Wednesday, January 14, 2026
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शाकंभरी नवरात्रि क्या है ? दिसंबर में कब से शुरू होगा उत्सव, जानें महत्व


Shakambhari Navratri 2025: साल में 4 नवरात्रि होती हैं, चैत्र और शारदीय नवरात्रि मां दुर्गा को समर्पित है तो वहीं आषाढ़ और माघ महीने की गुप्त नवरात्रि में 10 महाविद्या की पूजा होती है, लेकिन इसके अलावा पौष माह में भी नवरात्रि मनाई जाती है, इसे शाकंभरी नवरात्रि के नाम से जाना जाता है.

शाकंभरी नवरात्रि 2025 डेट

शाकंभरी नवरात्रि देवी शाकंभरी को समर्पित है. इस साल शाकंभरी नवरात्रि 28 दिसंबर 2025 से शुरू होकर 3 जनवरी 2026 को समाप्त होगी. ये नवरात्रि केवल 8 दिन की होती है जो मुख्य रूप से राजस्थान, कर्नाटक, महाराष्ट्र, तमिलनाडु और उत्तर प्रदेश की कई जगहों पर बहुत ही धूमधाम एवं हर्षोल्लास से मनाई जाती है.

ये पर्व पौष मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी से लेकर पूर्णिमा तक मनाया जाता है. इस नवरात्रि का पहला दिन बनादा अष्टमी के नाम से जाना जाता है और आखिरी दिन शाकंभरी पूर्णिमा के रूप में मनाया जाता है.

कौन है मां शाकंभरी 

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां शाकंभरी देवी भगवती का ही रूप है. माता शाकम्भरी को वनस्पति की देवी कहा जाता है. देवी भगवती ने पृथ्वी को अकाल तथा खाद्य संकट से मुक्त करने के लिए देवी शाकम्भरी के रूप में अवतार लिया था. शाकम्भरी माता को सब्जियों, फलों तथा हरी पत्तियों की देवी के रूप में भी जाना जाता है. उन्हें फलों एवं सब्जियों के हरे-भरे परिवेश में विराजमान दर्शाया जाता है.

शाकंभरी नवरात्रि पूजा विधि

  • शाकंभरी नवरात्रि की पूजा करने के लिए सुबह जल्दी उठ कर नित्यक्रम से निवृत्त होने के बाद स्नान करें.
  • साफ कपड़े पहन कर पूजा स्थान को साफ करें.
  • मिट्टी के पात्र में जौ के बीज बोकर उस पर पानी का छिड़काव करें.
  • शाकंभरी नवरात्रि के प्रथम दिन शुभ मुहूर्त में कलश को लाल रंग के कपड़े में लपेट कर पूजा स्थल पर स्थापित करें.
  • कलश में गंगाजल भर कर उसपर आम की पत्तियां और जटा वाला नारियल रखें.
  • नारियल में लाल चुनरी और कलावा बांधे. फूल, माला, रोली, कपूर, अक्षत से मां दुर्गा की आराधना करें.
  • नवरात्रि के आखिरी दिन माता की पूजा करने के बाद घट विसर्जन करके बेदी से कलश को उठाएं.

शाकंभरी नवरात्रि का महत्व

8 दिन के इस पर्व में मां शाकंभरी की पूजा करने पर अन्न-धन के भंडार भरे रहते है.ये पर्व किसानों और कृषि से जुड़े लोगों के लिए खास महत्व रखता है, क्योंकि यह फसलों की समृद्धि और बेहतर उत्पादन का प्रतीक है. देवी शाकंभरी की कृपा से कृषि भूमि उपजाऊ होती है और पर्यावरण में संतुलन बना रहता है.

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