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आज हम आपको जंगल में उगने वाली एक ऐसी सब्जी की जानकारी दे रहे हैं, जिसका सेवन जंगली क्षेत्र के आस पास रहने वाले ट्राइब्स करते हैं. वाइल्ड लाइफ की जानकारी रखने वाले विशेषज्ञ बताते हैं कि यह सब्जी कुछ और नहीं, बल्कि मशरूम की एक जंगली और दुर्लभ किस्म भुटकी है. पश्चिम चंपारण के वन वर्ती क्षेत्रों सहित नेपाल में भी इस जंगली सब्जी को भुटकी और फुटकी दोनों नामों से जाना जाता है.
मुख्य रूप से नेपाल के दक्षिणी मैदानों के पश्चिमी भाग के थारू सहित बिहार के पश्चिम चंपारण जिले के वन वर्ती क्षेत्रों में रहने वाले उरांव जनजाति ( आदिवासी) के लोग जंगल की इस सब्जी का सेवन खूब करते हैं.

वाल्मीकि नगर जंगल के समीप रहने वाले निवासी बताते हैं कि जंगल में यह सब्जी दीमक के टीलों के आसपास उगती है. मुख्य रूप से भालू इसे खाना बेहद पसंद करते हैं. इसलिए कई बार वो रहने के लिए अपनी गुफा भुटकी वाली क्षेत्र में ही बनाते हैं.

भुटकी मुख्य रूप से बरसात के दिनों में उगती है. वन्य जीवों से भरे घने जंगल में उगने की वजह से इसे इकट्ठा करना बेहद मुश्किल और खतरों से भरा होता है. साथ ही जंगल की अमानत होने की वजह इसे भी तोड़कर लाना भी वन कानून के तहत कानून अपराध माना जाता है.
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हालांकि, जंगल के समीप रहने वाले आदिवासी कभी कभार इसे चुप चाप इकट्ठा कर लाते हैं और बाजार में 500 से 1000 रुपए प्रति किलो तक की दर पर बेचते हैं. इस सब्जी के बारे में सबसे रोचक बात यह बताई जाती है कि यह जंगल की आग से बनने वाली राख में उगती है. यही कारण है कि इसका ऊपरी रंग काला होता है.

इस सब्जी को बनाने से पहले इसकी अच्छी सफाई अनिवार्य है. जानकार बताते हैं कि इसका स्वाद मटन से मिलता है. यदि आप इसे कायदे से बनाते हैं, तो यकीन मानिए कि खाने वाले अपनी उंगलियां तक चाटने को मजबूर हो जाएंगे.

