Friday, May 1, 2026
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यूनिफार्म पॉलिसी लागू हो-यूनियन: किशनगंज मे लंबित मांगें पूरी करने को लेकर प्रोटेस्ट, कहा- पीडब्ल्यूआई इंचार्ज की मनमानी बंद हो – Kishanganj (Bihar) News




एनएफ रेलवे मजदूर यूनियन की किशनगंज शाखा ने गुरुवार को एक दिवसीय धरना प्रदर्शन किया। दिन भर सैकड़ों ट्रैकमैनों ने शाखा सचिव प्रदीप कुमार दास और अध्यक्ष बिमल कुमार के नेतृत्व में अपनी विभिन्न लंबित मांगों की पूर्ति और रेलवे बोर्ड के नियमों को लागू करने की मांग की। प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांगों में रेलवे बोर्ड द्वारा जारी सर्कुलर के आधार पर बने नियमों को लागू करना, ट्रैकमैन के साथ पक्षपातपूर्ण व्यवहार समाप्त करना, और एक समान नीति (यूनिफार्म पॉलिसी) लागू करना शामिल है। उन्होंने रेलवे बोर्ड और वरिष्ठ मंडल अभियंता/समन्वय (कटिहार) के 28 जुलाई 2025 के लिखित आदेश को भी लागू करने की मांग की। ट्रैकमैन ग्रेड-1 और ग्रेड-2 के कर्मचारियों को कार्यालय, बंगले, पेंटर, ट्रालिमैन और गेट ड्यूटी से हटाकर उनकी मूल गैंग में वापस भेजने की मांग की गई। इसके अतिरिक्त, जूनियर स्टाफ से कीमैन की ड्यूटी बंद करवाने और रेल पटरियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया गया। अध्यक्ष बिमल कुमार ने बताया कि पीडब्ल्यूआई इंचार्ज मनमाने ढंग से ट्रैक की सुरक्षा से खिलवाड़ कर रहे हैं। वे कुशल और अनुभवी ट्रैकमैनों को विशेष रियायतें देकर पिछले दरवाजे से कार्यालय, पेंटिंग और गेट ड्यूटी पर लगा रहे हैं, जबकि जूनियर स्टाफ पर अनावश्यक दबाव डालकर उनसे कीमैन और पेट्रोलिंग का काम करवाया जा रहा है। इससे न केवल ट्रैक बल्कि कर्मचारियों की सुरक्षा से भी समझौता हो रहा है। चहेते स्टाफ को रियायतें देना बंद करें शाखा सचिव प्रदीप कुमार दास ने कहा कि ट्रैकमैनों पर हो रहे अत्याचार और उनके साथ किए जा रहे सौतेले व्यवहार को बंद करने, सभी ट्रैकमैन की छुट्टी ऑनलाइन अपडेट करने, और रेलवे बोर्ड के दिशानिर्देशों का पालन करने के संबंध में कई बार पीडब्ल्यूआई इंचार्ज से संपर्क किया गया। उन्होंने बताया कि चहेते स्टाफ को विशेष रियायतें देना बंद करने का अनुरोध भी किया गया,लेकिन हर बार उन्हें ठगा गया। दास ने आगे कहा कि कटिहार मंडल के वरिष्ठ अधिकारियों की भी इस मामले में स्पष्ट राय थी, लेकिन सहायक मंडल अभियंता किशनगंज और पीडब्ल्यूआई इंचार्ज की मिलीभगत से उनके अनुरोधों को टालमटोल कर ठुकरा दिया गया। इसी कारण वे एक दिवसीय धरना प्रदर्शन करने के लिए बाध्य हुए।



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