Monday, June 15, 2026
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फ्रांस के नीस में मोदी-मैक्रों ने द्विपक्षीय बैठक की: साथ में सेल्फी ली; भारत-फ्रांस के बीच FTA, डिफेंस और AI से जुड़े 13 बड़े समझौते हुए


नई दिल्ली/पेरिस/ब्रातिस्लावा57 मिनट पहले

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फ्रांस के नीस शहर में PM मोदी और फ्रांसीसी राष्ट्रपति मैक्रों की द्विपक्षीय बैठक हुई। दोनों विला केरीलोस घुमने गए।

फ्रांस के नीस शहर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के साथ रविवार को द्विपक्षीय बैठक की। इसमें प्रधानमंत्री के साथ राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल, विदेश मंत्री एस. जयशंकर, विदेश सचिव विक्रम मिस्री भी शामिल रहे।

इस दौरान दोनों देशों के बीच 13 बड़े समझौते हुए। विदेश मंत्रालय के मुताबिक, बैठक में रक्षा, व्यापार, टेक्नोलॉजी, स्पेस और शिक्षा पर बात हुई। दोनों देशों ने अगले 5 वर्षों में आपसी व्यापार को दोगुना करने के लिए एक हाई-लेवल सिस्टम और इकोनॉमिक सिक्योरिटी डायलॉग की शुरुआत की है।

इससे पहले दोनों नेताओं ने ‘भारत इनोवेट्स 2026’ प्रोग्राम का उद्घाटन किया, जिसमें भारत, फ्रांस और अन्य देशों के स्टार्टअप्स और वेंचर कैपिटल फंड्स ने हिस्सा लिया।

प्रोग्राम के बाद राष्ट्रपति मैक्रों प्रधानमंत्री मोदी को नीस के पास स्थित विला केरीलोस घुमाने ले गए। यह फ्रांस की प्रसिद्ध ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहरों में से एक है। मैक्रों ने यहां पीएम के साथ सेल्फी ली और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर शेयर किया।

पीएम मोदी 13 जून से फ्रांस-स्लोवाकिया के 6 दिन के दौरे पर हैं। वे 17 जून को फ्रांस के एवियान में G7 समिट में शामिल होंगे। इस दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प से मिलेंगे। दोनों नेताओं के बीच ट्रेड डील पर बातचीत होगी।

विला केरीलोस घूमने के दौरान मैक्रों पीएम मोदी का हाथ पकड़कर चलते दिखे।

विला केरीलोस घूमने के दौरान मैक्रों पीएम मोदी का हाथ पकड़कर चलते दिखे।

इनोवेशन प्रोग्राम में PM बोले- दोनों देशों का विजन एक, 5 बड़ी बातें

  • भारत-फ्रांस का रिश्ता खास: प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत और फ्रांस का रिश्ता सिर्फ व्यापार या रणनीतिक साझेदारी तक सीमित नहीं है। यह भरोसे, साझा सोच और साझा लक्ष्यों पर आधारित है। दोनों देश मिलकर दुनिया की कई बड़ी चुनौतियों का समाधान खोजने की दिशा में काम कर रहे हैं।
  • ‘भारत इनोवेट्स’ युवाओं के लिए बड़ा मंच: मोदी ने कहा कि ‘भारत इनोवेट्स’ भारतीय प्रतिभा और यूरोपीय निवेश को जोड़ने वाला मंच है। इससे भारतीय स्टार्टअप्स, युवा उद्यमियों और नए आइडिया को दुनिया के बड़े निवेशकों और विशेषज्ञों तक पहुंचने का मौका मिलेगा।
  • भारत स्टार्टअप्स का बड़ा केंद्र: प्रधानमंत्री ने कहा कि कार्यक्रम में 100 से ज्यादा स्टार्टअप्स शामिल हैं, लेकिन भारत में 2 लाख से ज्यादा स्टार्टअप्स काम कर रहे हैं। ये स्टार्टअप्स भारत के साथ-साथ दुनिया की अर्थव्यवस्था और तकनीकी विकास में भी योगदान दे रहे हैं।
  • नई तकनीकें बदलेंगी भविष्य: मोदी ने कहा कि दुनिया कई चुनौतियों से गुजर रही है, लेकिन हर चुनौती नए मौके भी लेकर आती है। AI, क्वांटम कंप्यूटिंग, बायोटेक्नोलॉजी और अंतरिक्ष तकनीक जैसी नई तकनीकें आने वाले समय में दुनिया का भविष्य तय करेंगी।
  • युवा दे रहे हैं समस्याओं का समाधान: प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत में स्टार्टअप क्रांति चल रही है। देश के युवा नई सोच के साथ लोगों की समस्याओं का हल निकाल रहे हैं।

मैक्रों बोले- दुनिया भारत के साथ इनोवेशन करना चाहती है, 5 बड़ी बातें

  • भारत ग्लोबल इनोवेशन का नेतृत्व कर रहा: मैक्रों ने कहा कि भारत रिसर्च, इनोवेशन और तकनीकी विकास के क्षेत्र में दुनिया का नेतृत्व कर रहा है। भारत हर साल यूरोप और अमेरिका को मिलाकर जितने इंजीनियर तैयार होते हैं, उतने इंजीनियर तैयार करता है।
  • दुनिया भारत के साथ इनोवेशन करना चाहती है: मैक्रों ने कहा कि अब सवाल यह नहीं है कि भारत इनोवेशन करता है या नहीं। सवाल यह है कि दुनिया में कौन भारत के साथ मिलकर इनोवेशन करेगा।
  • AI में खुले और सहयोगी मॉडल का समर्थन: उन्होंने कहा कि कुछ देश AI मॉडल्स को सीमित करना चाहते हैं। लेकिन भारत और फ्रांस खुले, बहुभाषी और सहयोगी AI मॉडल के पक्षधर हैं।
  • मोदी के नेतृत्व की तारीफ: मैक्रों ने नरेंद्र मोदी को स्वतंत्रता के बाद सबसे लंबे समय तक सेवा देने वाले प्रधानमंत्री बनने पर बधाई दी। उन्होंने कहा कि यह उनकी दृढ़ कार्यशैली, भारत की ताकत और नेतृत्व क्षमता को दर्शाता है।
  • ऊर्जा और जलवायु पर साथ काम कर रहे दोनों देश: नागरिक परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में दोनों देशों के बीच सहयोग बढ़ाने की बड़ी संभावनाएं हैं। स्मॉल मॉड्यूलर रिएक्टर (SMR) जैसी नई परमाणु तकनीकों में भी भारत और फ्रांस साथ काम कर सकते हैं।

फ्रांस से 114 राफेल विमानों की डील पर चर्चा

भारत और फ्रांस के बीच राफेल लड़ाकू विमान को लेकर बातचीत काफी आगे बढ़ चुकी है। विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने रविवार को बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के बीच हुई बैठक में राफेल के मुद्दे पर खास चर्चा हुई है।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी का पूरा ध्यान ‘मेक इन इंडिया’ को बढ़ावा देने पर है। भारत चाहता है कि डिफेंस प्रोजेक्ट्स में डिजाइनिंग से लेकर विमान बनाने तक का सारा काम दोनों देश मिलकर करें।

इनमें सबसे अहम वायु सेना के लिए 114 रफाल की डील है। करीब सवा 3 लाख कराेड़ रुपए के इस सौदे में भारत विमानों के साझा विकास और उत्पादन के अलावा टेक्नोलॉजी का पूरा ट्रांसफर चाहता है।

जरूरतों के हिसाब से इन विमानों पर मिसाइलें और अन्य हथियार लगाने के लिए सोर्स कोड को लेकर भी भारत अपना रुख स्पष्ट करेगा। मोदी कैबिनेट की सुरक्षा मामलों की समिति (CCS) ने अभी तक इस डील पर मुहर नहीं लगाई है।

भारत और फ्रांस बना सकते हैं एआई का ओपन सोर्स मॉडल

अभी दुनिया में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के दो बड़े मॉडल हैं। पहला- अमेरिकी, जो पूरी तरह से निजी कॉर्पोरेट्स के मुनाफे पर टिका है और दूसरा चीनी, जो सरकारी नियंत्रण पर आधारित है।

लेकिन, भारत और फ्रांस दुनिया को तीसरा यानी ओपन सोर्स मॉडल देने की तैयारी में हैं। मोदी ने कहा कि एक दशक पहले तक भारत को दुनिया एक ‘टेक्नोलॉजी अडॉप्टर’ मानती थी, लेकिन आज भारत ‘टेक्नोलॉजी प्रोवाइडर’ (समाधान देने वाला) बन चुका है।

वहीं, राष्ट्रपति मैक्रों ने भारत को बताते हुए कहा कि 1.4 अरब की आबादी वाला यह देश हर साल 10 लाख से ज्यादा इंजीनियर तैयार करता है, जो पूरे यूरोप और अमेरिका को मिलाकर बराबर हैं।

PM का फ्रांस दौरा, 5 तस्वीरें…

PM मोदी और राष्ट्रपति मैक्रों ने नीस में मुलाकात की। एक-दूसरे को गले लगाया।

PM मोदी और राष्ट्रपति मैक्रों ने नीस में मुलाकात की। एक-दूसरे को गले लगाया।

पीएम ने भारत इनोवेट्स कार्यक्रम में निवेशकों से मुलाकात की।

पीएम ने भारत इनोवेट्स कार्यक्रम में निवेशकों से मुलाकात की।

राष्ट्रपति मैक्रों ने पीएम मोदी के साथ सेल्फी ली और X पर पोस्ट किया।

राष्ट्रपति मैक्रों ने पीएम मोदी के साथ सेल्फी ली और X पर पोस्ट किया।

नीस में पीएम भारतीय समुदाय से मिले। होटल में एक बच्चे को दुलार भी किया।

नीस में पीएम भारतीय समुदाय से मिले। होटल में एक बच्चे को दुलार भी किया।

भारतीय महिलाओं ने पीएम के हाथ को अपने सिर पर लगाया।

भारतीय महिलाओं ने पीएम के हाथ को अपने सिर पर लगाया।

13 जून से 18 जून: फ्रांस-स्लोकाबिया दौरे पर मोदी, ट्रम्प से मिलेंगे

  • प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 6 दिनों के फ्रांस और स्लोकाबिया दौरे पर हैं। वे भारतीय समयानुसार शनिवार रात फ्रांस पहुंचे थे। होटल में भारतीय समुदाय ने उनका स्वागत किया।
  • पीएम बनने के बाद उनकी यह 7वीं फ्रांस यात्रा है। पीएम का फ्रांस दौरा दो फेज में होगा। इस दौरान 3 शहरों- नीस, एवियान और पेरिस जाएंगे।
  • पीएम 14 जून की शाम में स्लोवाकिया जाएंगे और 15 जून तक रुकेंगे। इस दौरान स्लोवाकिया के प्रधानमंत्री रोबर्ट फिको और राष्ट्रपति पीटर पेलेग्रीनी से मुलाकात करेंगे। 1993 में स्लोवाकिया के आजाद देश बनने के बाद किसी भारतीय पीएम का यह पहला दौरा है।
  • 16 जून को पीएम वापस फ्रांस आएंगे। 16 से 17 जून को एवियान में G7 समिट में हिस्सा लेंगे। 17 जून को G7 समिट के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प से द्विपक्षीय मुलाकात होगी।
  • मोदी और ट्रम्प 16 महीने बाद मिलेंगे। दोनों आखिरी बार फरवरी 2025 में वॉशिंगटन में मिले थे। ट्रम्प से मुलाकात के बाद मोदी 18 जून को पेरिस में राष्ट्रपति मैक्रों के साथ विवाटेक सम्मेलन में जाएंगे।

होर्मुज रक्षा गठबंधन में भारत के शामिल होने पर निर्णय संभव

प्रधानमंत्री की यात्रा के दौरान ईरान युद्ध के कारण होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों की आवाजाही को लेकर बड़ा फैसला हो सकता है। ब्रिटेन की अगुवाई में अप्रैल में हुई पेरिस वार्ता में भारत शामिल हुआ था।

होर्मुज खोलने को लेकर भारत किसी एक देश की पहल पर होने वाली सुरक्षा व्यवस्था के बजाए संयुक्त राष्ट्र के नियमों के अनुकूल बहुपक्षीय सुरक्षा व्यवस्था के हक में है। ऐसे में भारत फ्रांस और ब्रिटेन की पहल के साथ कदम मिलाते हुए होर्मुज रक्षा गठबंधन में शामिल होने पर सहमति दे सकता है।

G7 क्या है, इसमें कौन-कौन से देश हैं?

G7 यानी ‘ग्रुप ऑफ सेवन’, दुनिया के उन 7 देशों का समूह है, जिन्हें दुनिया की ‘मॉडर्न इकोनॉमी’ वाला देश कहा जाता है। इनमें अमेरिका, फ्रांस, ब्रिटेन, जापान, इटली, कनाडा और जर्मनी शामिल हैं।

इसकी शुरुआत 1975 में G6 के रूप में हुई थी। 1976 में कनाडा के जुड़ने के बाद यह G7 बन गया। 1998 में रूस को शामिल कर इसका नाम G8 कर दिया गया, लेकिन 2014 में यूक्रेन के क्रीमिया क्षेत्र पर रूस के कब्जे के बाद उसे समूह से बाहर कर दिया गया। इसके बाद यह फिर से G7 कहलाने लगा।

भारत G7 में गेस्ट नेशन, पीएम 7वीं बार शामिल होंगे

भारत G7 का सदस्य नहीं है, लेकिन दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्था और महत्वपूर्ण वैश्विक भूमिका के कारण उसे अक्सर विशेष आमंत्रित देश (गेस्ट नेशन) के रूप में बुलाया जाता है। आमतौर पर भारत के प्रधानमंत्री को समिट का न्यौता मिलता है।

पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने 2005 से 2013 के बीच पांच बार G7 (पहले G8) समिट में हिस्सा लिया था। PM मोदी को पहली बार 2019 में फ्रांस के बियारिट्ज में आयोजित G7 समिट में आमंत्रित किया गया था।

2020 में अमेरिका को मेजबानी करनी थी, लेकिन उसने तब समिट रद्द कर दी। इसके बाद 2021 में ब्रिटेन की मेजबानी में आयोजित सम्मेलन में PM मोदी वर्चुअली शामिल हुए। इसके अलावा मोदी 2022 में जर्मनी, 2023 में जापान, 2024 में इटली और 2025 में कनाडा में आयोजित G7 समिट में शामिल हुए।

भारत के टॉप-2 हथियार सप्लायर्स में शामिल फ्रांस

साल 2025 में फ्रेंच अखबार ला मोंड की खबर के मुताबिक फ्रांस ऐसे वक्त में भी भारत का साथ देता आया है, जब अमेरिका समेत दुनिया की तमाम बड़ी शक्तियों ने भारत का साथ छोड़ दिया था।

पोखरण में परमाणु टेस्ट के बाद अमेरिका, जापान, जर्मनी और ब्रिटेन जैसे देशों ने भारत पर कई प्रतिबंध लगा दिए, लेकिन फ्रांस ने भारत का समर्थन किया।

फ्रांस ने अमेरिकी प्रतिबंधों की अनदेखी करते हुए भारत को हथियार बेचना शुरू किया और अब वो रूस के बाद भारत का दूसरा सबसे बड़ा रक्षा हथियार आपूर्तिकर्ता बन गया है।

भारत को फ्रांस से मिराज 2000 फाइटर जेट, राफेल फाइटर जेट और स्कॉर्पीन पनडुब्बी मिल चुकी है।

फ्रांस ने इंटरनेशनल फोरम पर हमेशा भारत को सपोर्ट किया

सितंबर 2023 में हुई G20 समिट के दौरान PM मोदी ने अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन को 2024 के गणतंत्र दिवस समारोह में शामिल होने का न्योता दिया था, लेकिन दिसंबर में उन्होंने भारत आने से इनकार कर दिया।

ऐसे वक्त में भारत ने फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों को गणतंत्र दिवस में शामिल होने का न्योता भेजा। उन्होंने इसे तुरंत स्वीकार भी कर लिया।

अंतरराष्ट्रीय मंचों पर फ्रांस ने भारत का हमेशा समर्थन किया है। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने सितंबर 2024 में संयुक्त राष्ट्र में भारत को सुरक्षा परिषद का स्थायी सदस्य बनाने की मांग की थी।

इसके अलावा फ्रांस, न्यूक्लियर सप्लाई ग्रुप (NSG) में भी भारत को सदस्य बनाने का पक्षधर है।

G7 समिट क्या है, इस बार इसके एजेंडे की खास बात क्या है?

एक तय एजेंडे पर बातचीत के लिए हर साल G7 समिट होती है, जिसका आयोजन G7 का अध्यक्ष देश करता है। दरअसल, G7 के सभी 7 देश बारी-बारी से इसकी अध्यक्षता करते हैं।

इस साल फ्रांस अध्यक्षता कर रहा है। ऐसे में G7 समिट फ्रांस के एवियां शहर में होगी। इस समिट के एजेंडे में जियोपॉलिटिक्स क्राइसेस (यूक्रेन युद्ध, ईरान-इजराइल तनाव, गाजा, लेबनान और होर्मुज रूट की स्थिति, मध्य पूर्व की सुरक्षा चुनौतियां), वैश्विक आर्थिक सहयोग और असंतुलन और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के मुद्दे शामिल हैं।

इसके अलावा G7 के सदस्य देशों के लीडर्स और ऑफिसर्स साल में कई बैठकें करते हैं, जिनमें कई समझौते होते हैं और दुनिया की बड़ी घटनाओं पर आधिकारिक बयान जारी किए जाते हैं।

शुरुआत में G7 का एजेंडा आर्थिक चुनौतियों और क्लाइमेट चेंज जैसे मुद्दों का हल निकालना था। बाद में राजनीतिक और सुरक्षा से जुड़े मुद्दे भी इसमें शामिल हो गए। वैश्विक मुद्दों पर G7 के फैसलों का असर पूरी दुनिया पर पड़ता है।

उदाहरण के लिए G7 ने 2002 में मलेरिया और एड्स से लड़ने के लिए ग्लोबल फंड बनाया। 1998 में वित्तीय संकट के दौरान इंडोनेशिया और थाईलैंड जैसे देशों को आर्थिक मदद की। रूस-यूक्रेन जंग के दौरान रूस पर कड़े प्रतिबंध लगाने और यूक्रेन की मदद करने का फैसला किया।

G20 से कैसे अलग है G7

G7 का कोई स्थायी कार्यालय नहीं है और इसके सदस्य देश कोई अंतरराष्ट्रीय कानून पारित नहीं कर सकते। G20 में सबसे बड़ा मुद्दा वर्ल्ड इकोनॉमी होता है, जबकि G7 के लिए राजनीतिक मुद्दे भी अहम होते हैं। 1999 में बने G20 में G7 के देशों के अलावा BRICS के देश भी शामिल हैं।

इन देशों में भारत के अलावा अर्जेंटीना, ऑस्ट्रेलिया, ब्राजील, चीन, इंडोनेशिया, मेक्सिको, रूस, सऊदी अरब, दक्षिण अफ्रीका, दक्षिण कोरिया, तुर्किये और यूरोपीय संघ शामिल हैं। राजन कुमार के मुताबिक G20 में नई और बढ़ती हुई इकोनॉमी वाले देशों को भी शामिल किया गया है।

भले ही G7 और G20 का एजेंडा एक जैसा हो, लेकिन इस समय G20 ज्यादा प्रभावी गुट है। 2020 में अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने भी G7 को बहुत आउटडेटेड ग्रुप कहा था।

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