Monday, April 27, 2026
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कागजों में बनी सड़क, हकीकत में गायब: झुंझुनूं में 2 करोड़ की सड़क का रास्ता बदला, ग्रामीणों ने खोला मोर्चा – Jhunjhunu News




सरकारी फाइलों में हेराफेरी कर जनता के पैसे का दुरुपयोग करने का एक अनोखा मामला सामने आया है। झुंझुनूं के गांव श्‍योलपुरा के लिए मंजूर हुई 2 करोड़ रुपये की सड़क को अधिकारियों और रसूखदारों ने मिलकर कागजों में तो बना दिया, लेकिन धरातल पर उसका रास्ता ही बदल दिया। जिस सड़क को ग्रामीणों की सुविधा के लिए श्‍योलपुरा में बनना था, उसे कुछ खास लोगों को फायदा पहुँचाने के लिए तातीजा क्षेत्र में बना दिया गया। इस धांधली के खिलाफ अब ग्रामीणों ने जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है। क्या है पूरा घोटाला सार्वजनिक निर्माण विभाग (PWD) ने साल 2023-24 में श्‍योलपुरा (देवता) से तातीजा सीमा तक 5 किलोमीटर लंबी सड़क बनाने की मंजूरी दी थी। इसके लिए बजट पास हुआ और टेंडर भी जारी हुआ। ग्रामीण खुश थे कि अब उनके गांव की राह आसान होगी, लेकिन जब काम पूरा हुआ तो पता चला कि सड़क श्‍योलपुरा में बनी ही नहीं। इसे नियमों के खिलाफ तातीजा ग्राम की तरफ मोड़ दिया गया। बोर्ड पर नाम श्योपुरा का, सड़क तातीजा में इस पूरे खेल का खुलासा तब हुआ जब ग्रामीणों ने तातीजा की तरफ बनी सड़क पर लगे माइलस्टोन (पीले पत्थर) देखे। उन पत्थरों पर ‘श्योलपुरा’ लिखा हुआ था। यानी कागजों में यह दिखाया गया कि सड़क श्योपुरा में बनी है, ताकि बजट निकाला जा सके, जबकि असलियत में वह सड़क कहीं और बना दी गई। ग्रामीणों ने सुनाई अपनी पीड़ा ग्रामीणों ने इस भ्रष्टाचार पर गहरा रोष जताया है। मांगूराम तंवर (सेवानिवृत्त व्याख्याता) ने बताया कि श्योलपुरा से तातीजा सीमा तक 5 किलोमीटर सड़क मंजूर हुई थी। लेकिन अधिकारियों ने राजनीतिक दबाव और भ्रष्टाचार के चलते इसे तातीजा से देवाला जोहड़ की तरफ बना दिया। यह सीधे तौर पर जनता के साथ धोखा है। हुकमीचंद (पूर्व सरपंच, तातीजा) ने कहा कि जब मैंने सड़क पर लगे पत्थरों पर श्योपुरा लिखा देखा, तब इस धांधली का पता चला। बजट श्योपुरा के नाम पर आया और सड़क दूसरी जगह बना दी गई। कामरेड रामचंद्र कुलहरि (किसान महासभा) ने बताया कि अधिकारियों ने प्रलोभन या दबाव में आकर यह खेल किया है। हम मांग करते हैं कि इसकी जांच हो और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाए। प्रशासन से मुख्य मांगें अखिल भारतीय किसान महासभा के नेतृत्व में ग्रामीणों ने जिला कलेक्टर से मिलकर अपनी मांगें रखी हैं। जिस तकनीकी अधिकारी और ठेकेदार ने सड़क का रूट बदला, उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाए। जिस रास्ते (श्योलपुरा से गोरधनपुरा) के लिए सड़क मंजूर हुई थी, वहां तुरंत नई सड़क बनाई जाए। सरकारी धन के दुरुपयोग की भरपाई दोषी अधिकारियों से की जाए। इस दौरान प्रतिनिधिमंडल में शीशराम कसाणा, मंगलाराम, सत्यवीर और अन्य ग्रामीण मौजूद रहे।



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