नई दिल्ली: केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड यानी कि CBSE के द्वारा 13 मई 2026 को कक्षा 12वीं के परिणाम घोषित किए जाने के बाद छात्रों में नाराजगी देखने को मिल रही है। खासकर विज्ञान विषयों जैसे कि भौतिकी, रसायन विज्ञान, जीव विज्ञान और गणित में कम नंबर मिलने को लेकर कई छात्रों और शिक्षकों ने सवाल उठाए हैं। इस साल 12वीं का कुल पास प्रतिशत घटकर 85.20 प्रतिशत रह गया है, जो पिछले 7 वर्षों में सबसे कम है। यह पिछले वर्ष की तुलना में 3.19 प्रतिशत की गिरावट है, और 2019 के बाद सबसे कम पास प्रतिशत माना जा रहा है।
छात्रों और शिक्षकों की नाराजगी का कारण क्या है?
छात्रों और शिक्षकों का कहना है कि इस बार CBSE की नई डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली OSM (ऑन-स्क्रीन मार्किंग) के कारण छात्रों के अंक कम आए हैं। उनका मानना है कि इस प्रणाली में मूल्यांकन का तरीका पहले की तुलना में ज्यादा सख्त या अलग हो सकता है, जिससे परिणाम प्रभावित हुए हैं।
छात्रों की नाराजगी पर सीबीएसई का जवाब क्या है?
CBSE ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि OSM मूल्यांकन प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी और सटीक है। बोर्ड का कहना है कि इस प्रणाली से मानवीय त्रुटियों में कमी आती है और मूल्यांकन अधिक व्यवस्थित होता है। CBSE ने छात्रों को यह भी सलाह दी है कि अगर वे अपने अंकों से संतुष्ट नहीं हैं, तो वे री-वैल्यूएशन के लिए आवेदन कर सकते हैं। CBSE ने छात्रों को एक नई सुविधा भी दी है, जिसके तहत वे अपनी जांची गई उत्तर पुस्तिका (स्कैन कॉपी) देख सकते हैं। बोर्ड ने कहा है, ‘अगर छात्र अपने परिणाम से संतुष्ट नहीं हैं, तो वे अपनी जांची गई उत्तर पुस्तिका देखकर खुद भी मूल्यांकन को समझ सकते हैं।’
छात्रों के पास क्या विकल्प हैं?
CBSE के अनुसार छात्र निम्न विकल्पों के लिए आवेदन कर सकते हैं:
- इच्छित विषय की स्कैन की गई उत्तर पुस्तिका प्राप्त करना
- उसमें दिखी समस्याओं या त्रुटियों की जांच करवाना
- पुनर्मूल्यांकन (री-इवैल्यूएशन) के लिए आवेदन करना
स्कैन कॉपी के लिए आवेदन प्रक्रिया
CBSE ने प्रक्रिया भी स्पष्ट की है:
- छात्र स्वयं आवेदन करेंगे
- आवेदन के बाद लॉगिन में स्कैन कॉपी उपलब्ध कराई जाएगी
- यह कॉपी डाउनलोड की जा सकेगी
- पहले आने वाले आवेदनों को पहले सेवा दी जाएगी
- छात्र एक या कई विषयों के लिए एक साथ आवेदन कर सकते हैं
- किसी सब्जेक्ट में अंकों को चुनौती देनी है, तो अलग से री-वैल्यूएशन के लिए आवेदन करना होगा
इस मुद्दे पर क्या कहते हैं एक्सपर्ट्स?
पुणे के शिक्षा विशेषज्ञ और संस्कृत स्कूल समूह के ट्रस्टी प्रणीत मुंगाली ने कहा कि OSM प्रणाली ने मूल्यांकन प्रक्रिया को अधिक सख्त और व्यवस्थित बनाया है, जिससे मानवीय गलतियां कम हुई हैं। उन्होंने कहा, ‘OSM अपनाने से मूल्यांकन प्रक्रिया में अधिक कठोरता आई है। इससे मानवीय त्रुटियां कम हुई हैं और यही पास प्रतिशत में बदलाव का कारण हो सकता है। हालांकि, किसी ठोस निष्कर्ष पर पहुंचने के लिए हमें आने वाले कुछ वर्षों के रुझानों का अध्ययन करना होगा। यह कहना अभी जल्दबाजी होगी, लेकिन OSM सही दिशा में कदम है।’

