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उत्तर प्रदेश के बलिया की गलियों में एक ऐसी पारंपरिक मिठाई मिलती है, जो स्वाद और इतिहास दोनों का बेहतरीन मेल है. ‘गाजा’ नाम की यह मिठाई अपनी कुरकुरी परतों, लंबे समय तक खराब न होने की खासियत और शादियों में खास महत्व के कारण बेहद लोकप्रिय है. एक बार चखने के बाद इसका स्वाद लोगों के दिल में बस जाता है.
Ballia Famous Gaja Sweet: बलिया की गलियों में स्वाद का एक ऐसा खजाना छिपा है, जिसकी चर्चा दूर-दूर तक होती है. यहां की एक पारंपरिक मिठाई ऐसी है, जिसका नाम सुनकर पहली बार में लोग मुस्कुरा देते हैं या थोड़ा हैरान हो जाते हैं, लेकिन एक बार चखने के बाद वे इसके मुरीद हो जाते हैं. हम बात कर रहे हैं बलिया की मशहूर गाजा मिठाई की.

यह सिर्फ एक पकवान नहीं, बल्कि यहां की विरासत है, जो हर निवाले में इतिहास और मेहनत का रस घोलती है. केवल 140 रुपये किलो की किफायती कीमत में मिलने वाली यह मिठाई स्वाद और परंपरा का एक ऐसा संगम है, जो बलिया को विशेष पहचान देती है.

55 वर्षीय सुनील सिंह मुनीब बताते हैं कि वह बचपन से इस मिठाई को खाते आ रहे हैं. यह पूरी तरह से देसी मिठाई है और बलिया जनपद की असली पहचान है. खाने में यह जितनी लाजवाब है, इसकी उम्र भी उतनी ही लंबी है. यह मिठाई महीने-दो महीने तक भी खराब नहीं होती है. हालांकि इसके गाजा नाम से कई बार लोग चौंक जाते हैं, लेकिन सच तो यह है कि इसके बिना यहां की शादियां और बेटियों की विदाई अधूरी मानी जाती है. बारात के स्वागत से लेकर विदाई के नाश्ते तक, गाजा हर थाली की शोभा बढ़ाता है.
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दुकानदार मुन्ना के अनुसार गाजा को तैयार करने की प्रक्रिया बहुत मेहनत वाली है. इसे बनाने के लिए सबसे पहले मैदा, घी और बेकिंग पाउडर का एक खास मिश्रण तैयार किया जाता है. इस मिश्रण की पहचान यह है कि मुट्ठी बांधने पर यह टिक जाना चाहिए. इसके बाद इसे गर्म पानी से गूंथा जाता है. इसकी सबसे बड़ी खूबी इसकी परतें हैं. मैदे को बार-बार बेलकर कई तहों में तैयार किया जाता है, जिससे इसका टेक्सचर एकदम अलग और कुरकुरा बनता है.

तैयार किए गए मैदे के टुकड़ों को धीमी आंच पर लंबे समय तक तला जाता है. जब ये सुनहरे और कुरकुरे हो जाते हैं, तब इन्हें चीनी की चाशनी में डुबोया जाता है. यही वह पल होता है जब साधारण सा मैदा एक लाजवाब मिठाई का रूप ले लेता है. कढ़ाई से निकलते गरमा-गरम गाजा की खुशबू ही लोगों को अपनी ओर खींच लाती है. शादियों का सीजन शुरू होते ही हलवाई इसकी तैयारी में जुट जाते हैं क्योंकि इसकी डिमांड काफी बढ़ जाती है.

गाजा की सबसे बड़ी विशेषता इसकी शेल्फ-लाइफ है. जहां दूसरी मिठाइयां दो-चार दिनों में खराब होने लगती हैं, वहीं गाजा समय के साथ सूखकर बिखर भले ही जाए, पर खराब नहीं होता. यही कारण है कि इसे सफर में ले जाने या दूर रहने वाले रिश्तेदारों को भेजने के लिए सबसे अच्छा माना जाता है. बलिया की यह मिठाई अपने शानदार स्वाद से आज भी हर किसी को अपना दीवाना बना रही है.

