भारत में 5G लॉन्च हुए अभी लगभग 4 साल हो गए हैं। टेलीकॉम कंपनियां अभी भी देश के कई एरिया में 5G नेटवर्क अपग्रेड करने में लगी हैं। वहीं, 6G को लेकर भी तैयारी चल रही है। हालांकि, 6G में नेटवर्क अपग्रेड करना टेलीकॉम कंपनियों के लिए आसान नहीं होने वाला है। इसके लिए कई तरह की चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा।
5G के लॉन्च के समय इसे नेक्स्ट जेनरेशन और भविष्य की टेक्नोलॉजी कहा जा रहा था। खास तौर पर रोबोटिक्स और ऑटोमेशन आदि को लेकर 5G को लेकर कई सारे वादे किए गए थे। अब 6G को लेकर भी ऐसे ही कुछ दावे किए जा रहे हैं। टेलीकॉम ऑपरेटर्स अभी से अपकमिंग मोबाइल नेटवर्क को लेकर फूंक-फूंक कर कदम रख रही हैं।
सॉफ्टवेयर अपग्रेड से नहीं चलेगा काम
सामने आई रिपोर्ट के मुताबिक, 5G से 6G में अपग्रेड करना आसान नहीं होने वाला है। यह 4G से 5G के ट्रांसफॉर्मेशन जैसा नहीं होगा कि बस सॉफ्टवेयर अपग्रेड करें और नेटवर्क स्पीड बढ़ जाए। AI के बूम ने टेलीकॉम ऑपरेटर्स की टेंशन और बढ़ा दी है। पहले कहा जा रहा था कि 6G बस 5G की अपग्रेडेड नेटवर्क टेक्नोलॉजी होगी। हालांकि, सामने आई रिपोर्ट के मुताबिक, यह इतना आसान नहीं है। AI और स्मार्ट ग्लासेज आदि आने के बाद से नेटवर्क को अपग्रेड करने के लिए टेलीकॉम कंपनियों को हार्डवेयर में बड़ा निवेश करना पड़ेगा।
नेटवर्क गियर बनाने वाली कंपनियों Nokia और Ericssion का कहना है कि 6G मार्केट में भारी निवेश का दौर शुरू कर सकता है। ऑपरेटर्स को न चाहते हुए भी महंगे हार्डवेयर खरीदने होंगे, जो इनका बजट बिगाड़ सकता है। यह नेटवर्क टेक्नोलॉजी 7GHz स्पेक्ट्रम बैंड पर काम करेगी, जो मौजूदा 5G के 6GHz बैंड के मुकाबले महंगा है। टेलीकॉम ऑपरेटर्स के पास मौजूद बैंड पहले से ही 4G और 5G की वजह से फुल हो गए हैं।
6G के लिए चुनौती
6G की सबसे बड़ी खामी ये है कि इसके सिग्नल ज्यादा दूर तक नहीं जा पाते हैं और दीवारों को भी नहीं पार कर सकते हैं। ऐसे में टेलीकॉम कंपनियों को महंगे एंटिना और बीमफॉर्मिंग रेडियो पर शिफ्ट होनेा होगा ताकि टेलीकॉम सिग्नल को यूजर्स तक आसानी से पहुंचाया जा सके।
नेटवर्क अपग्रेड में भारी निवेश
इसके अलावा 6G को लॉन्च करने से पहले टेलीकॉम ऑपरेटर्स को 5G SA यानी स्टैंड अलोन में शिफ्ट होना होगा। जियो पहले से ही SA नेटवर्क पर काम कर रहा है। वहीं, Airtel और Vi जैसी कंपनियां NSA से SA पर शिफ्ट होने की दिशा में कदम बढ़ा चुकी हैं। वहीं, यूरोपीय देशों में तो 5G सर्विस पहले से बनाए गए 4G नेटवर्क के सहारे यानी NSA मोड में चल रहे हैं। ऐसे में ऑपरेटर को पहले 5G स्टैंडअलोन कोर में अपग्रेड होना होगा। इसके बाद ही 6G की लॉन्चिंग संभव होगी।
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