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नई दिल्ली23 मिनट पहले
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खड़गे ने कहा रूस तेल खरीद मोगेंबो खुश करने जैसी स्थिति है। file
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के बयानों को लेकर पीए मोदी पर टिप्पणी की।
खड़गे ने सोमवार को कहा- मैं नहीं समझ पा रहा कि मोदी ट्रंप के सामने क्यों झुक रहे हैं। यह देश के लिए ठीक नहीं है। आपको देश के लिए खड़ा होना चाहिए। देश ने आपको प्रधानमंत्री सिर हिलाने के लिए नहीं चुना।
दरअसल खड़गे का बयान ट्रम्प के दावे पर आया है, जिसमें उन्होंने कहा कि रूस से तेल आयात पर अमेरिकी नाराजगी के बाद भारत ने तेल खरीद घटाई, क्योंकि मोदी मुझे (ट्रम्प) खुश करना चाहते थे।
खड़गे ने वेनेजुएला की स्थिति पर भी चिंता जताते हुए कहा- वहां बन रहे हालात दुनिया के लिए अच्छे नहीं हैं। डराने और विस्तारवादी नीति ज्यादा समय तक नहीं चलती।
उन्होंने कहा कि हिटलर और मुसोलिनी जैसे लोग इतिहास बन चुके हैं। वैश्विक शांति बिगाड़ने वाली सोच ठीक नहीं है।

कांग्रेस ने 3 सवाल…
- क्या भारत की विदेश नीति अब अमेरिका तय कर रहा है?
- क्या रूस से तेल आयात घटाने का फैसला ट्रंप को खुश करने के लिए लिया गया?
- ट्रंप की धमकियों और दावों पर मोदी चुप क्यों हैं?
भारत-पाक शांति दावे पर तंज
खड़गे ने ट्रम्प के उस दावे पर भी सवाल उठाया, जिसमें वे बार-बार भारत और पाकिस्तान के बीच शांति कराने की बात कहते हैं। खड़गे बोले- ट्रम्प कम से कम 70 बार कह चुके हैं कि उन्होंने भारत-पाक के बीच शांति कराई। क्या इसका मतलब है कि दुनिया उनके आगे झुक जाए? दुनिया नहीं झुकेगी।
5 जनवरी: रूस से भारत का तेल आयात घटने पर ट्रम्प बोले- मोदीे जानते थे मैं नाखुश था
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने भारत के रूस से तेल आयात कम करने को लेकर बयान दिया। ट्रम्प ने कहा- भारत ने यह फैसला उन्हें खुश करने के लिए लिया। वे मुझे खुश करना चाहते थे। प्रधानमंत्री मोदी बहुत अच्छे इंसान हैं। वह जानते थे कि मैं खुश नहीं था, इसलिए मुझे खुश करना जरूरी था। हम व्यापार करते हैं और उन पर टैरिफ बढ़ा सकते हैं।
दरअसल, यूक्रेन युद्ध के बाद भारत रूस का सबसे बड़ा तेल खरीदार बन गया था। अमेरिकी अधिकारियों ने आरोप लगाया था कि भारत रूस से तेल खरीदकर यूक्रेन पर हो रहे हमलों को फंड कर रहा है। इसे लेकर ट्रम्प प्रशासन ने भारत पर 25% टैरिफ भी लगाया था। पूरी खबर पढ़ें…

रूस ने डिस्काउंट देना कम किया
यूक्रेन युद्ध के बाद रूस ने 20-25 डॉलर प्रति बैरल सस्ता क्रूड ऑयल बेचना शुरू किया। तब अंतरराष्ट्रीय मार्केट में कच्चे तेल की कीमत 130 डॉलर प्रति बैरल थी, ऐसे में ये छूट भारत के लिए किफायती थी।
हालांकि अब अंतरराष्ट्रीय मार्केट में कच्चे तेल की कीमत 63 डॉलर प्रति बैरल हो गई है। रूस ने भी अपनी छूट घटाकर 1.5 से 2 डॉलर प्रति बैरल कर दी है। इतनी कम रियायत में भारत को पहले जैसा फायदा नहीं मिल रहा, ऊपर से रूस से तेल लाने में शिपिंग और बीमा खर्च भी ज्यादा पड़ता है।
इसी वजह से भारत अब दोबारा सऊदी, UAE और अमेरिका जैसे स्थिर और भरोसेमंद सप्लायर्स से तेल खरीद रहा है, क्योंकि अब कीमत में पहले जैसा बड़ा अंतर नहीं बचा।

भारत पर 50% टैरिफ लगा चुका अमेरिका
अमेरिका अब तक भारत पर 50% टैरिफ लगा चुका है। इसमें से 25% ‘रेसिप्रोकल (जैसे को तैसा) टैरिफ’ और 25% टैरिफ रूसी तेल खरीदने की वजह से लगाया गया है।
इसके चलते भारत को अमेरिका में अपना सामान बेचने में मुश्किलों का सामना करना पड़ा रहा है, जिसका असर भारत के निर्यात पर पड़ रहा है। दोनों देशों के बीच टैरिफ विवाद को निपटाने के लिए ट्रेड डील पर बातचीत भी चल रही है।
भारत चाहता है कि उस पर लगाए गए कुल 50% टैरिफ को घटाकर 15% किया जाए और रूस से कच्चा तेल खरीदने पर जो एक्स्ट्रा 25% पेनाल्टी लगाई गई है, उसे पूरी तरह खत्म किया जाए। दोनों देशों के बीच चल रही इस वार्ता से नए साल में कोई ठोस फैसला निकलने की उम्मीद है।

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