Tuesday, May 5, 2026
Homeफूडकच्चे आम पकाने का ये 5 देसी जुगाड़ ट्राई किया? बिना कार्बाइड...

कच्चे आम पकाने का ये 5 देसी जुगाड़ ट्राई किया? बिना कार्बाइड के घर पर पकेंगे मीठे Mango


आम का सीजन आ चुका है. कुछ किस्म के आम तो मिलने भी शुरू हो गए हैं. मार्केट में आप जब आम खरीदने जाते हैं तो कुछ आम कच्चे निकल आते हैं. हालांकि, कई लोग आम थोड़े कच्चे भी खरीदते हैं, ताकि उसे स्टोर करके कई दिनों तक खाते रहें. लेकिन, इन कच्चे आमों को देसी तरीके से पकाया कैसे जाए, इसके बारे में नहीं जानते हैं. आजकल तो मार्केट में बिक्री अधिक करने के लिए केमिकल युक्त इंजेक्शन लगाकर, कार्बाइड आदि से पकाते हैं. लेकिन, क्या आप जानते हैं कि पुराने जमाने के लोग कच्चे आमों को कैसे पकाया करते थे? तब केमिकल, इंजेक्शन, कार्बाइड का इस्तेमाल भी नहीं होता था. उस समय लोग पूरी तरह से प्राकृतिक और देसी जुगाड़ से कच्चे आमों को पकाकर खाया करते थे. इससे आम न केवल सुरक्षित तरीके से पकते थे, बल्कि उनका स्वाद और मिठास भी लाजवाब होती थी.

पुराने समय में आम पकाने के देसी जुगाड़

1.पुआल या सूखी घास- कच्चे या अधपके आम को पकाने के लिए पहले लोग पुआल या सूखी घास में आम को लपेट कर रखा करते थे. यह आम पकाने का एक पारंपरिक तरीका है.

रखने का जुगाड़: इसके लिए एक लकड़ी का बॉक्स लें. नहीं है तो फिर अंधेरे कमरे में किसी कोने में आप पुआल यानी धान की सूखी घास की एक मोटी सी परत बिछा दें. अब इसके ऊपर सभी कच्चे आमों को रख दें. फिर ऊपर से पुआल से अच्छी तरह से ढंक दें.

सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी.

इसके पीछे का विज्ञान: पुआल के अंदर गर्मी पैदा होती है. आम से एक प्राकृतिक एथिलीन गैस निकलती है, जो पुआल के अंदर रहने से नहीं निकल पाती है. इससे आम 3-4 दिनों में पक जाता है.

2. अनाज की कोठी- आज भी गांवों के घरों में अनाज रखने के लिए मिट्टी की कोठी बनी होती है. ये कोठी मिट्टी, गोबर, लकड़ी से बनी एक बड़ा सा कंटेनर की तरह होता है. इसमें लोग अनाजों को सुरक्षित रखते थे और आज भी रखते हैं. इसमें भी आप आम को डालकर रख सकते हैं.

रखने का जुगाड़: कच्चे आमों को कॉटन के कपड़े में पहले लपेट दें. अब इसे चावल, गेहूं की कोठी में अंदर दबाकर रख दें.

इसके पीछे का विज्ञान: अनाज के अंदर का तापमान स्थिर रहता है और नमी कम होती है. इससे आम बिना सड़े बहुत अच्छी तरह से दो से तीन दिनों में पक जाता है. स्वाद भी मीठा लगता है.

3. जूट की बोरियां: कच्चे आमों को आप जल्दी पकाना चाहते हैं तो जूट की बोरियों में रख सकते हैं. पुराने जमाने में इसका खूब इस्तेमाल किया जाता था.

रखने का जुगाड़: आमों को जूट (टाट) की बोरियों में भरें. उन्हें किसी गर्म और बंद जगह पर रख दें.

इसके पीछे का विज्ञान: जब आप जूट की बोरी में आम रखते हैं तो हल्की उमस बनी रहती है. जूट के रेशे गर्मी को रोककर रखते हैं, जिससे आम गर्म वातावरण में पकता रहता है.

4. अखबार या कागज में लपेटना: आम को अखबार या कागज में लपेटकर रखने का तरीका गांवों में ही नहीं, बल्कि शहरों में लोग आजमाते हैं. हो सकता है आपने भी इस तरह से आम को रखा हो.

रखने का जुगाड़: हर आम को अलग-अलग पुराने अखबार में लपेटा जाता था. इसे फिर बेड के नीचे बोरियों के ऊपर रखकर कवर कर दिया जाता था.

इसके पीछे का विज्ञान: अखबार की स्याही और कागज की गर्मी आम को पकने में मदद करती है.

5. मिट्टी में गड्ढा खोदकर पकाना: यह बहुत पुराना तरीका है, जब बड़ी मात्रा में आम पकाने होते थे तो लोग जमीन में छोटा सा गड्ढा खोदकर आम को रखते थे.

रखने का जुगाड़: जमीन में एक छोटा गड्ढा किया जाता था, जिसमें नीचे सूखी पत्तियां और घास बिछाई जाती थी.

इसके पीछे का विज्ञान: जब सभी कच्चे आमों को मिट्टी पर बिछी सूखी पत्तियों या घास पर रख दिया जाता था. फिर ऊपर से मिट्टी या पत्तों से ढक दिया जाता था. जमीन की नेचुरल गर्मी (Geothermal heat) से आम पक जाया करते थे.

आम पकाने के पुराने तरीकों के फायदे
-प्राकृतिक रूप से पके आमों में चीनी की मात्रा सही तरीके से बढ़ती है.

-कार्बाइड वाले आमों में खुशबू नहीं होती. जब आप इन देसी तरीकों से आम को घर पर पकाते हैं तो पूरा घर आम की खुशबू से भर जाता है.

– केमिकल, कार्बाइड, पॉइजन आदि तरीकों से आमों को पकाने से सेहत को कई नुकसान हो सकते हैं. देसी तरीकों से कच्चे आमों को पकाने से किसी भी प्रकार का जहर या केमिकल शरीर में नहीं जाता. आप आम खाकर बीमार नहीं पड़ते.

-जब भी आप आम खाएं तो उसके मुंह पर चिपचिपा सा पदार्थ निकलता है, इसे अच्छी तरह से साफ कर लें. आम खाने से पहले इसे पानी में डुबाकर एक घंटे के लिए जरूर रखें. ऐसा करने से आम की गर्म तासीर थोड़ी नॉर्मल हो जाएगी.



Source link

RELATED ARTICLES
- Advertisment -

Most Popular

Recent Comments