Thursday, January 15, 2026
Homeदेशकठिन राह, पक्के इरादे, गरीबी को मत देकर MBBS सीट जीती

कठिन राह, पक्के इरादे, गरीबी को मत देकर MBBS सीट जीती


Last Updated:

NEET Success Story: मेहनत और जज़्बे की मिसाल बनीं चंपा रास्पेडा, जिन्होंने नीट 2025 पास कर दिदाई जनजाति की पहली छात्रा के रूप में मेडिकल कॉलेज में प्रवेश लेकर इतिहास रच दिया और समाज को नई राह दिखाई.

कठिन राह, पक्के इरादे, गरीबी को मत देकर MBBS सीट जीतीNEET Success Story: गरीबी को शिकस्त देकर नीट पास करने में कामयाब रही ये आदिवासी लड़की
NEET Success Story: अगर मेहनत और जज़्बा हो, तो कोई भी बाधा बड़ी नहीं होती. यह कहानी न सिर्फ़ शिक्षा की ताक़त को दर्शाती है, बल्कि समाज में सकारात्मक बदलाव की दिशा में एक मजबूत कदम भी है. ओडिशा के मलकानगिरी ज़िले की चंपा रास्पेडा (Champa Raspeda) ने इतिहास रच दिया है. वह नीट 2025 पास करने वाली दिदाई जनजाति की पहली छात्रा बन गई हैं. अब उन्हें बालासोर के फ़कीर मोहन मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस की पढ़ाई के लिए दाख़िला मिल गया है. यह सफलता उनके साथ-साथ पूरे समुदाय के लिए एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है.

सीमित संसाधनों के बीच बड़ा सपना

चंपा मलकानगिरी ज़िले के कोरुकोंडा ब्लॉक की अमलीबेड़ा गांव की रहने वाली हैं. उनके पिता लछमू रास्पेडा एक छोटे किसान हैं और मां गृहिणी हैं. आर्थिक तंगी के बावजूद चंपा ने डॉक्टर बनने का सपना देखा और उसे साकार भी किया. उन्होंने अपनी शुरुआती पढ़ाई अनुसूचित जाति एवं जनजाति विकास विभाग द्वारा संचालित नंदिनीगुडा के PVTG बालिका शिक्षा परिसर से की. इसके बाद उन्होंने चित्रकोंडा के SSD गर्ल्स हाई स्कूल से 10वीं और गोविंदपल्ली के SSD हायर सेकेंडरी स्कूल से 12वीं की पढ़ाई पूरी की.

बीएससी की पढ़ाई बीच में छोड़ी, फिर भी नहीं मानी हार

12वीं के बाद उन्होंने बीएससी में दाख़िला लिया, लेकिन आर्थिक स्थिति खराब होने के कारण पढ़ाई जारी नहीं रख सकीं. इसके बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और अपने लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित रखा. उनकी पूर्व साइंस टीचर उत्कल केशरी दाश ने उनका मार्गदर्शन किया और चंपा ने बालासोर में नीट की मुफ्त कोचिंग ली. यही कोचिंग उनके डॉक्टर बनने की राह में एक अहम मोड़ साबित हुई.

मुख्यमंत्री ने दी बधाई

ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने चंपा की सफलता पर खुशी जाहिर की और कहा कि उनकी मेहनत और लगन ओडिशा के युवाओं के लिए प्रेरणा है. मुझे विश्वास है कि वह भविष्य में एक अच्छी डॉक्टर बनकर गरीब और ज़रूरतमंद लोगों की सेवा करेंगी. दिदाई जनजाति ओडिशा की 13 विशेष रूप से कमज़ोर जनजातियों (PVTG) में से एक है, जो खासकर मलकानगिरी जिले के जंगलों में रहती है. यह समुदाय पारंपरिक खेती, जंगलों से चीजें इकट्ठा करना और छोटे पैमाने पर कृषि पर निर्भर है. ऐसे में चंपा की यह उपलब्धि पूरे समुदाय के लिए प्रेरणा है.

authorimg

Munna Kumar

पत्रकारिता के क्षेत्र में 8 वर्षों से अधिक का अनुभव. दूरदर्शन, ज़ी मीडिया और News18 के साथ काम किया है. इन्होंने अपने करियर की शुरुआत दूरदर्शन दिल्ली से की, बाद में ज़ी मीडिया से जुड़े और वर्तमान में News18 Hin…और पढ़ें

पत्रकारिता के क्षेत्र में 8 वर्षों से अधिक का अनुभव. दूरदर्शन, ज़ी मीडिया और News18 के साथ काम किया है. इन्होंने अपने करियर की शुरुआत दूरदर्शन दिल्ली से की, बाद में ज़ी मीडिया से जुड़े और वर्तमान में News18 Hin… और पढ़ें

homecareer

कठिन राह, पक्के इरादे, गरीबी को मत देकर MBBS सीट जीती



Source link

RELATED ARTICLES
- Advertisment -

Most Popular

Recent Comments