नर्मदापुरम जिले का बाचावानी गांव में गणेश उत्सव की एक विशेष परंपरा निभाता चला आ रहा है। जहां देश भर में गणेश चतुर्थी धूमधाम से मनाई जाती है, वहीं बाचावानी में यह पर्व अनूठे ढंग से मनाया जाता है। यहां, केवल प्राचीन तिल गणेश मंदिर में ही भगवान गणेश की
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बाचावानी के ग्रामीण मानते हैं कि घरों में गणेश प्रतिमा स्थापित करने से अनिष्ट हो सकता है। ग्रामीणों ने बताया कि कुछ साल पूर्व ग्राम के बाहर से आए कुछ लोगों के घर में आग लग गई थी। फायर ब्रिगेड से घर की आग बुझाई गई तो पता चला कि उन्होंने अपने घर में भगवान गणेश की स्थापना कर ली थी। गांव वालों का मानना है कि इस तरह की और भी घटनाएं पूर्व में घटित हो चुकी हैं। संतान प्राप्ति की भी मान्यता है। जिन्हें संतान नहीं होती, भगवान गणेश झोली संतान से भरते है।
तिल गणेश मंदिर न केवल गाँव का एकमात्र पूजा स्थल है, बल्कि यह एक आश्चर्यजनक किंवदंती का केंद्र भी है। ग्रामीणों का मानना है कि माघ महीने में तिल गणेश चतुर्थी के दिन, भगवान गणेश की प्रतिमा का आकार तिल के बराबर बढ़ जाता है। इस दिन, दूर-दूर से भक्त इस चमत्कार को देखने और भगवान गणेश का आशीर्वाद लेने आते हैं। बाचावानी का यह अनोखा गणेश उत्सव श्रद्धा और आस्था का एक अद्भुत संगम है।
बाचावानी का तिल गणेश मंदिर जहां पर दूर-दूर से भक्त पहुंचते हैं।
दाहिनी सूंड वाली प्रतिमा, पूरा परिवार विराजमान
मंदिर में स्थित ऐतिहासिक प्रतिमा की विशेषता यह है कि इसमें एक दंत गणेश जी की सूंड दाहिनी ओर है। ऐसी प्रतिमा मप्र में बहुत कम मिलेगी हैं। हर जगह बायीं ओर सूंड वाली प्रतिमाएं ही मिलती हैं। मूर्ति का निर्माण एक ही पत्थर पर बनाई गई है। गणेश प्रतिमा के साथ ही ऋद्धि, सिद्धि, मूषक, शुभ, लाभ, चक्र , गदा, फरसा, माला भी बनी हैं।
पारंपरिक रूप से गणेश चतुर्थी से यहां विशेष पूजा होती है। जो अनंत चतुर्दशी तक चलती है। मंदिर में 6 पीढ़ी से पूजन कर रहे बैरागी परिवार के पुजारी अनंतदास बैरागी के अनुसार परंपरागत तरीके से एक ही परिवार के वंशज 6 पीढ़ियों से यहां पूजन करते आ रहे है। संतों ने ग्राम बाचावानी को गणेश धाम का नाम दिया। बाचावानी में विशाल यज्ञ का आयोजन धर्माचार्य 1008 परम संत पूज्य कमलेश्वर मुरारी महामंडलेश्वर द्वारा किया गया था।

प्रतिमा लेने आए थे राजा, नहीं ले जा पाएं
मंदिर के पुजारी अनंतदास वैष्णव बैरागी ने बताया दादाजी प्रहलाद दास जी बताते थे कि 400 साल पहले ग्राम बाचावानी फतेहपुर रियासत का हिस्सा था, जहां गौंड राजा का शासन था। उस समय यह प्रतिमा यहां खेत में मिली थी। राजा को यह प्रतिमा पसंद आ गई। उन्होंने हाथी पर रखकर प्रतिमा को फतेहपुर ले जाने का प्रयास किया, लेकिन प्रतिमा को उठाने के लिए बिठाया गया हाथी गणेश प्रतिमा को लेकर खड़ा भी नहीं हो सका था। अंत में हारकर यह माना गया कि श्री गणेश इसी स्थान पर ही विराजना चाहते हैं, तब यहीं मंदिर बना दिया गया।

तिल गणेश मंदिर में पूजा-पाठ करते हुए पुजारी अनंतदास वैष्णव बैरागी।
तिल गणेश चतुर्थी को हर साल तिल बराबर बढ़ती है प्रतिमा
गांव के 70 वर्षीय बुजुर्ग प्यारेलाल पटेल कहते है कि माघ महीने की तिल गणेश चतुर्थी को गणेश धाम में मेला लगता है। ऐसी मान्यता है कि चतुर्थी को भगवान गणेश की प्रतिमा तिल बराबर बढ़ती है। इस दिन उनका जन्मोत्सव मनाया जाता है। तिल गणेश के पर्व पर यहां मेला भरता है और दूर से लोग यहां आते हैं। यहां श्रद्धा से पूजा अर्चना करने से मनोकामना पूरी होती है। पुजारी अनंतदास ने बताया जब मेरे दादाजी, पिताजी मंदिर में पुजारी थे, तब आसानी से मूर्ति को उठाकर स्नान करा देते थे। अब इतना वजन हो गया कि आसानी से नहीं उठ पाते।

बाचावानी गांव गणेशधाम ऐसे पहुंचे
भगवान गणेश के अतिप्राचीन मंदिर में गणेश उत्सव के दौरान भक्तों की भीड़ उमड़ती है। यह मंदिर नर्मदापुरम से 90 किमी, पिपरिया से 18 किलोमीटर दूर पिपरिया गाडरवाडा रोड पर बनखेड़ी के पास बसे ग्राम बाचावानी में स्थित है, जो कि 400 वर्ष पुराना माना जाता है।
गणेश प्रतिमा विराजित करने पर पर लग जाती थी आग
गांव के 72साल के बुजुर्ग शंकरलाल पटेल ने कहा मैं 60सालों से देख रहा हूं कहीं भी गणेश जी प्रतिमा घरों में और पंडाल में नहीं बैठाई जाती है। हमारे बुजुर्ग बताते है कि एक बार किसी ने गांव की सीमा के अंदर गणेश उत्सव के दौरान गणेश जी की प्रतिमा विराजित की थी। लेकिन तब उस जगह आग लग गई थी, बाद में पता चला था कि जहां आग लगी, वहां गने प्रतिमा बैठाई गई थी। उन्होंने कहा गणेशधाम में ही पूरे गांव के लोग दोनों आरती में एकत्र होते है।
बीजेपी मंडल अध्यक्ष रमेश पटेल ने बताया मेरा इसी गांव में जन्म हुआ, भगवान गणेश जी की महिमा ऐसी है कि प्राकृतिक विपदाओं से भी वो रक्षा करते हैं। बाचावानी के खेतों में ओलों गिरते है। लेकिन इतना कभी नुकसान सामने नहीं आया।

साक्षात मंदिर में गणेश, इसलिए गांव में विराजित नहीं होती प्रतिमा
बाचावानी में गणेश प्रतिमा घरों में स्थापित नहीं की जाती, क्योंकि ग्रामीणों का मानना है कि स्वयं गणेश मंदिर में विराजमान हैं। शेरसिंह, शंकरलाल पटेल और प्यारेलाल पटेल समेत पूरे गाँव का यही मत है कि जब साक्षात गणेश मंदिर में हैं, तो अलग से प्रतिमा स्थापित करने की आवश्यकता नहीं है।

