Monday, April 13, 2026
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दिल्ली हाईकोर्ट बोला-व्यभिचार अब क्राइम नहीं, लेकिन इसके नतीजे खतरनाक: कहा- जिसकी शादी टूटी, वह पति या पत्नी के प्रेमी से हर्जाना मांग सकता है


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7 मिनट पहले

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दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि कोई पति या पत्नी अपने साथी के प्रेमी पर मुकदमा कर सकता है, और अपनी शादी तोड़ने, प्रेम को नुकसान पहुंचाने के लिए आर्थिक मुआवजे की मांग भी कर सकता है।

महिला की याचिका पर सुनवाई करते हुए जस्टिस पुरुषेन्द्र कौरव ने कहा कि भले ही व्यभिचार अब अपराध नहीं है, फिर भी इसके नतीजे खतरनाक हो सकते हैं।

15 सितंबर को हुई सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि विवाह की पवित्रता से व्यक्ति कुछ अपेक्षाएं रख सकते हैं। हालांकि निजी स्वतंत्रता का इस्तेमाल करना अपराध नहीं है।

दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि व्यभिचार या एडल्टरी को अपराध के तौर पर सजा नहीं दी जा सकती, लेकिन ऐसा करना जीवन और अधिकारों के लिए खतरनाक हो सकता है।

हालांकि पति और उसकी प्रेमिका को नोटिस जारी किया गया है, ताकि इस बात पर फैसला हो सके कि शादी टूटने की वजह महिला है या नहीं।

सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला दिया

सुनवाई के दौरान बेंच ने जोसेफ शाइन मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले का जिक्र किया। जिसमें कोर्ट ने व्यभिचार को अपराध से मुक्त कर दिया। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर के लिए लाइसेंस घोषित नहीं किया था। अगर मौजूदा मामला आगे बढ़ता है तो यह स्नेह के अलगाव के दावों को लागू करवाने वाला पहला मामला बन सकता है।

पहले जानें क्या था पूरा मामला

यह मामला एक पत्नी की पति की प्रेमिका के खिलाफ दर्ज शिकायत से जुड़ा था। महिला ने 2012 में शादी की। 2018 में उसके जुड़वां बच्चे हुए, लेकिन समस्या तब शुरू हुई जब 2021 में दूसरी महिला उसके पति के व्यवसाय में शामिल हो गई।

उसने आरोप लगाया कि दूसरी महिला उसके पति के साथ यात्राओं पर जाती थी और उसकी नियमित सामाजिक साथी बन गई। परिवार के दखल के बावजूद यह सब जारी रहा। महिला का पति खुलेआम प्रेमिका के साथ दिखाई दिया, बाद में तलाक के लिए अर्जी दी।

इसके बाद पत्नी ने पति के खिलाफ केस किया। हालांकि पति और उसकी प्रेमिका ने दावा किया कि शादी से जुडे़ मामलों की सुनवाई फैमिली कोर्ट में की जानी चाहिए, हाईकोर्ट में नहीं।

कोर्ट बोला- एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर को कानून में मंजूरी नहीं, लेकिन यह गलत

मामले पर विचार करने के बाद दिल्ली हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया कि भले भारतीय कानून स्पष्ट रूप से एलियनेशन ऑफ अफेक्शन की मंजूरी नहीं देता। लेकिन कोर्ट ने पहले भी इसे सैद्धांतिक रूप से गलत माना है। कोर्ट ने कहा, “जब तक पति और उसकी प्रेमिका कोई वैधानिक प्रतिबंध नहीं दिखाते, इस कार्रवाई पूरी तरह से खारिज नहीं किया जा सकता।”

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