जीवनरक्षक दवाओं की कीमतों में कथित भारी मुनाफाखोरी और दवा मूल्य नियंत्रण नियमों के उल्लंघन के खिलाफ आगरा के वरिष्ठ चिकित्सक एवं सर्जन डॉ. संजय कुलश्रेष्ठ ने सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका दायर की है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि कुछ दवाओं पर वास्तविक कीमत की तुलना में 16 गुना तक अधिक वसूली की जा रही है। मामले की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट की कोर्ट नंबर-2 में 23 जून को निर्धारित है। डॉ. कुलश्रेष्ठ ने याचिका में दवा सप्लाई चेन में रिटेलर्स और अस्पतालों की ओर से किए जा रहे कथित अनैतिक मुनाफे पर रोक लगाने तथा ड्रग्स प्राइसेज कंट्रोल ऑर्डर (डीपीसीओ)-2013 का कड़ाई से पालन सुनिश्चित कराने की मांग की है। उनका कहना है कि कई फार्मा कंपनियां नियमों को दरकिनार कर मरीजों से दवाओं की वास्तविक कीमत से कई गुना अधिक राशि वसूल रही हैं। याचिका में एंटीबायोटिक दवा टाइगेबेक्स (Tigebex) का उदाहरण दिया गया है। इसके अनुसार दवा की अधिकतम खुदरा कीमत (एमआरपी) 5,635 रुपये है, जबकि यह दवा बाजार और अस्पतालों को करीब 350 रुपये में उपलब्ध हो जाती है। डॉ. कुलश्रेष्ठ का कहना है कि डीपीसीओ-2013 के तहत खुदरा विक्रेता के लिए सीमित मार्जिन का प्रावधान है, फिर भी दवाओं पर अत्यधिक लाभ लिया जा रहा है। उन्होंने याचिका में सवाल उठाया है कि जब निर्धारित लाभ सीमा सीमित है तो 90 प्रतिशत से अधिक मार्जिन कैसे दिया जा रहा है। कॉरपोरेट अस्पतालों पर लगाए शोषण के आरोप याचिका में बड़े और कॉरपोरेट अस्पतालों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए गए हैं। डॉ. कुलश्रेष्ठ का आरोप है कि कई अस्पताल मरीजों को अस्पताल परिसर की फार्मेसी से ही दवाएं खरीदने के लिए बाध्य करते हैं, जहां दवाएं पूरी एमआरपी पर बेची जाती हैं। उनका दावा है कि कई मामलों में अस्पताल के कुल बिल का 40 प्रतिशत तक हिस्सा केवल दवाओं का होता है, जिससे मरीजों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ता है। एंटीबायोटिक के बढ़ते इस्तेमाल पर चिंता डॉ. कुलश्रेष्ठ ने याचिका में यह भी कहा है कि एंटीबायोटिक दवाओं पर अधिक मुनाफे के कारण उनका अनावश्यक उपयोग बढ़ रहा है। इससे देश में एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस यानी सुपरबग का खतरा बढ़ सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार यह स्थिति भविष्य में सामान्य संक्रमणों के इलाज को भी मुश्किल बना सकती है। याचिका में सुप्रीम कोर्ट से दवा मूल्य नियंत्रण नियमों का प्रभावी पालन सुनिश्चित कराने, अस्पतालों और दवा विक्रेताओं की जवाबदेही तय करने तथा मरीजों को राहत देने के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश जारी करने की मांग की गई है।
Source link
जीवनरक्षक दवाओं पर हो रही 16 गुना तक मुनाफाखोरी: आगरा के सर्जन ने सुप्रीम कोर्ट में दायर की याचिका, 23 जून को होगी सुनवाई – Agra News
RELATED ARTICLES

