अभिव्यक्ति गाथा महोत्सव की रजत जयंती पर गुरुवार शाम रवीन्द्र भवन शायरी और संगीत से सराबोर रहा। चर्चित कवियित्री नायाब मिधा और उनके म्यूजिक पार्टनर अर्जन सिंह की जुगलबंदी ने दर्शकों को देर तक बांधे रखा। मेधा ने शो की शुरुआत भोपालवासियों से हालचाल पूछक
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मेधा ने अपनी कविताओं और गजलों से भावनाओं की गहराई को छुआ। उन्होंने कहा- क्यों ऐसा लगता है कि इस दुनिया का तिनका-तिनका मेरी परवाह करता है, कोई तो है ना, जो मेरे लिए दुआ करता है। इसके बाद उन्होंने मोहब्बत पर नई पंक्तियां सुनाईं, मुझे चांद देखना पसंद है, उसे चांद सा दिखना पसंद है, उसे कौन सिखाए सजना-संवरना।
बड़ी संख्या में लोग कार्यक्रम में शामिल हुए।
एकतरफा मोहब्बत पर बात करते हुए गुदगुदाया
मेधा ने कई गजलें भी प्रस्तुत कीं। उन्होंने एकतरफा मोहब्बत पर बात करते हुए दर्शकों को इतना गुदगुदाया कि पूरा हॉल देर तक हंसी से गूंजता रहा। इसके अलावा उन्होंने दर्द और जुदाई पर भी कविताएं सुनाईं। श्रोताओं ने हर शेर पर तालियां बजाकर उनका हौसला बढ़ाया।
इस दौरान अर्जन सिंह ने अपने संगीत से कार्यक्रम को यादगार बना दिया। उन्होंने ‘तेरे जैसा यार कहां’ और ‘यह दोस्ती हम नहीं तोड़ेंगे’ गाकर दोस्ती का जश्न मनाया। इसके साथ ही बशीर साहब का शेर पेश किया “दिखावे की मोहब्बत में मेरी दोस्ती ना मिला,अगर गले नहीं लगना तो जा हाथ भी ना मिला।
इसके बाद जब उन्होंने “तेरी जीत मेरी जीत, तेरा गम मेरा गम” गाना सुनाया, तो पूरा हॉल रंगीन लाइटों के बीच खड़ा हो गया। दर्शक हाथ उठाकर झूमने लगे और एक साथ गाना गाने लगे। उस पल हॉल का नजारा किसी बड़े कॉन्सर्ट जैसा लग रहा था। मेधा और अर्जन की जुगलबंदी ने शायरी और संगीत को ऐसा संगम दिया, जो सीधे दर्शकों के दिलों तक पहुंचा। जब मेधा ने भोपाल के लिए तालियां बजवाईं, तो पूरा सभागार तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा।

