Saturday, June 6, 2026
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बच्चों को खिलाएं ये 5 मछलियां, नहीं होते कांटे, गले में फंसने का डर भी नहीं


बच्चे चिकन, मटन तो आसानी से खा लेते हैं, लेकिन जब बात आती है मछली की, तो काफी पेरेंट्स घबराते हैं. खासकर, छोटे बच्चों को खुद से मछली खाने नहीं देते हैं, क्योंकि गले में कांटा चुभने-फंसने का डर रहता है. ऐसे में ये समझ नहीं आता है कि बच्चों को कौन सी मछली खिलाएं, ताकि वे सेफ तरीके से इसे आसानी से खा भी सकें और फायदे भी भरपूर मिले. यहां आपको कुछ ऐसी मछलियों के नाम बता रहे हैं, जो बेहद फायदेमंद तो होती ही हैं, साथ ही इनमें एक भी कांटा नहीं होता है. ये मछलियां ऐसी हैं, जिन्हें बच्चे खुद से भी खा सकते हैं.

बच्चों के लिए 5 बिना कांटे वाली मछली
मछली है तो कांटा तो होगा ही. फिर चाहे वो कोई भी मछली हो. बड़ी-छोटी मछली में साइज के अनुसार कांटे भी होते हैं. बच्चों को मछली खिलाना एक टेंशन भरा काम होता है. ऐसे में आप वे मछलियां खरीद सकते हैं, जिनमें कांटा ना हो या बहुत ही कम हो. हालांकि, आप जो भी मछली खरीद कर लाएं, उसे धोते, पकाते और खिलाते समय एक बार ध्यान से देख लें कि उसमें कांटे कितने हैं, क्योंकि कई बार बोनलेस मछली में भी कभी-कभी छोटे कांटे रह सकते हैं.

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बच्चों के लिए बोनलेस या कम कांटे वाली मछलियां
1. सैल्मन (Salmon)- सैल्मन एक ऐसी मछली है, जो बेहद टेस्टी, पौष्टिक होती है. ये एक बोनलेस या बेहद ही कम और सॉफ्ट कांटे वाली मछली होती है. इसमें ओमेगा-3 फैटी एसिड भरपूर होती है. बच्चों को इसे खिलाएंगे तो उनका ब्रेन, आंख सभी हेल्दी रहेंगे और ग्रोथ भी सही से होगा. इसका मांस बहुत ही मुलायम होता है.

2. बासा (Basa)-इस मछली में भी कांटे बहुत ही कम मात्रा में मौजूद होते हैं, इसलिए बच्चे इसे आसानी से खा सकते हैं. स्वाद में हल्का और प्रोटीन का अच्छा स्रोत है ये मछली.

3.तिलापिया (Tilapia)-तिलापिया मछली बच्चे खा सकते हैं, क्योंकि इसमें प्रोटीन, विटामिन डी, ओमेगा-3 फैटी एसिड, विटामिन B12 काफी मात्रा में होती है. ये बच्चों के फिजिकल और मेंटल ग्रोथ के लिए बेहद पौष्टिक फिश है. साथ ही ये जल्दी पक भी जाती है. इस मछली में पारा यानी मर्करी का लेवल बहुत कम होता है. इसमें रोहू या कतला मछली की तुलना में कांटे बहुत कम होते हैं. इसमें मुख्य रूप से सिंगल कांटा होता है, जो रीढ़ की हड्डी, पसलियों के कांटे होते हैं, जो आसानी से पकाने के बाद आप निकाल सकते हैं. खास बात तिलापिया मछली की ये है कि इसमें बेहद बारीक और छोटे कांटे यानी पिन बोन्स नहीं होते हैं.

4. कॉड (Cod)- कॉड फिश का मांस बेहद सॉफ्ट और रंग सफेद होता है. इसमें वसा बेहद कम, हाई प्रोटीन होता है. कॉड फिश को बच्चे आसानी से पचा सकते हैं. इसके फिलेट्स में कांटा नहीं होता है. यह एक बोनलेस फिश है, ऐसे में बेफिक्र होकर बच्चों को ये मछली खाने के लिए दे सकते हैं. कॉड फिश, आंखों, दिमाग, हड्डियों, शारीरिक विकास, इम्यूनिटी मजबूत करने, आसानी से पच जाने में बेहद फायदेमंद हैं. इसमें सेलेनियम, विटामिन बी12 इम्यूनिटी बूस्ट करते हैं. विटामिन डी हड्डियों, दांतों को हेल्दी और मजबूत रखते हैं. इसे आप सूप में डालकर दे सकते हैं. स्टीम करके पका सकते हैं, बेक या फिश नगेट्स भी बनाकर दे सकते हैं.

5. सोल फिश (Sole)- इस मछली का मांस बेहद ही सॉफ्ट होता है. इसे बच्चे आराम से खा सकते हैं, क्योंकि इसमें कांटा न के बराबर होता है. सोल फिश का स्वाद हल्का होता है. यह बच्चों के लिए हेल्दी विकल्प है. सोल मछली में भी पारा यानी मर्करी बहुत ही कम होता है, इसलिए ये बच्चों के लिए बेहद हेल्दी फिश है.

बच्चों को मछली खिलाने के फायदे
दिमाग का विकास सही तरीके से होगा.
ओमेगा-3 फैटी एसिड मस्तिष्क विकास को सपोर्ट करता है.
हड्डियां, दांत और मांसपेशियां स्ट्रॉन्ग होती हैं.
मछली में हाई क्वालिटी प्रोटीन होता है, जो शरीर की वृद्धि में मदद करता है.
आंखों की सेहत को बूस्ट करता है. कम उम्र में पावर वाला चश्मा पहनने की जरूरत नहीं होगी.
इम्यूनिटी को मजबूत बनाती हैं मछलियां, क्योंकि इनमें विटामिन डी, सेलेनियम होते हैं.

बच्चों को मछली खिलाते समय किन बातों का रखें ध्यान
यदि आपका बच्चा 1 साल से छोटा है तो डॉक्टर से पूछ कर ही मछली खिलाएं.
अधपकी मछली न खिलाएं वरना खुजली, एलर्जी, रेडनेस, पेट दर्द आदि हो सकता है.
पहली बार खिला रहे हैं तो स्किन पर खुजली, एलर्जी होने के लक्षणों पर नजर रखें.
छोटे बच्चों को मछली खुद से खाने के लिए दें तो पकाने के बाद एक बार मांस को हाथों से चेक कर लें कि कोई कांटा तो नहीं छूट गया.



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