चंदेरिया थाना पुलिस ने सात दिन से लापता एक व्यक्ति के मामले में ऐसा खुलासा किया है, जिसने पूरी कहानी बदल दी। जिस व्यक्ति की तलाश में पुलिस ने दिन-रात मेहनत की, दो कुओं का पानी खाली करवाया, सिविल डिफेंस और गोताखोरों की मदद ली, वह नागौर जिले में अपने पुराने परिचित के यहां रह रहा था। पुलिस जांच में सामने आया कि वह फाइनेंस कंपनियों के कर्ज और दूसरे विवादों के दबाव से बचने के लिए खुद ही घर छोड़कर चला गया था। इतना ही नहीं, पुलिस का दावा है कि उसके परिवार को भी उसकी जानकारी थी और वह लगातार उनसे फोन पर बात कर रहा था, लेकिन यह बात पुलिस से छिपाई गई। आखिरकार तकनीकी जांच और लगातार पड़ताल के बाद पुलिस उसे नागौर से लेकर चित्तौड़गढ़ पहुंची। कुएं के पास मिला मोबाइल और बाइक, पुलिस ने हर संभावना पर किया काम चंदेरिया थानाधिकारी मोतीराम सारण ने बताया कि 40 वर्षीय रतनलाल गाडरी पुत्र ओंकार गाडरी 28 जून को घर से निकलने के बाद लापता हो गया था। परिजनों ने उसकी गुमशुदगी दर्ज करवाई और आशंका जताई कि वह किसी कुएं में गिर गया होगा। जांच के दौरान एक कुएं के पास उसका मोबाइल मिला, जबकि दूसरे कुएं के पास उसकी बाइक खड़ी मिली। इससे पुलिस को लगा कि मामला किसी हादसे से जुड़ा हो सकता है। उसी रात पुलिस मौके पर पहुंच गई और अगले दिन सिविल डिफेंस तथा गोताखोरों की टीम को बुलाया गया। दो बड़े मोटरों से दोनों कुओं का पानी घंटों तक बाहर निकाला गया और पूरी तलाशी ली गई, लेकिन वहां कोई नहीं मिला। इसके बाद भी पुलिस ने तलाश जारी रखी और हर संभावित सुराग पर काम करती रही। जांच में खुली पूरी सच्चाई, कर्ज से बचने के लिए रची गई थी योजना उन्होंने बताया कि लगातार जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि रतनलाल ने फाइनेंस कंपनियों से पांच ट्रैक्टर, एक पिकअप, एक कार, एक बुलेट, एक प्लेटिना बाइक सहित कई गाड़ियां फाइनेंस करवा रखे थे। इसके अलावा उस पर कई छोटे-बड़े लोन भी थे। पुलिस का कहना है कि इन कर्जों और फाइनेंस कंपनियों के दबाव से बचने के लिए उसने खुद ही गायब होने की योजना बनाई। पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि उसका पड़ोसियों से जमीन को लेकर विवाद चल रहा था। इस मामले में कोर्ट का फैसला भी उसके खिलाफ आया था, जिससे उस पर और दबाव बढ़ गया था। पुलिस के अनुसार इन सभी कारणों से उसने ऐसा माहौल बनाया कि लोगों को लगे उसके साथ कोई बड़ी घटना हो गई है। परिवार को थी पूरी जानकारी, फिर भी पुलिस को नहीं बताया पुलिस का दावा है कि रतनलाल घर छोड़ने के बाद भी लगातार अपने परिवार के संपर्क में था। वह फोन पर घरवालों से बात कर रहा था, लेकिन परिवार ने इसकी जानकारी पुलिस को नहीं दी। जांच में सामने आया कि उसके बेटे शंकरलाल और अन्य परिजनों को भी उसके सुरक्षित होने की जानकारी थी। इसके बावजूद वे लगातार गुमशुदगी की बात कहते रहे। इस दौरान परिवार की ओर से जिला कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक को कई ज्ञापन भी दिए गए। इतना ही नहीं, सोमवार को कलेक्ट्रेट पर धरना देने की तैयारी भी कर ली गई थी। आसपास के 15 से 20 गांवों में लोगों को बुलाने की सूचना भी दी गई थी। थानाधिकारी ने बताया कि अगर समय रहते सच्चाई सामने नहीं आती तो मामला और ज्यादा तूल पकड़ सकता था। पुराने परिचित के पास पहुंची पुलिस, नागौर से लेकर आई चित्तौड़गढ़ जांच के दौरान पुलिस को सूचना मिली कि रतनलाल पहले नागौर जिले के कुचेरा इलाके में रह चुका है और संभव है कि वहीं गया हो। इसके बाद चंदेरिया थाना पुलिस ने कुचेरा पुलिस से संपर्क किया। स्थानीय पुलिस की मदद से उसके पुराने परिचितों के बारे में जानकारी जुटाई गई। जांच करते हुए पुलिस नागौर जिले के कुचेरा क्षेत्र तक पहुंची, जहां रतनलाल मिल गया। इसके बाद पुलिस उसे अपने साथ चित्तौड़गढ़ लेकर रवाना हो गई। अधिकारियों का कहना है कि लगातार जांच, तकनीकी इनपुट और स्थानीय पुलिस के सहयोग से ही यह मामला सुलझ सका। सात दिन की मेहनत के बाद खुला मामला, अब आगे होगी कार्रवाई इस पूरे मामले में पुलिस ने सात दिन तक लगातार अलग-अलग स्तर पर जांच की। कुओं की तलाशी से लेकर तकनीकी जांच और दूसरे जिले तक पहुंचकर व्यक्ति को तलाशने तक हर पहलू पर काम किया गया। अब रतनलाल और उसके परिवार के खिलाफ पुलिस को गलत जानकारी देकर गुमराह करने और सरकारी संसाधनों का अनावश्यक इस्तेमाल करवाने के मामले में आगे कार्रवाई की जाएगी। वहीं इस घटनाक्रम ने यह भी दिखाया कि झूठी जानकारी के कारण पुलिस और बचाव टीमों का कितना समय और संसाधन खर्च हो सकता है, जबकि उसी समय उनकी जरूरत किसी वास्तविक आपात स्थिति में भी पड़ सकती थी।
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