रिजवान खान | मेरठ3 मिनट पहले
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मेरठ में शुक्रवार को संयुक्त गुर्जर परिसंघ ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को संबोधित एक ज्ञापन एडीएम को सौंपा। परिसंघ ने गुर्जर समाज की ऐतिहासिक पहचान से छेड़छाड़ और मिहिर भोज की विरासत को विकृत करने के प्रयासों का कड़ा विरोध दर्ज कराया। उन्होंने जेल में बंद समाज के लोगों की तत्काल रिहाई की भी मांग की।

ज्ञापन में आरोप लगाया गया कि मिहिर भोज के नाम से ‘गुर्जर’ शब्द हटाना अन्यायपूर्ण है और इतिहास से छेड़छाड़ का गंभीर अपराध है। परिसंघ ने प्रदेश सरकार से इस भेदभावपूर्ण नीति को तुरंत वापस लेने और मिहिर भोज की ऐतिहासिक पहचान को सुरक्षित रखते हुए ‘गुर्जर’ शब्द को यथावत रखने की मांग की है।

परिसंघ के अनुसार, सम्राट मिहिर भोज न केवल गुर्जर समाज, बल्कि संपूर्ण भारतवर्ष की गौरवशाली धरोहर हैं। उन्होंने 836 ईस्वी से 885 ईस्वी तक शासन किया और विदेशी आक्रांताओं को पराजित कर भारतीय संस्कृति की रक्षा की थी।

इसके अतिरिक्त, ज्ञापन में शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे समाज के लोगों पर दर्ज मुकदमों को वापस लेने और गिरफ्तार किए गए लोगों को रिहा करने की भी मांग की गई।

परिसंघ ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर शीघ्र कार्रवाई नहीं की गई, तो गुर्जर समाज अपने इतिहास, सम्मान और अस्तित्व की रक्षा के लिए राष्ट्रव्यापी आंदोलन करने को बाध्य होगा। उन्होंने प्रधानमंत्री से इस अन्याय को रोकने और न्याय सुनिश्चित करने की अपील की।
ज्ञापन सौंपने के दौरान परिसंघ के पदाधिकारी अश्वनी गुर्जर, जितेंद्र प्रधान, जगदीश गुप्ता, वीरेंद्र गुर्जर, अमित प्रधान, सुमित प्रधान और प्रवीण प्रधान सहित कई सदस्य मौजूद रहे।
अश्वनी गुर्जर ने एक बैठक को संबोधित करते हुए कहा कि गुर्जर समाज के साथ किसी भी प्रकार का अन्याय बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने जेल में बंद सभी गुर्जर समाज के लोगों की रिहाई और उन पर दर्ज मुकदमे वापस लेने की मांग दोहराई, साथ ही रिहाई न होने पर आंदोलन छेड़ने की चेतावनी भी दी।

