीशों से संबंधित हैं, जबकि 49 न्यायाधीश बार से नियुक्त किए गए और बाकी सेवा संवर्ग से हैं. न्यायमूर्ति गवई रविवार (23 नवंबर) को पदमुक्त हो जाएंगे. उनके उत्तराधिकारी न्यायमूर्ति सूर्यकांत 24 नवंबर को भारत के अगले प्रधान न्यायाधीश के रूप में शपथ लेंगे.

भारत के 52वें प्रधान न्यायाधीश गवई ने अपने छह महीने के कार्यकाल के दौरान कई महत्वपूर्ण फैसले दिए हैं, जिनमें वक्फ कानून के प्रमुख प्रावधानों पर रोक लगाना, न्यायाधिकरण सुधार कानून को रद्द करना और केंद्र को परियोजनाओं को बाद में हरित मंजूरी देने की अनुमति देना शामिल है.

शुक्रवार का दिन प्रधान न्यायाधीश के रूप में न्यायमूर्ति गवई का अंतिम कार्य दिवस था. वह न्यायमूर्ति केजी बालाकृष्णन के बाद भारतीय न्यायपालिका का नेतृत्व करने वाले दूसरे दलित न्यायाधीश थे. अपने अंतिम कार्य दिवस पर मिले सम्मान से अभिभूत न्यायमूर्ति गवई ने कहा कि वह एक वकील और न्यायाधीश के रूप में चार दशकों की यात्रा पूरी करने के बाद ‘पूर्ण संतुष्टि की भावना के साथ’ तथा ‘न्याय के छात्र’ के रूप में संस्थान छोड़ रहे हैं.

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Rakesh Ranjan Kumar

राकेश रंजन कुमार को डिजिटल पत्रकारिता में 10 साल से अधिक का अनुभव है. न्यूज़18 के साथ जुड़ने से पहले उन्होंने लाइव हिन्दुस्तान, दैनिक जागरण, ज़ी न्यूज़, जनसत्ता और दैनिक भास्कर में काम किया है. वर्तमान में वह h…और पढ़ें

राकेश रंजन कुमार को डिजिटल पत्रकारिता में 10 साल से अधिक का अनुभव है. न्यूज़18 के साथ जुड़ने से पहले उन्होंने लाइव हिन्दुस्तान, दैनिक जागरण, ज़ी न्यूज़, जनसत्ता और दैनिक भास्कर में काम किया है. वर्तमान में वह h… और पढ़ें

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