सेलिना जेटली ने ऑस्ट्रिया के बिजनेसमैन पीटर हाग से साल 2010 में शादी की थी. सेलिना ने पिछले साल खुलासा किया था कि उनकी शादी लव मैरिज नहीं, बल्कि अरेंज मैरिज थी.साल 2012 में एक्ट्रेस ने जुड़वां बेटों को जन्म दिया और फिर 2017 में एक बार फिर जुड़वां बेटों के माता-पिता बने. दुर्भाग्यवश, इस दौरान उनके एक बेटे की दिल की बीमारी के कारण मौत हो गई. अब, शादी के 15 साल पूरे होने के बाद, सेलिना जेटली पति पीटर हाग से तलाक ले रही हैं. जिसके चलते वह चर्चा में हैं.
क्या आरोप हैं?
सेलिना जेटली ने मुंबई की अदालत में अपने ऑस्ट्रियन पति पीटर हाग पर घरेलू हिंसा, भावनात्मक, शारीरिक और यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया है. उन्होंने कहा कि पीटर ने उन्हें ब्लैकमेल किया, अश्लील तस्वीरें लेने के लिए मजबूर किया और इस तरह की यौन मांगें कीं, जिसमें यह भी कहा गया कि वह कंपनी के अन्य पुरुषों के साथ संबंध बनाएं. सेलिना ने बताया कि ये सब जबरन और दबाव में हुआ, जिससे उनका मानसिक और भावनात्मक संतुलन बिगड़ा.
इसके अलावा उन्होंने कहा कि पीटर ने उन्हें काम करने से रोका, उनके वित्तीय संसाधनों पर नियंत्रण किया और मुंबई के घर को छीनने की कोशिश की. सेलिना ने अदालत से ₹50 करोड़ मुआवजा और बच्चों की कस्टडी की मांग की है
महिला सुरक्षा नियम और विदेशी शादी में हक
सेलिना जेटली के मामले से कई महिलाएं सीख ले सकती हैं. अगर कोई महिला इस तरह की किसी भी समस्या से जूझ रही है, तो भारत में उनके लिए कई मजबूत कानून मौजूद हैं. खास बात यह है कि अगर आपकी शादी विदेश में हुई है, तब भी भारत के कानून आपकी मदद कर सकते हैं.
भारत में महिलाओं के लिए घरेलू हिंसा से सुरक्षा के क्या नियम हैं? और अगर पति विदेशी है, तो यह कानून उस पर कैसे लागू होते हैं?- इन सभी सवालों के जवाब जानने के लिए News18 की टीम ने दिल्ली हाई कोर्ट की वकील मिस शौर्या तिवारी से बात की और दो अहम सवालात किए. जिसके बाद उन्होंने दोनो ही सवालों के बारे में विस्तार से बताया है-
सवाल-1.भारत में महिलाओं के लिए घरेलू हिंसा कानून क्या है?
जवाब- हाई कोर्ट की वकील मिस शौर्या तिवारी ने बताया कि संविधान में महिलाओं को समानता के साथ सुरक्षा और जीवन का अधिकार मिला है. विवाहित महिलाओं को घरेलू हिंसा से बचाने के लिए भारत में प्रोटेक्शन ऑफ विमैन फ्रॉम डोमेस्टिक वायलेंस एक्ट-2005 है. अदालतों के फैसलों के अनुसार यह कानून लिव-इन में रहने वाली महिलाओं को भी सुरक्षा प्रदान करता है. यह कानून शारीरिक हिंसा के साथ आर्थिक, मनोवैज्ञानिक और दूसरी तरह के हिंसा के खिलाफ सुरक्षा देने के साथ यौन प्रताड़ना के खिलाफ भी महिलाओं को सुरक्षा प्रदान करता है.
कानून की धारा-22 के तहत मुआवजे का अधिकार है. हिंसा करने वाले पति और अन्य पारिवारिक जनों के खिलाफ पुरानी आईपीसी की धारा-498-ए और बीएनएस के तहत 85 के तहत आपराधिक मामला भी दर्ज हो सकता है. किसी भी तरह हिंसा के खिलाफ बीएनएस में धारा-115 (2) और 117 (2) में प्रावधान किये गये हैं.
सवाल-2. भारतीय घरेलू हिंसा कानून के नियम विदेशी पति पर किस तरह से लागू होते हैं?
जवाब- मिस शौर्या जानकारी देते हुए कहा कि विदेशी पति के खिलाफ भारतीय कानून लागू होने के तीन पहलू हैं. पहला-शादी भारत में हुई थी या विदेश में रजिस्टर्ड है. दूसरा-घरेलू हिंसा का मामला भारत में घटित हुआ या फिर विदेश में. तीसरा-पति भारत का नागरिक है या फिर विदेशी नागरिक. अगर पति और पत्नी दोनों भारतीय नागरिक हैं तो फिर उनकी शादी कहीं पर भी रजिस्टर्ड हो, पत्नी को घरेलू हिंसा कानून मामले में भारतीय अदालतों से न्याय मिल सकता है.
पति विदेशी नागरिक हो और घरेलू हिंसा का मामला भारत में घटित हुआ हो तो भी ऐसे आपराधिक मामलों में भारतीय अदालतों का क्षेत्राधिकार बनता है. विदेशी नागरिक पति और विदेशों में हुई घरेलू हिंसा के मामलों में भारतीय अदालतों का क्षेत्राधिकार स्थापित करने में गवाह और सबूतों के साथ कई कानूनी चुनौतियां सामने आ सकती हैं. ऐसे मामलों में बॉम्बे हाईकोर्ट की नागपुर बेंच के 2023 के फैसले के अनुसार भारतीय अदालतों का क्षेत्राधिकार बन सकता है.
NRI महिलाओं के लिए खास मदद:
विदेश मंत्रालय (MEA) और भारतीय दूतावास सहायता देते हैं. अगर पति विदेश भाग जाए, तो 498A IPC के तहत FIR दर्ज कर लुकआउट नोटिस जारी किया जा सकता है.
उदाहरण: कई NRI महिलाओं ने अमेरिका या यूरोप में रहने वाले पतियों के खिलाफ भारत में DV केस जीते हैं. कानून महिलाओं को संपत्ति, बच्चों की कस्टडी और मुआवजा दिलाने में मदद करता है. हालांकि, अगर पति विदेश में स्थायी रूप से रहता हो, तो प्रक्रिया लंबी हो सकती है. इसलिए, पीड़ित महिलाओं को तुरंत पुलिस या लीगल एड हेल्पलाइन (1091) से संपर्क करना चाहिए.
सेलिना जेटली का केस दिखाता है कि घरेलू हिंसा कोई सीमा नहीं मानती-चाहे पति भारतीय हो या विदेशी. PWDVA जैसे कानून महिलाओं को मजबूत ढाल देते हैं और विदेशी पतियों पर भी सख्ती से लागू होते हैं.ऐसे में कोई भी महिला बिना डरे अपने हक की लड़ाई लड़ सकती है.

