Friday, June 5, 2026
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कृषि विवि वीसी डॉ. अरुण कुमार को हाईकोर्ट से झटका: एकल पीठ के आदेश पर रोक, वीसी पद पर बहाली टली – Jodhpur News


डॉ. अरुण कुमार (फाइल फोटो)

स्वामी केशवानंद राजस्थान कृषि विश्वविद्यालय, बीकानेर के कुलपति (वीसी) डॉ. अरुण कुमार को राजस्थान हाईकोर्ट की खंडपीठ से बड़ा झटका लगा है। कोर्ट ने एकल पीठ के उस आदेश पर रोक लगा दी है, जिसके जरिए उन्हें सेवा में बहाल किया गया था। कार्यवाहक मुख्य न्याया

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दरअसल, कृषि विश्वविद्यालय जोधपुर और राज्य सरकार ने एकल पीठ के 16 अक्टूबर के अंतरिम आदेश को चुनौती दी थी। खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि अंतरिम स्तर पर अंतिम राहत नहीं दी जा सकती। कोर्ट ने एकल पीठ से मुख्य याचिका का निपटारा जल्द करने का आग्रह किया है।

राज्य सरकार की तरफ से कहा गया कि एकलपीठ के आदेश से अजीब स्थिति हो गई है। कुलपति तो है, लेकिन वो काम नहीं कर सकते और सरकार नया लगा नहीं सकती। इस वजह से काम नहीं हो पा रहे हैं। इमेज सोर्स – AI

जानें…क्या है पूरा मामला?

कुलाधिपति (राज्यपाल) ने 26 अगस्त 2025 को एक आदेश जारी कर डॉ. अरुण कुमार को कुलपति पद से बर्खास्त (Terminate) कर दिया था। डॉ. कुमार ने इसे हाईकोर्ट में चुनौती दी। 16 अक्टूबर को सुनवाई करते हुए जस्टिस विनीत कुमार माथुर की एकल पीठ ने उनकी बर्खास्तगी पर रोक लगा दी थी और उन्हें सेवा में बहाल करने का निर्देश दिया था। हालांकि, एकल पीठ ने यह शर्त भी लगाई थी कि वे वेतन तो लेंगे, लेकिन कुलपति के रूप में कोई कार्य नहीं करेंगे।

सरकार का तर्क: विवि में संवैधानिक संकट

सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता (AAG) महावीर बिश्नोई ने खंडपीठ के समक्ष तर्क दिया कि एकल पीठ के आदेश से अजीब स्थिति पैदा हो गई है। वीसी पद पर हैं, लेकिन काम नहीं कर सकते, जिससे विश्वविद्यालय में कोई कार्यकारी कुलपति नहीं है। उन्होंने दलील दी कि अंतरिम आदेश के जरिए ही अंतिम राहत दे दी गई, जो कानूनन सही नहीं है।

कोर्ट ने कहा- अंतरिम आदेश में फाइनल रिलीफ नहीं दे सकते

खंडपीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि “प्रथम दृष्टया हमारा मानना है कि यदि एकल पीठ इस निष्कर्ष पर पहुंचती है कि अपीलकर्ता (सरकार/कुलाधिपति) की कार्रवाई कानूनन गलत थी, तो अंतिम आदेश पारित किया जाना चाहिए था। अंतरिम आदेश द्वारा अंतिम राहत नहीं दी जा सकती”।

आदेश: पैराग्राफ 15 पर रोक

कोर्ट ने अपने फैसले में एकल पीठ के 16 अक्टूबर के आदेश के पैराग्राफ नंबर 15 में दिए गए निर्देशों पर रोक लगा दी है। यानी, डॉ. अरुण कुमार की बहाली फिलहाल प्रभावी नहीं रहेगी। साथ ही, कोर्ट ने कहा कि राज्य सरकार एकल पीठ की टिप्पणियों के संबंध में आगे की कार्यवाही करने के लिए स्वतंत्र है।

ये था बर्खास्तगी का कारण

डॉ. अरुण कुमार को वर्ष 2022 में बीकानेर कृषि विवि का कुलपति नियुक्त किया गया था। बाद में जून 2024 में उन्हें जोधपुर कृषि विश्वविद्यालय का चार्ज दिया गया था। इस दौरान उनके खिलाफ विभिन्न गंभीर शिकायतें राजभवन तक पहुंची।

राज्य सरकार के निर्देश पर संभागीय आयुक्त जोधपुर ने दोनों विश्वविद्यालयों से संबंधित मामलों की विस्तृत जांच की। 6 जून 2025 और 2 जुलाई 2025 को प्रस्तुत जांच रिपोर्ट में डॉ. अरुण कुमार पर अधिनियम के प्रावधानों की जानबूझकर अनदेखी, शक्तियों का दुरुपयोग, विश्वविद्यालय की निधियों में गड़बड़ी, अवैधानिक नियुक्तियां और वित्तीय नुकसान पहुंचाने जैसे आरोप प्रथम दृष्टया साबित पाए गए।

राज्य सरकार से परामर्श के बाद राजभवन ने आदेश जारी कर डॉ. अरुण कुमार को तत्काल प्रभाव से दोनों विश्वविद्यालयों के कुलपति पद से हटा दिया था।



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