चित्रकूट में ग्रामीण क्षेत्रों की नेत्र स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए एक नई पहल शुरू की गई है। श्री सद्गुरु सेवा संघ ट्रस्ट और स्टैंडर्ड चार्टर्ड के सहयोग से रविवार को ‘रूरल आई केयर एजुकेशन एकेडमी’ का शुभारंभ किया गया। इस एकेडमी का लक्ष्य अगले तीन वर्षों में 20 हजार से अधिक नेत्र देखभाल पेशेवर तैयार करना है, जिसमें महिलाओं और वंचित वर्ग को प्राथमिकता दी जाएगी। एकेडमी का उद्घाटन मध्यप्रदेश के उपमुख्यमंत्री एवं लोक स्वास्थ्य, परिवार कल्याण तथा चिकित्सा शिक्षा मंत्री राजेंद्र शुक्ला ने किया। इस अवसर पर संघ लोक सेवा आयोग के पूर्व सदस्य राजीव नयन चौबे (सेवानिवृत्त आईएएस), स्टैंडर्ड चार्टर्ड की भारत की सस्टेनेबिलिटी प्रमुख करूणा भाटिया, चित्रकूट विधायक सुरेंद्र सिंह गहरवार, दीनदयाल शोध संस्थान के संगठन सचिव अभय महाजन और श्री सद्गुरु सेवा संघ ट्रस्ट के निदेशक एवं कार्यकारी ट्रस्टी डॉ. इलेश जैन उपस्थित रहे। इस एकेडमी का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों के लिए प्रशिक्षित, रोजगारपरक और लैंगिक समावेशी नेत्र स्वास्थ्य कार्यबल तैयार करना है। यहां नेत्र रोग विशेषज्ञों, एलाइड ऑप्थैल्मिक पर्सनल, सामुदायिक स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं और नेत्र देखभाल प्रबंधकों को आधुनिक तकनीक से प्रशिक्षण दिया जाएगा। प्रबंधन पाठ्यक्रमों में कम से कम 50 प्रतिशत और एलाइड ऑप्थैल्मिक प्रशिक्षण में 70 प्रतिशत तक महिलाओं को अवसर देने की योजना है। एकेडमी में सिमुलेशन आधारित स्किल लैब, डिजिटल लर्निंग सिस्टम और आवासीय प्रशिक्षण कार्यक्रम जैसी आधुनिक सुविधाएं विकसित की गई हैं। यहां दीर्घकालिक रोजगारपरक कोर्स के साथ अल्पकालिक क्लीनिकल एवं प्रबंधकीय प्रशिक्षण भी संचालित होंगे। सद्गुरु नेत्र चिकित्सालय पिछले पांच दशकों से मध्य और उत्तरी भारत के ग्रामीण क्षेत्रों में किफायती और गुणवत्तापूर्ण नेत्र चिकित्सा सेवाएं प्रदान कर रहा है। स्टैंडर्ड चार्टर्ड के ‘सीइंग इज बिलीविंग’ कार्यक्रम के सहयोग से अब तक 8.5 लाख से अधिक लोगों की नेत्र जांच, दो लाख से ज्यादा चश्मों का वितरण और 68 हजार से अधिक मरीजों की सर्जरी की जा चुकी है। मध्यप्रदेश और उत्तरप्रदेश में 64 विजन सेंटर भी स्थापित किए गए हैं, जिनका संचालन महिला विजन टेक्नीशियन कर रही हैं। उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ला ने कहा कि यह अत्याधुनिक प्रशिक्षण संस्थान देशभर में नेत्र चिकित्सा के लिए कुशल मानव संसाधन तैयार करेगा। करूणा भाटिया ने इस अवसर पर कहा कि स्थायी बदलाव के लिए एक मजबूत स्वास्थ्य प्रणाली और प्रशिक्षित कार्यबल आवश्यक है।
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चित्रकूट में रूरल आई केयर एकेडमी का शुभारंभ: अगले तीन वर्षों में 20 हजार नेत्र देखभाल पेशेवर तैयार होंगे – Chitrakoot News
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