Monday, April 13, 2026
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‘अगर 10% लोग वोट नहीं करते और जीत का अंतर…’ चुनावी नतीजों पर सुप्रीम कोर्ट


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‘अगर 10% लोग वोट नहीं करते और जीत का अंतर…’ चुनावी नतीजों पर सुप्रीम कोर्ट

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सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि पहले अपीलीय ट्रिब्यूनल के सामने किसी उम्मीदवार को ज़्यादा अहमियत दी जाती थी, क्योंकि किसी उम्मीदवार को चुनाव लड़ने के अधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता. कृपया यह न सोचें कि हमारे मन में यह सवाल नहीं है कि उन लोगों का क्या होगा जिन्हें बाहर कर दिया गया है.

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सुप्रीम कोर्ट में एसआईआर को लेकर बहस हुई. (फाइल फोटो)

नई दिल्ली. सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को कहा कि केंद्रीय निर्वाचन आयोग (ईसीआई) ने पश्चिम बंगाल में मतदाता सूचियों के ‘विशेष गहन पुनरीक्षण’ (एसआईआर) के दौरान ही ‘संदिग्ध मतदाताओं’ की एक सूची तैयार की, जिसमें एक ‘तार्किक विसंगति’ थी. प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ में शामिल जस्टिस जॉयमाल्य बागची ने आगे कहा कि पश्चिम बंगाल में मतदाता अब अलग-अलग संवैधानिक संस्थाओं के बीच पिस रहे हैं. जस्टिस बागची ने यह टिप्पणी तब की, जब ईसीआई ने यह तर्क दिया कि न्यायिक अधिकारियों ने 47 प्रतिशत मामलों को खारिज कर दिया था; ये वही अधिकारी थे जिन्होंने चुनाव आयोग द्वारा जारी किए गए नोटिसों पर फैसला सुनाया था।

जस्टिस बागची ने कहा, “यहां बात यह नहीं है कि ‘परिणाम ही साधनों को सही ठहराते हैं’, बल्कि यह है कि ‘साधन ही परिणाम को सही ठहराते हैं’. यह राज्य सरकार और चुनाव आयोग के बीच की लड़ाई नहीं है. यह कोई ‘एक-दूसरे पर दोष मढ़ने का खेल’ भी नहीं है. यह तो उस मतदाता की स्थिति से जुड़ा मामला है, जो दो संवैधानिक संस्थाओं के बीच फंस गया है. अदालतों ने केवल चुनावों को बढ़ावा देने के लिए हस्तक्षेप किया है, न कि उनमें रुकावट डालने के लिए.”

हालांकि, जस्टिस बागची ने यह भी कहा कि जब तक “बहुत बड़ी संख्या में वोटरों को बाहर नहीं किया जाता”, तब तक चुनाव नतीजों में दखल नहीं दिया जा सकता. उन्होंने आगे कहा, “अगर 10 प्रतिशत लोग वोट नहीं करते और जीत का अंतर 10 प्रतिशत से ज़्यादा है, तो… अगर यह 5 प्रतिशत से कम है, तो हमें इस पर गहराई से सोचना होगा. पहले अपीलीय ट्रिब्यूनल के सामने किसी उम्मीदवार को ज़्यादा अहमियत दी जाती थी, क्योंकि किसी उम्मीदवार को चुनाव लड़ने के अधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता. कृपया यह न सोचें कि हमारे मन में यह सवाल नहीं है कि उन लोगों का क्या होगा जिन्हें बाहर कर दिया गया है.”

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Rakesh Ranjan Kumar

राकेश रंजन कुमार को डिजिटल पत्रकारिता में 10 साल से अधिक का अनुभव है. न्यूज़18 के साथ जुड़ने से पहले उन्होंने लाइव हिन्दुस्तान, दैनिक जागरण, ज़ी न्यूज़, जनसत्ता और दैनिक भास्कर में काम किया है. वर्तमान में वह h…और पढ़ें



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