QRSAM Air Defence Missile: अब दुश्मन का कोई भी मिसाइल, ड्रोन या फाइटर जेट भारत की सीमा के आसमान में ज्यादा देर टिक नहीं पाएगा. भारतीय सेना को मिलने जा रहा है एक ऐसा ब्रह्मास्त्र जो हवा में उड़ती किसी भी साजिश को पलक झपकते ही राख कर देगा. इस घातक हथियार का नाम है QRSAM, यानी क्विक रिएक्शन सरफेस-टू-एयर मिसाइल सिस्टम.
QRSAM सिस्टम का मतलब है – जहां से खतरा दिखेगा, वहीं से आएगा जवाब. यानी भारत की सीमाओं पर अब इंतजार नहीं तुरंत कार्रवाई होगी. यह मिसाइल सिस्टम सेना को ऐसी शक्ति देगा जिससे दुश्मन का कोई भी हवाई हमला चाहे वो ड्रोन हो, लड़ाकू विमान हो या क्रूज मिसाइल कुछ ही सेकेंड्स में ध्वस्त किया जा सकेगा.
ऑपरेशन सिंदूर: आक्रामक भारत की तैयारी
‘ऑपरेशन सिंदूर’ का मकसद भारत की सीमाओं को रक्षा से आगे बढ़कर प्रतिरोधक और हमलावर क्षमता देना है. इसमें QRSAM जैसे हथियार उस रणनीति के अहम स्तंभ हैं जो यह संदेश देते हैं कि अब भारत चुप नहीं बैठेगा. जहां से खतरा दिखेगा वहीं पर जवाब दिया जाएगा… और वह भी आसमान से!
क्यों कहा जा रहा है इसे ‘ब्रह्मास्त्र’?
क्योंकि ये वही हथियार है जो दुश्मन की हर ‘पहली चाल’ को उसकी ‘आखिरी भूल’ बना सकता है. यह मिसाइल सिस्टम कुछ ही सेकेंड्स में 70 से 100 किलोमीटर की रेंज में किसी भी हवाई खतरे को पहचानकर उसे नष्ट कर देता है.
कब तक मिलेगा ये सिस्टम?
रक्षा मंत्रालय से मंजूरी मिलते ही QRSAM के पहले बैच का उत्पादन शुरू हो जाएगा. उम्मीद की जा रही है कि 2026 तक सेना की पहली तैनाती पूरी हो जाएगी.
पाकिस्तान के ड्रोन और मिसाइल हमले भी नाकाम
भारतीय कार्रवाई के जवाब में पाकिस्तान ने ड्रोन और मिसाइल से हमला करने की कोशिश की, लेकिन भारतीय सेना की एयर डिफेंस यूनिट्स ने L-70 और Zu-23 एंटी-एयरक्राफ्ट गन से खतरे को तुरंत नष्ट कर दिया.
स्वदेशी सिस्टम्स ने दिखाई ताकत
भारतीय वायुसेना और सेना ने इस हमले के दौरान स्वदेशी रक्षा प्रणालियों जैसे आकाश मिसाइल और MRSAM सिस्टम का बेहतरीन इस्तेमाल किया. इन प्रणालियों को एयरफोर्स के अत्याधुनिक स्पाइडर, सुदर्शन और रूसी S-400 एयर डिफेंस सिस्टम का भी समर्थन मिला.

