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Samrat choudhary first day in CM Office: सम्राट चौधरी बिहार के 24वें सीएम बन गए हैं. क्या सम्राट चौधरी की नई पारी बिहार की राजनीति का नक्शा बदल पाएगी? समय के साथ इसका जवाब तो मिल ही जाएगा, लेकिन पहले दिन उनके लिए फैसले पर चर्चा शुरू हो गई है. सम्राट चौधरी ने सीएम बनने के बाद किस फाइल पर अपना पहला साइन किया? पढ़ें पूरी खबर
सम्राट चौधरी ने किस फाइल पर पहला साइन किया?
पटना. बिहार की राजनीति के लिए 15 अप्रैल 2026 की तारीख स्वर्ण अक्षरों में दर्ज हो गई है. बिहार में पहली बार भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाली सरकार बनी है. सम्राट चौधरी का मुख्यमंत्री के रूप में कार्यभार संभालना केवल एक राजनीतिक घटना नहीं, बल्कि राज्य की बदलती हुई राजनीति की एक बड़ी तस्वीर है. शपथ ग्रहण समारोह के बाद, जब वे मुख्य सचिवालय पहुंचे, तो वहां का माहौल बिल्कुल बदला हुआ था. कैबिनेट सचिवालय विभाग ने भी आधिकारिक तौर पर उनके पदभार ग्रहण करने और अधिकारियों के साथ हुई पहली बैठक का फोटो जारी किया.
सम्राट चौधरी ने किस फाइल पर पहला साइन किया?
नए सीएम चौधरी ने राज्य की वर्तमान स्थिति, लंबित परियोजनाओं और आने वाली चुनौतियों का आकलन करना था. सूत्रों के अनुसार, सीएम ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि सुशासन और पारदर्शिता उनकी प्राथमिकता रहेगी. उन्होंने यह सुनिश्चित करने पर जोर दिया है कि सरकारी योजनाओं का लाभ अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति तक बिना किसी देरी के पहुंचे.
पहली फाइल और भविष्य की राह
हर मुख्यमंत्री के कार्यभार संभालने के बाद यह चर्चा का विषय होता है कि उसने अपनी ‘पहली फाइल’ पर हस्ताक्षर किस मुद्दे के लिए किए. सम्राट चौधरी ने भी मुख्यमंत्री के रूप में अपनी कलम चलाते हुए एक अत्यंत महत्वपूर्ण फाइल को मंजूरी दी है. हालांकि, अभी सरकार की ओर से आधिकारिक रूप से यह नहीं बताया गया है कि वह किस विभाग की फाइल थी, लेकिन जानकारों का मानना है कि यह बिहार के युवाओं के रोजगार, शिक्षा या राज्य की कानून-व्यवस्था से जुड़ी हो सकती है.
प्रशासनिक गलियारों में खौफ या शांति?
सम्राट चौधरी, जो अपनी आक्रामक कार्यशैली के लिए जाने जाते हैं, पहले दिन से ही एक्शन मोड में दिखाई दे रहे हैं. उनके इस निर्णय ने राज्य के प्रशासनिक गलियारों में एक नई सक्रियता ला दी है. विपक्ष भी उनकी हर चाल पर बारीक नजर रखे हुए है, लेकिन फिलहाल पूरा राज्य इस बात पर केंद्रित है कि ‘सम्राट’ का यह नया कार्यकाल बिहार को किस दिशा में ले जाएगा.
नीतीश कुमार का दो दशकों से अधिक का लंबा कार्यकाल समाप्त होने के बाद, सम्राट चौधरी के सामने बिहार को ‘विकसित’ बनाने की बड़ी जिम्मेदारी है. सम्राट चौधरी का व्यक्तित्व एक ऐसे नेता का है जो जमीन से जुड़े हैं और पिछड़ी जातियों के बीच गहरी पैठ रखते हैं. उनके सामने जातिगत समीकरणों को संतुलित रखने के साथ-साथ विकास की गति को तेज करने की दोहरी चुनौती है. राज्य की जनता को अब यह उम्मीद है कि बीजेपी के नेतृत्व में राज्य की बुनियादी समस्याओं जैसे बाढ़ का प्रबंधन, औद्योगिक विकास और शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार होगा.
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भारतीय विद्या भवन से पत्रकारिता की पढ़ाई करने वाले रविशंकर सिंह सहारा समय न्यूज चैनल, तहलका, पी-7 और लाइव इंडिया न्यूज चैनल के अलावा फर्स्टपोस्ट हिंदी डिजिटल साइट में भी काम कर चुके हैं. राजनीतिक खबरों के अलावा…और पढ़ें

