Saturday, May 9, 2026
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हाईवे के साइन बोर्ड हरे रंग के क्यों? 5 कारण जिनको जानकर हैरान रह जाएंगे आप


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जब भी हम किसी नेशनल हाईवे या एक्सप्रेसवे पर सफर करते हैं तो रास्ते में लगे हरे रंग के साइनबोर्ड आसानी से नजर आते हैं. इन बोर्डों पर शहरों के नाम, दूरी और रास्तों की जानकारी लिखी होती है. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि आखिर इन साइनबोर्ड का रंग हरा ही क्यों रखा जाता है? इसके पीछे ट्रैफिक साइंस, सुरक्षा और मानव मनोविज्ञान से जुड़े कई अहम कारण छिपे हुए हैं.

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हाईवे और एक्सप्रेसवे पर साइन बोर्ड हमेशा हरे रंग के होते हैं.(Representative Image:AI)

नई दिल्ली. भारत में नेशनल हाईवे, स्टेट हाईवे और बड़े मार्गों पर लगाए जाने वाले दिशा सूचक बोर्ड हरे रंग के बनाए जाते हैं. इन बोर्डों पर सफेद अक्षरों में शहरों के नाम, एग्जिट, दूरी और रूट नंबर लिखे जाते हैं. सड़क परिवहन से जुड़े नियम तय करने वाली संस्थाएं इस रंग संयोजन को इसलिए अपनाती हैं ताकि तेज रफ्तार में चल रहे वाहन चालक तुरंत समझ सकें कि यह जानकारी मार्गदर्शन से जुड़ी है. इससे ड्राइवर को रास्ता बदलने या सही लेन पकड़ने में आसानी होती है और दुर्घटनाओं की संभावना कम हो जाती है.

दूर से साफ दिखाई देता है हरा रंग
हाईवे पर वाहन अक्सर तेज गति से चलते हैं. ऐसे में साइनबोर्ड का दूर से साफ दिखाई देना बेहद जरूरी होता है. हरे बैकग्राउंड पर सफेद अक्षर काफी ज्यादा कॉन्ट्रास्ट बनाते हैं, जिससे ड्राइवर दिन और रात दोनों समय जानकारी आसानी से पढ़ पाते हैं. यही कारण है कि ट्रैफिक विशेषज्ञ इस रंग संयोजन को सबसे सुरक्षित मानते हैं. अगर बोर्ड का रंग बहुत चमकीला या भड़कीला हो तो ड्राइवर का ध्यान भटक सकता है, जबकि हरा रंग आंखों को आराम देता है और जानकारी जल्दी समझ में आती है.

रंग देखकर ही समझ जाते हैं ड्राइवर
भारतीय सड़कों पर अलग-अलग रंगों के साइनबोर्ड अलग संकेत देते हैं. हरे बोर्ड मुख्य रूप से हाईवे और लंबी दूरी वाले मार्गों के लिए उपयोग किए जाते हैं, जबकि शहरों और शहरी इलाकों में अक्सर नीले बोर्ड दिखाई देते हैं. इसी तरह लाल और पीले रंग चेतावनी या खतरे का संकेत देते हैं. इस रंग व्यवस्था का सबसे बड़ा फायदा यह है कि ड्राइवर बिना ज्यादा पढ़े ही समझ जाता है कि वह किस तरह की सड़क पर चल रहा है. इससे यात्रा ज्यादा सुरक्षित और व्यवस्थित बनती है.

लंबी यात्रा में तनाव कम करता है हरा रंग
ट्रैफिक डिजाइन से जुड़े कई अध्ययनों में यह बात सामने आई है कि हरा रंग मानसिक रूप से शांत प्रभाव पैदा करता है. यही वजह है कि हाईवे पर लंबे सफर के दौरान यह रंग ड्राइवर को तनाव और थकान से बचाने में मदद करता है. लाल और पीला रंग चेतावनी देने के लिए इस्तेमाल किए जाते हैं क्योंकि वे तुरंत ध्यान खींचते हैं, लेकिन लगातार ऐसे रंग देखने से मानसिक दबाव बढ़ सकता है. इसके उलट हरा रंग आंखों को सहज महसूस कराता है और ड्राइवर का फोकस बनाए रखने में मदद करता है.

दुनिया के कई देशों में भी यही नियम
भारत में हाईवे साइनबोर्ड के लिए हरे रंग का इस्तेमाल कोई अलग प्रयोग नहीं है. अमेरिका, कनाडा, जापान और ऑस्ट्रेलिया जैसे कई देशों में भी हाईवे गाइड साइन के लिए हरे बोर्ड और सफेद अक्षरों का उपयोग किया जाता है. यूरोप के कई देशों में भी मोटरवे और लंबी दूरी वाले मार्गों पर इसी तरह की रंग व्यवस्था देखने को मिलती है. अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक जैसी प्रणाली अपनाने का फायदा यह होता है कि अलग-अलग देशों से आने वाले लोग भी सड़क संकेतों को आसानी से समझ पाते हैं. इससे भ्रम कम होता है और सड़क सुरक्षा बेहतर बनती है.

सड़क सुरक्षा से जुड़ी है रंगों की पूरी साइंस
विशेषज्ञों के मुताबिक सड़क संकेतों का रंग सिर्फ सजावट के लिए नहीं चुना जाता, बल्कि इसके पीछे पूरी वैज्ञानिक सोच होती है. हाईवे पर हरे बोर्ड का इस्तेमाल ड्राइवर को स्पष्ट जानकारी देने, ध्यान केंद्रित रखने और तेज रफ्तार में भी सही निर्णय लेने में मदद करता है. यही कारण है कि सालों की रिसर्च और अंतरराष्ट्रीय मानकों के बाद इस रंग को हाईवे संकेतों के लिए सबसे उपयुक्त माना गया. अब अगली बार जब आप किसी एक्सप्रेसवे या हाईवे पर सफर करें और हरे साइनबोर्ड देखें, तो समझ जाइए कि यह रंग आपकी यात्रा को आसान और सुरक्षित बनाने के लिए चुना गया है.

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Rakesh Singh

Rakesh Singh is a chief sub editor with 14 years of experience in media and publication. International affairs, Politics and agriculture are area of Interest. Many articles written by Rakesh Singh published in …और पढ़ें



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