Monday, May 25, 2026
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गर्मी से तीन मौतें, दावे सही नहीं मान रही सरकार: बड़ा सवाल- हीटवेव से मौत कब मानी जाती है? मिलता है 4 लाख का मुआवजा – Rajasthan News


राजस्थान में पिछले साल लू (हीटवेव) से 67 लोगों की जान गई थी। लेकिन सरकार ने 9 मौतें ही मानीं। इस साल भी गर्मी रिकॉर्ड तोड़ रही है।

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अब तक 3 लोगों की लू लगने से मौत की खबरें सामने आ चुकी हैं। लेकिन राज्य सरकार के मुताबिक अभी तक हीटवेव से एक भी मौत नहीं हुई है।

पिछले साल ही सरकार ने हीटवेव को राज्य विशेष प्राकृतिक आपदा के रूप में अधिसूचित कर मुआवजे की घोषणा की थी। सबसे बड़ा सवाल यही है सरकार लू से मौत कब मानती है?

क्योंकि जब तक हीटवेव से मौत ही नहीं मानी जाएगी तो मुआवजा कैसे मिलेगा? भास्कर टीम ने आपदा प्रबंधन, एसीएस आनंद कुमार और स्वास्थ्य एवं चिकित्सा विभाग से बात कर ऐसे ही सवालों के जवाब जानने की कोशिश की…

सवाल: लू-तापघात से मौत पर होने पर मुआवजा मिलने का प्रावधान है?

जवाब: राजस्थान हीटवेव की दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील राज्य है। लू का दौर अभी शुरू हुआ है। हमने सभी कलेक्टर्स को अलर्ट मोड पर रहने के निर्देश दिए हैं।

सवाल: प्रभावित परिवार को कितना मुआवजा मिलेगा?

जवाब: लू-तापघात से मौत होने पर राज्य सरकार अपने बजट से प्रभावित व्यक्ति-परिवार को 4 लाख रुपए का मुआवजा देगी। जिला कलेक्टर के माध्यम से यह राशि दी जाएगी। गत वर्ष आपदा में मुआवजा देने का कोई प्रावधान नहीं था।

ऐसे में पिछले साल दिसंबर में लू-तापघात को राज्य विशेष प्राकृतिक आपदा के रूप में अधिसूचित किया गया है। अब आपदा के तहत प्रभावित परिवार को राहत राशि दी जाएगी।

सवाल: अभी तक कितने लोगों को मुआवजा दिया है?

जवाब: घटनाएं होने पर मुआवजा दिया जाता है। अभी कोई केस नहीं आया है। कलेक्टर्स से सभी इंतजाम करने के लिए कहा है। ग्रामीण इलाकों में लू से मरने की वालों की तादाद ज्यादा होती है।

सवाल: प्रभावित परिवार को राहत राशि कैसी दी जाएगी?

जवाब: जिला कलेक्टर के माध्यम से प्रभावित परिवार को राहत राशि दी जाएगी। कलेक्टर स्वास्थ्य विभाग और अन्य विभागों की रिपोर्ट के आधार पर राहत राशि देने की अनुशंषा करेगा। इसके लिए कलेक्टर प्रस्वात बनाकर आपदा प्रबंधन, सहायता एवं नागरिक सुरक्षा विभाग रिपोर्ट भेजेगा।

लू से अपंग होने पर भी मुआवजा

राहत एवं आपदा प्रबंधन से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि 40 से 60 प्रतिशत अपंग होने पर 74 हजार का रुपए का मुआवजा मिलेगा। 60 प्रतिशत से अधिक नुकसान होने पर 2.50 लाख रुपये मिलेंगे।

ऐसा जख्म जिसके इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती होना जरूरी है, इसके लिए 16 हजार रुपए मिलेंगे। अधिकारियों के मुताबिक प्रभावित व्यक्ति एक सप्ताह से कम अस्पताल में भर्ती रहता है तो उसे 2400 रुपये मुआवजे के तौर पर मिलेंगे।

ये मुआवजे के हकदार नहीं

एक शर्त भी है कि हीटवेव की चपेट में आने पर अगर कोई आयुष्मान भारत योजना के तहत इलाज करवाता है तो उसे मुआवजा के योग्य नहीं माना जाता। राहत राशि कलेक्टर के प्रस्ताव पर ही मिलती है। कलेक्टर के प्रस्ताव को मुख्य सचिव की अध्यक्षता में गठित कमेटी के समक्ष रखा जाता है। वही कमेटी निर्णय करेगी।

सवाल : डाॅक्टर्स कैसे तय करते हैं हीट से हुई है मौत?

जवाब : डाॅ. नरोत्तम शर्मा (एडिशनल डायरेक्टर, चिकित्सा प्रशासन) के अनुसार हीटवेव से जुड़े प्रोटोकाल विशेष सावधानीपूर्वक किए जाते हैं। हीटवेव से मौत होने की आशंका पर, शव के पोस्टमॉर्टम के लिए एक कमेटी बनाई जाती है।

जिसमें पीएमओ, एमएलसी और पोस्टमॉर्टम करने वाले अधिकारी शामिल होते हैं। निर्धारित परफोर्मा में जितने फॉरमेट होते हैं उनका पालन कर पोस्टमॉर्टम किया जाता है।

पोस्टमॉर्टम के बाद अटॉप्सी रिपोर्ट के आधार पर तय होता है कि उस व्यक्ति की मौत हीटवेव के कारण हुई है या अन्य किसी कारण से। हीटवेव से मौत की एंट्री आईएचआई भारत सरकार के पोर्टल पर होती है।

सवाल : हीटवेव से कितनी मौतें हुईं, सरकार ने कितनी मानी?

जवाब : प्रचंड गर्मी के कारण प्रदेश में आधा दर्जन मौत (10 से 26 मई तक) हीटवेव से होने की खबरें सामने आ चुकी हैं। डाॅ. नरोत्तम शर्मा ने बताया कि अभी तक प्रदेश में एक भी मौत हीटवेव से होना प्रमाणिक नहीं हुआ है। प्रतिदिन मॉनिटरिंग की जा रही है। वहीं, इस बार जिलों में टीमें भेजी गई हैं। अस्पतालों में स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार किया गया है।

बीकानेर, सीकर और अलवर में मामले आए सामने

प्रदेश में बीकानेर, सीकर और अलवर में हीटवेव से मौत होने की जानकारी सामने आई है। सोमवार 26 मई को बीकानेर के रणजीतपुरा में मजदूरी के लिए आए एक बुजुर्ग सरजीत राम (72) की गर्मी से मौत हो गई।

मेडिकल रिपोर्ट के बाद ही पता चलेगा की मौत की वजह हीटवेव है या फिर अन्य कारण। सीकर में एक व्यक्ति की मौत हो गई थी। परिजनों ने थाने में अत्यधिक गर्मी से मौत होने की रिपोर्ट दर्ज कराई।

जिला प्रशासन ने दावें को सहीं नहीं माना है। वहीं, अलवर जिले में एक व्यक्ति की मौत का मामला सामने आया है, लेकिन हीटवेव से मौत होने की पुष्टि नहीं हुई है।

राजस्थान में हीट स्ट्रॉक के 216 मामले

पहले हीटवेव से मौत पर नहीं मिलता था मुआवजा

राजस्थान में आपदा प्रबंधन अधिनियम-2005 राजस्थान में एक अगस्त 2007 में लागू किया गया था। इस अधिनियम के मुताबिक राजस्थान में भी हीटवेव घोषित आपदा नहीं है।

इसमें केंद्र की 10 व प्रदेश की केवल 2 आपदाओं को ही शामिल किया गया था। हीटवेव यानी लू को अभी तक प्राकृतिक आपदाओं की सूची में शामिल नहीं किया गया है।

इस कारण हीटवेव से मौत होने पर मृतकों के परिजनों को मुआवजा नहीं दिया जाता है। लेकिन मौजूदा सरकार ने हीटवेव को राज्य विशेष प्राकृतिक आपदा के रूप में अधिसूचित किया है।

ऐसे में प्रभावित परिवार को केंद्र के नॉर्म्स के अनुसार मुआवजा दिया जाने लगा है। पिछले साल हीटवेव से प्रदेश में करीब 67 मौतें हो गई थी। हालांकि, राज्य सरकार ने महज 9 मौत ही हीटवेव से होना माना था। हाईकोर्ट के आदेश पर उन्हें मुआवजा दिया गया था।



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