Monday, April 13, 2026
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रॉक म्यूजिक का वो चमकता सितारा, 1 घटना के बाद वायलिन को नहीं लगाया हाथ, गानों पर सरकार ने लगा दिया था बैन


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फरहाद मेहराद, तेहरान में जन्मे फारसी रॉक म्यूजिक के दिग्गज थे. उन्होंने अपने संगीत से दुनियाभर के लोगों को सुकून पहुंचाया, लेकिन ईरानी सरकार ने उनके गानों पर बैन लगा दिया था. उन्होंने 1979 की क्रांति के बाद बैन…और पढ़ें

रॉक म्यूजिक का वो चमकता सितारा, 1 घटना के बाद वायलिन को नहीं लगाया हाथफरहाद मेहराद एक दुर्लभ संगीतकार थे. (फोटो साभार: IMDb)
नई दिल्ली: संगीत की दुनिया के कुछ सुर ऐसे होते हैं जो सीधे दिल में उतर जाते हैं. फरहाद मेहराद की आवाज भी कुछ ऐसी ही थी… मधुर, गहरी और सच्ची. उन्होंने कभी संगीत को एक करियर की तरह नहीं देखा, बल्कि एक मिशन की तरह जिया. उनका सफर किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं था. एक मासूम बच्चा, जो एक म्यूजिक इंस्ट्रूमेंट के टूटने से इतना दुखी हुआ कि उसने हमेशा के लिए उसे छोड़ दिया, आगे चलकर वही बच्चा फारसी रॉक म्यूजिक की पहचान बन गया. यह किस्सा जितना मजेदार है, उतना ही भावुक भी है.

फरहाद मेहराद का जन्म 20 जनवरी 1944 को ईरान की राजधानी तेहरान में हुआ था. उनके पिता एक राजनयिक थे और अक्सर विदेश में रहते थे. फरहाद का बचपन एक अनुशासित माहौल में बीता, लेकिन उनकी आत्मा हमेशा आजादी और कला की ओर खिंचती रही. जब वे केवल तीन साल के थे, तो अपने भाई के कमरे के बाहर बैठते थे. भाई की वायलिन की क्लास चलती थी और वे उसे सुनते थे. इस दिलचस्पी को देखकर उनके परिवार ने उनके लिए एक वायलिन खरीद लिया. लेकिन कुछ ही क्लास के बाद उनका वायलिन टूट गया, जिससे वे काफी आहत हुए. उन्होंने कहा, ‘वायलिन के टुकड़े-टुकड़े हो गए और मेरी आत्मा के भी.’ उन्होंने फिर कभी वायलिन को हाथ नहीं लगाया. हालांकि उनका संगीत के प्रति झुकाव कभी कम नहीं हुआ.

साहित्य में थी गहरी रुचि
स्कूल के दिनों में फरहाद मेहराद साहित्य से भी गहराई से जुड़ने लगे थे. उन्होंने हाई स्कूल में साहित्य पढ़ने की इच्छा जताई, लेकिन पारिवारिक दबाव के कारण उन्हें विज्ञान पढ़ना पड़ा. धीरे-धीरे यह घुटन इतनी बढ़ गई कि उन्होंने 11वीं कक्षा में ही स्कूल छोड़ दिया. इसके बाद उनका जीवन धीरे-धीरे संगीत की ओर मुड़ने लगा. हाई स्कूल छोड़ने के बाद फरहाद की मुलाकात एक अर्मेनियाई बैंड ‘द फोर एल्फ्स’ से हुई. वह बैंड के मेंबर्स के साथ समय बिताने लगे और गिटार बजाना सीखा. एक बार जब बैंड का सिंगर नहीं आया, तो फरहाद को पहली बार गाने का मौका मिला और यहीं से उनकी असली पहचान मिलनी शुरू हुई. उनकी गायकी के सब मुरीद हो गए. वे अंग्रेजी, इटैलियन और फ्रेंच में ऐसे गाते थे जैसे ये भाषाएं उनकी अपनी हों.

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