एसएमएस अस्पताल में थैलेसीमिया मरीजों में ब्लड ट्रांसफ्यूजन के दौरान संक्रमण रोकने वाला ल्यूको फिल्टर ही उपलब्ध नहीं है। गत 1 माह से मरीजों को बिना ल्यूको फिल्टर के खून चढ़ाया जा रहा है। इससे सर्दी लगकर बुखार आना, एलो इम्यूनाइजेशन नहीं होना और वायरल सं
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विभाग की ओर से फिल्टर उपलब्ध करवाने के लिए अस्पताल प्रशासन को पत्र लिखा गया है। एसएमएस अस्पताल में विभिन्न जिलों से रोज 10 से 15 और हर माह 175-200 थैलेसीमिया मरीज ब्लड ट्रांसफ्यूजन के लिए पहुंच रहे हैं। प्रदेश में थैलेसीमिया के 3 हजार मरीज हैं, जिसमें बच्चे व बड़े शामिल हैं।
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- ल्यूको फिल्टर एक ऐसा उपकरण है, जो खून को साफ करता है। जिससे उसमें मौजूद सफेद रक्त कोशिकाओं (ल्यूकोसाइट्स) को खत्म कर देता है। इससे किसी तरह का संक्रमण होने का खतरा नहीं रहता। थैलेसीमिया मरीजों में बार-बार खून चढ़ाया जाता है, उन्हें ल्यूको फिल्टर लगाया जाना चाहिए। फिल्टर खून को साफ करनें में मददगार होता है।
- देश में हर साल 10 हजार बच्चे थैलेसीमिया बीमारी के साथ जन्म लेते हैं। यह एक गंभीर और चिंताजनक ब्लड डिसऑर्डर बनता जा रहा है। शरीर में ब्लड कोशिकाओं का निर्माण सही तरीके से नहीं हो पाता है। इस जेनेटिक ब्लड डिसऑर्डर में क्रोमोसोम 11 पर बीटा ग्लोबिन जीन में पॉइंट म्यूटेशन के कारण होता है, जिससे शरीर में हीमोग्लोबिन सही तरीके से नहीं बन पाता है। हीमोग्लोबिन रेड ब्लड सेल्स में ऑक्सीजन ले जाने का काम करता है।
“थैलेसीमिया मरीजों में खून चढ़ाने के दौरान इस्तेमाल होने वाले ल्यूको फिल्टर के बारे में मालूम करता हूं। इसके बाद ही कुछ कह सकता हूं।” -डॉ. सुशील भाटी, अधीक्षक, एसएमएस अस्पताल जयपुर

