Sunday, April 12, 2026
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31000 KMPH की तूफानी स्‍पीड, 15000 किलोमीटर रेंज, ब्रह्मोस का बाप है यह मिसाइल


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DF-41 Dongfeng Missile: चीन पिछले कुछ दशकों में जबरदस्‍त आर्थिक प्रगति की है. डिफेंस टेक्‍नोलॉजी के क्षेत्र में पड़ोसी देश ने सफलता के झंडे गाड़े हैं. चीन के विकास का लोहा पूरी दुनिया मान रही है. बीजिंग ने ऐसे …और पढ़ें

चीन के DF-41 डॉन्‍गफेंग बैलिस्टिक मिसाइल की जद में अमेरिका जैसे देश भी हैं. (क्रेडिट: ग्‍लोबल टाइम्‍स)

DF-41 Dongfeng Missile: चीन ने आर्थिक के साथ ही तकनीकी क्षेत्र में भी गजब का विकास किया है. रेल से लेकर जेट तक के सेक्‍टर में पड़ोसी देश ने सफलता के झंडे गाड़े हैं. बताया तो यहां तक जाता है कि चीन ने पांचवीं पीढ़ी के साथ ही 6th जेनरेशन का फाइटर जेट भी डेवलप कर लिया है. हालांकि, अभी तक इसकी स्‍वतंत्र तरीके से पुष्टि नहीं हो सकी है. इसके अलावा चीन ने मिसाइल के क्षेत्र में भी अभूतपूर्व प्रगत‍ि की है. उसके भंडार में ऐसी-ऐसी मिसाइलें हैं, जिससे दुनिया का भयभीत होना स्‍वाभाविक है. DF-41 डॉन्‍गफेंग मिसाइल चीन के म्‍यान में सजा ऐसा वेपन है, जिसकी जद में ग्‍लोबल सुपरपावर अमेरिका भी है. DF-41 Dongfeng मिसाइल ICBM यानी इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल है, जिसकी रेंज 15000 किलोमीटर है. यह मिसाइल तकरीबन 31000 किलोमीटर प्र‍ति घंटे की रफ्तार (मैक-25) से मूव कर दुश्‍मनों को पलभर में खाक में मिलाने की क्षमता रखती है. भारत की ब्रह्मोस क्रूज मिसाइल स्‍पीड, रेंज और वॉरहेड के मामले में DF-41 Dongfeng के सामने कहीं नहीं टिकती है. हालांकि, ब्रह्मोस मिसाइल की गिनती भी दुनिया के खतरनाक क्रूज मिसाइल्‍स में होती है.

बीजिंग ने पिछले साल अपनी परमाणु क्षमता और सामरिक शक्ति को लेकर एक बड़ा संदेश दिया था, जब लगभग चार दशकों बाद चीन ने अपनी धरती से बाहर अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल (ICBM) का परीक्षण किया. इस टेस्‍ट ने अंतरराष्ट्रीय हलकों का ध्यान एक बार फिर बीजिंग की मिसाइल प्रगति पर केंद्रित कर दिया. माना जा रहा है कि इस परीक्षण में डीएफ-31एजी का इस्तेमाल किया गया था, जो तीसरी पीढ़ी का हथियार है. लेकिन, असली चर्चा चीन के और अधिक उन्नत और चौथी पीढ़ी के आईसीबीएम डीएफ-41 को लेकर है, जिसे आज चीन की सामरिक ताकत का सबसे धारदार हथियार माना जा रहा है.

डीएफ-41 का इतिहास

डीएफ-41 मिसाइल को 2017 में आधिकारिक रूप से डोंगफेंग सीरीज के हिस्से के रूप में लॉन्च की गई थी. डोंगफेंग यानी पूर्वी हवा. यह नाम माओ जेदांग के उस भाषण से लिया गया था, जिसमें उन्होंने पूर्व सोवियत संघ से बैलिस्टिक मिसाइल तकनीक मिलने के बाद कहा था कि अब दुनिया में दो हवाएं हैं– पूर्व की हवा और पश्चिम की हवा. इस मिसाइल का विकास 1986 में शुरू हुआ था. साल 1994 में इसका पहला परीक्षण हुआ और 2010 में इसे चीन की सेकंड आर्टिलरी कॉर्प्स को सौंपा गया. बाद में साल 2016 में यही यूनिट चीन की रॉकेट फोर्स में तब्दील कर दी गई. साल 2012 से 2016 के बीच डीएफ-41 के छह से आठ परीक्षण हुए. आखिरकार 2019 में चीन के स्थापना दिवस की 70वीं वर्षगांठ पर आयोजित सैन्य परेड में इसे पहली बार सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित किया गया था.

तकनीकी क्षमताएं

डीएफ-41 मिसाइल ठोस ईंधन (solid-fuel) से संचालित है, जिससे इसे कम समय में तैयार किया जा सकता है और यह शत्रु की नज़र से बच निकलने में सक्षम रहती है. तीन-स्टेज इंजन वाली यह मिसाइल 12,000 से 15,000 किलोमीटर तक मार करने में सक्षम है, यानी यह पूरे अमेरिकी मुख्य भूभाग को निशाना बना सकती है. इसकी गति मैक 25 तक (30870 किलोमीटर प्रति घंटा) पहुंच सकती है. डीएफ-41 की सबसे बड़ी ताकत है इसकी MIRV (Multiple Independently Targetable Re-entry Vehicle) तकनीक, जिससे एक ही मिसाइल में कई वारहेड्स फिट किए जा सकते हैं. चीनी मीडिया का दावा है कि इसमें 10 तक वारहेड्स लगाए जा सकते हैं. हालांकि, विशेषज्ञ मानते हैं कि वास्तव में यह तीन से पांच वारहेड्स तक ही प्रभावी रूप से ले जा सकता है. इसके अलावा इसमें डिकॉय और पेनिट्रेशन एड्स भी होते हैं, जो अमेरिकी मिसाइल डिफेंस सिस्टम को चकमा देने में मदद करते हैं.

चौंकाने वाली है इसकी खासियत

  • डीएफ-41 तीन संस्करणों में विकसित किया गया है – रोड मोबाइल, रेल मोबाइल और साइलो आधारित.
  • रोड मोबाइल संस्करण आठ-एक्सल ट्रांसपोर्ट लॉन्चर से लॉन्च होता है, जो दूर-दराज और कठिन इलाकों से भी हमले की क्षमता देता है.
  • रेल मोबाइल संस्करण गुप्तता यानी सिक्रेसी के लिहाज से खास माना जा रहा है, क्योंकि इसे यात्री ट्रेनों के रूप में छिपाया जा सकता है.
  • साइलो आधारित संस्करण के लिए चीन ने इनर मंगोलिया, गांसू और शिनजियांग जैसे इलाकों में सैकड़ों भूमिगत साइलो का निर्माण किया है.

कई गुना ज्‍यादा ताकतवर

  1. डीएफ-41 को चीन का अब तक का सबसे उन्नत आईसीबीएम माना जाता है. यह अपने पूर्ववर्ती मिसाइलों (डीएफ-4, डीएफ-5 और डीएफ-31) से कई गुना अधिक सक्षम है.
  2. डीएफ-5 की मारक क्षमता अधिक (13,000-16,000 किमी) है, लेकिन यह तरल ईंधन (liquid fuel) पर आधारित है और तैयारी में अधिक समय लेती है.
  3. डीएफ-31 में ठोस ईंधन का इस्तेमाल होता है, लेकिन इसकी रेंज अपेक्षाकृत कम है (7,200-8,000 किमी) और इसमें एक ही वॉरहेड लगाया जा सकता है.
  4. अमेरिका के पास फिलहाल केवल मिनुटमैन-III आईसीबीएम है, जिसकी रेंज करीब 13,000 किमी है. रूस भी अपनी नई पीढ़ी की मिसाइल RS-28 Sarmat विकसित कर रहा है, जिसकी रेंज 18,000 किमी तक बताई जाती है.

चीन की परमाणु रणनीति और बढ़ता जखीरा

चीन बार-बार कहता रहा है कि वह नो फर्स्ट यूज यानी परमाणु हथियारों के पहले इस्तेमाल की नीति पर कायम है. उसकी रणनीति केवल प्रतिरोध और जवाबी हमले की है. इसके बावजूद अमेरिकी रक्षा विभाग की रिपोर्टों में कहा गया है कि चीन दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ती परमाणु शक्ति है. साल 2022 की पेंटागन रिपोर्ट के मुताबिक, चीन के पास लगभग 350 आईसीबीएम थे. वहीं, स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट (SIPRI) की जुलाई 2023 की रिपोर्ट बताती है कि चीन ने अपने जखीरे में 90 नए वॉरहेड जोड़े हैं और अब उसके पास लगभग 500 परमाणु वॉरहेड हैं. अनुमान है कि अगले दस सालों में चीन की मिसाइल संख्या रूस और अमेरिका से भी आगे निकल सकती है.

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Manish Kumar

बिहार, उत्‍तर प्रदेश और दिल्‍ली से प्रारंभिक के साथ उच्‍च शिक्षा हासिल की. झांसी से ग्रैजुएशन करने के बाद दिल्‍ली यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता में PG डिप्‍लोमा किया. Hindustan Times ग्रुप से प्रोफेशनल कॅरियर की शु…और पढ़ें

बिहार, उत्‍तर प्रदेश और दिल्‍ली से प्रारंभिक के साथ उच्‍च शिक्षा हासिल की. झांसी से ग्रैजुएशन करने के बाद दिल्‍ली यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता में PG डिप्‍लोमा किया. Hindustan Times ग्रुप से प्रोफेशनल कॅरियर की शु… और पढ़ें

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