Thursday, January 15, 2026
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घी को इंग्लिश में क्या कहते हैं? बटर से कैसे है अलग, 90% नहीं जानते सही जवाब


हमारे देश में खाना बनाते वक्त घी और बटर का इस्तेमाल बहुत होता है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि घी और बटर में क्या फर्क होता है और इनका अंग्रेजी में सही नाम क्या है? ज्यादातर लोग घी और बटर को एक ही समझते हैं, लेकिन असल में ये दोनों अलग-अलग चीजें हैं और उनके इस्तेमाल स्वाद और फायदे भी अलग-अलग होते हैं.

घी का अंग्रेजी में नाम है “Clarified Butter.” इसका मतलब है कि घी बटर का एक खास और शुद्ध रूप है. बटर दूध की मलाई से बनता है, जिसमें लगभग 80-82% फैट होता है और बाकी पानी और दूध के ठोस पदार्थ. इस वजह से बटर ठंडा होने पर सख्त हो जाता है और जल्दी जल सकता है क्योंकि इसका जलने का तापमान कम होता है. इसलिए जब हम तली-भुनी चीजें बनाते हैं तो बटर जलकर स्वाद खराब कर सकता है.

दूसरी ओर, घी बटर को धीरे-धीरे पिघलाकर उसमें से पानी और दूध के ठोस पदार्थ निकालने के बाद बनता है। इस प्रक्रिया को ‘clarification’ कहते हैं, इसलिए इसे “Clarified Butter” कहा जाता है। घी में लगभग 99% फैट होता है, और इसका जलने का तापमान बहुत अधिक होता है, इसलिए यह खाना पकाने के लिए बेहतर विकल्प माना जाता है। इसके अलावा, घी का स्वाद बटर से अधिक गहरा और खास होता है, जो खाने का स्वाद भी बढ़ाता है.

स्वास्थ्य के लिहाज से भी घी और बटर में अंतर है. घी में लैक्टोज और केसिन नहीं होता, इसलिए जो लोग दूध से एलर्जी रखते हैं, वे भी घी आराम से खा सकते हैं. वहीं बटर में ये तत्व होते हैं, जो कुछ लोगों के लिए परेशानी पैदा कर सकते हैं. इसके अलावा, घी आयुर्वेद में एक औषधीय चीज के रूप में भी जाना जाता है, जो पाचन और त्वचा के लिए फायदेमंद माना जाता है.

अक्सर लोग सोचते हैं कि घी सिर्फ बटर ही है, लेकिन साफ करने के बाद का रूप. यह बात सही है, लेकिन घी का प्रोसेसिंग इसे बटर से पूरी तरह अलग बनाता है. इसलिए खाना बनाते समय घी और बटर दोनों का सही इस्तेमाल करना जरूरी है. अगर आपको हल्का स्वाद चाहिए तो बटर बेहतर है, लेकिन अगर तली-भुनी या तीखी चीजें बनानी हैं तो घी को प्राथमिकता दें.

आयुर्वेद के अनुसार घी (विशेषकर देसी गाय का शुद्ध घी) को सात्त्विक आहार और शरीर के लिए अमृत के समान माना गया है. यह पाचन को मजबूत करने के साथ-साथ पित्त दोष को संतुलित करता है, जिससे गैस, एसिडिटी और कब्ज जैसी समस्याएं कम होती हैं. घी में मौजूद अच्छे वसा और ओमेगा-3 फैटी एसिड मस्तिष्क को पोषण देते हैं, जिससे एकाग्रता और मानसिक शांति बढ़ती है.

यह त्वचा को भीतर से नमी देकर रूखापन और झुर्रियां कम करता है, वहीं बालों को भी मजबूत और चमकदार बनाता है. हड्डियों और जोड़ों के लिए भी यह उपयोगी है क्योंकि यह कैल्शियम के अवशोषण को बढ़ाता है और जोड़ों के दर्द व सूजन को कम करता है. आयुर्वेद में घी को ओजवर्धक यानी रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने वाला माना गया है, इसलिए यह मौसमी संक्रमण और कमजोरी में फायदेमंद है. रोजाना 1–2 चम्मच देसी घी भोजन या गुनगुने दूध में मिलाकर लेना सबसे उत्तम माना जाता है, लेकिन मोटापा, हाई कोलेस्ट्रॉल या लिवर संबंधी समस्या होने पर सेवन सीमित मात्रा में करना चाहिए.



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