राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष के प्रसंग पर सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत का देशभर में प्रवास हो रहा है। इसी श्रृंखला में उनका दो दिवसीय प्रवास भोपाल में हुआ।
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पहले दिन कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में उन्होंने युवाओं से संवाद किया। इस दौरान बांग्लादेश में हिंदुओं की स्थिति, डेमोग्राफी, एआई, तकनीक, बच्चों के करियर और संघ के 100 वर्ष से जुड़े प्रश्नों के उत्तर दिए। भोपाल के युवा अंकित सप्रे ने बांग्लादेश में हिंदुओं की स्थिति पर सवाल पूछा।
भागवत ने कहा कि वहां के हिंदुओं की जो मदद कर सकते हैं, वो सब कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि हिंदु वहां मायनोरिटी में हैं इसलिए हालात वहां ऐसे हैं। हिंदु जहां मायनोरिटी में आ गया, वहां प्रभाव कम हो गया। इसलिए हिंदु जनसंख्या और भावना सतत बढ़ती रहनी चाहिए।
तीन संतान जरूरी, इससे बच्चे ईगो मैनेजमेंट सीखते हैं
एक सवाल के जवाब में भागवत ने कहा कि डॉक्टर्स, विशेषज्ञ और नीति विशेषज्ञों का कहना है कि तीन संतान होना चाहिए। कम से कम दो संतान तो रहंे ही। इसके पीछे उन्होंने तर्क दिया कि दो बच्चे या तीन बच्चे जब परिवार में रहते हैं तो वे ईगो मैनेजमेंट सीखते हैं।
कार्यक्रम में संघ के अखिल भारतीय बौद्धिक सह प्रमुख दीपक विस्पुते ने संघ यात्रा के 100 वर्षों के बारे में बताया और कहा कि संघ स्वामी विवेकानंद की बातों का अनुसरण करते हुए काम कर रहा है। भोपाल करुणा धाम के प्रमुख सुदेश शांडिल्य बोले कि संघ समर्थवान युवा तैयार कर रहा है। इस मौके पर मध्यभारत प्रांत के सह संघचालक डॉ. राजेश सेठी भी रहे।
चार बड़ी बातें, जो संघ प्रमुख ने कहीं
- तकनीक को हावी न होने दें – एक युवा के सवाल पर जवाब दिया कि इतने योग्य बनो कि एआई या अन्य तकनीक आपको न चलाए, बआप उनको कंट्रोल करो। योग्य के साथ सकारात्मक सोच वाले युवाओं को तैयार करना होगा। इससे तकनीक का उपयोग भले में होगा।
- जबरदस्ती करियर का निर्णय न लें – करियर संबंधी एक सवाल के जवाब में बोले कि माता पिता को अपने बच्चे की क्षमता देखकर उसके करियर का निर्णय लेना चाहिए। जबरदस्ती उसे किसी फील्ड में न धकेलें।
- बच्चों के पालन पोषण पर – माता पिता बच्चों को ऐसे संस्कार दे कि वह समर्थवान बनें। 12 साल से ऊपर के बच्चों के शिक्षक और दोस्त आदर्श होते हैं। अच्छे दोस्त बनाने में मदद करें।
- युवा आदर्श बने – फिल्म कुली का उदाहरण देते हुए कहा कि अमिताभ बच्चन ने लाल कुर्ता पहना तो उस समय लाल शर्ट या कुर्ता पहनने लगे। यानी युवा फैशन फॉलो करते हैं। हमें अपने युवाओं को आदर्श बनाना होगा, ताकि छोटी छोटी जगह में लोग इनको फॉलो करें।

