Wednesday, May 13, 2026
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सोने की तस्‍करी बढ़ने का खतरा! क्‍यों भारतीय कारोबारियों को सता रही चिंता


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Gold Smuggling : ज्‍वैलरी और रत्‍न क्षेत्र से जुड़े कारोबारियों ने चिंता जताई है कि सोने पर आयात शुल्‍क बढ़ाए जाने से इम्‍पोर्ट तो कम नहीं होगा, लेकिन तस्‍करी का जोखिम जरूर बढ़ जाएगा. उद्योग संगठनों ने कहा है कि आयात कम करने के दूसरे उपायों पर जोर दिया जाना चाहिए, बजाय कि शुल्‍क बढ़ाना.

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सोने पर आयात शुल्‍क बढ़ने से तस्‍करी का जोखिम भी बढ़ गया है.

नई दिल्‍ली. सरकार ने सोने पर आयात शुल्‍क बढ़ाकर 15 फीसदी कर दिया है. इसका मकसद भले ही आयात बिल में कमी लाना है, लेकिन उद्योग जगत का कहना है कि इससे फायदे से ज्‍यादा नुकसान होगा. ज्‍वैलरी उद्योग से जुड़े निर्यातकों ने आशंका जताई है कि सोने पर आयात शुल्‍क बढ़ने से तस्‍करी का जोखिम भी पैदा हो गया है. इससे रत्न एवं आभूषण उद्योग को आने वाले समय में चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है और अवैध बाजार व तस्करी को बढ़ावा मिलने की भी आशंका है.

निर्यातकों के अनुसार, आयात शुल्क में वृद्धि से आमतौर पर कीमतें बढ़ जाती हैं. हाल के समय में सोने की कीमतें दोगुनी होने के बावजूद आयात में उसके अनुरूप कमी नहीं आई है. उनका मानना है कि ऐसे उपाय अकसर तस्करी को बढ़ावा देते हैं और निर्यात लागत को बढ़ाते हैं. इसका सबसे गंभीर असर सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्यम (एमएसएमई) विनिर्माताओं पर पड़ेगा जो गंभीर नकदी संकट का सामना कर रहे हैं.

कठिन होने वाला है कारोबार
अखिल भारतीय रत्न एवं आभूषण परिषद (जीजेसी) के चेयरमैन राजेश रोकड़े ने बताया कि प्रधानमंत्री के मितव्ययिता उपायों और सर्राफा आयात शुल्क बढ़ने से कारोबार अब कठिन होने वाला है. उद्योग को आशंका है कि इससे अवैध बाजार और तस्करी को बढ़ावा मिलेगा.शुल्क बढ़ोतरी को समझाते हुए रोकड़े ने कहा कि अब सीमा शुल्क, माल एवं सेवा कर (जीएसटी) और कृषि उपकर को मिलाकर आयात शुल्क के कारण सोना पहले के 13,500 रुपये प्रति 10 ग्राम से बढ़कर लगभग 27,000 रुपये प्रति 10 ग्राम महंगा हो सकता है. जीजेसी ने हाल के नीतिगत निर्णयों पर विचार करने और आगे की रणनीति तय करने के लिए बुधवार को मुंबई में उद्योग की सभी संस्थाओं की बैठक बुलाई है.

कारोबारियों पर संकट का समय
जीजेसी के वाइस चेयरमैन अविनाश गुप्ता ने कहा कि सोना और आभूषण भारत की अर्थव्यवस्था, परंपराओं और बचत संस्कृति से गहराई से जुड़े हुए हैं. इस समय व्यापार जगत के लिए यह महत्वपूर्ण है कि वे घबराहट से बचें और आत्मविश्वास एवं जिम्मेदारी के साथ अपना कारोबार जारी रखें. हम राष्ट्र की व्यापक आर्थिक प्राथमिकताओं का पूर्ण समर्थन करते हैं. कारीगरों, व्यापारियों तथा उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा करते हुए इस क्षेत्र के दीर्घकालिक विकास एवं स्थिरता को सुनिश्चित करने के लिए हम नीति निर्माताओं के साथ रचनात्मक बातचीत के लिए प्रतिबद्ध हैं.

राष्‍ट्र पहले की भावना से भरा है यह फैसला
रत्न एवं आभूषण निर्यात संवर्धन परिषद (जीजेईपीसी) ने सरकार द्वारा सोने पर आयात शुल्क बढ़ाने के फैसले को स्वीकार करते हुए कहा कि एक उद्योग के रूप में जीजेईपीसी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की राष्ट्र पहले की भावना को लेकर प्रतिबद्ध है. परिषद ने हालांकि स्थायी समाधान के लिए सरकार से उद्योग के हितधारकों के साथ बातचीत करने की अपील की है. जीजेईपीसी के चेयरमैन किरीट भंसाली ने कहा कि हमने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर सोने के आयात को कम करने और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने के लिए अपने सदस्यों द्वारा उठाए गए सक्रिय कदमों की रूपरेखा प्रस्तुत की है. इनमें कम कैरेट के आभूषणों को बढ़ावा देना और उपभोक्ताओं को पुराने आभूषणों के बदले नए आभूषण लेने के लिए प्रोत्साहित करना शामिल है.

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Pramod Kumar Tiwari

प्रमोद कुमार तिवारी को शेयर बाजार, इन्‍वेस्‍टमेंट टिप्‍स, टैक्‍स और पर्सनल फाइनेंस कवर करना पसंद है. जटिल विषयों को बड़ी सहजता से समझाते हैं. अखबारों में पर्सनल फाइनेंस पर दर्जनों कॉलम भी लिख चुके हैं. पत्रकारि…और पढ़ें



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