अब देश भर के लगभग 14.66 लाख (14,66,682) स्कूलों में 1.02 करोड़ (1,02,73,020) से अधिक शिक्षक काम कर रहे हैं। इसके साथ देश में लगभग 24.72 करोड़ स्टूडेंट हैं। वहीं बात अगर स्कूल छोड़ने वाले छात्रों यानी Dropout की करें तो उनका दर 2024-25 में 2.3 प्रतिशत था जो घटकर अब यानी 2025-26 में 1.8 प्रतिशत हो गया है। यह जानकारी शिक्षा मंत्रालय की UDISE रिपोर्ट में दी गई है।
जारी रिपोर्ट में और क्या बताया है?
शिक्षा मंत्रालय की तरफ से जारी रिपोर्ट की मानें तो देश भर के सभी स्कूलों में काम करने वाले शिक्षकों की संख्या 2022-23 में 94.8 लाख थी जो 2023-24 में बढ़कर 98 लाख हो गई और 2024-25 में 1.01 करोड़ के साथ एक करोड़ का आंकड़ा पार कर लिया। अगर 2025-26 की बात करें तो इस वर्ष में शिक्षकों की यह संख्या 1.02 करोड़ हो गई है। शिक्षा मंत्रालय ने इसे ‘भारत में स्कूली शिक्षा के इतिहास में एक बड़ी उपलब्धि’ बताया है और इस उपलब्धि का श्रेय समग्र शिक्षा और राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 जैसी योजनाओं को दिया है।
स्कूल छोड़ने वालों की दर में आई कमी
उसी रिपोर्ट में बताया गया है कि प्राइमरी और सेकेंडरी लेवल पर स्कूल छोड़ने वालों की दर में उल्लेखनीय कमी आई है। रिपोर्ट में कहा गया है कि, ‘प्रिपरेटरी लेवल पर स्कूल छोड़ने वालों की दर 2024-25 में 2.3 प्रतिशत थी जो घटकर 2025-26 में 1.8 प्रतिशत हो गई। वहीं सेकेंडरी लेवल पर यह 8.2 प्रतिशत से घटकर 7 प्रतिशत हो गई।’
स्कूलों में एडमिशन भी बढ़े
ड्रापआउट कम होने के साथ ही साथ स्कूलों में कुल दाखिले भी बढ़े हैं। रिपोर्ट के मुताबिक 2025 में 24.6 लाख से बढ़कर 24.72 लाख हो गए हैं, हालांकि सरकारी संस्थानों में दाखिले 26.8 लाख कम हुए हैं, जो 2024-25 में 12.1 करोड़ से घटकर इस साल 11.8 करोड़ हो गए। इसके साथ ही प्राइवेट स्कूलों में दाखिले में लगभग 30 लाख छात्रों की बढ़ोतरी देखी गई।
इसके अलावा, अलग-अलग स्तरों पर दाखिले के पैटर्न में भी बदलाव आया है। 2023-24 और 2025-26 के बीच सेकेंडरी स्कूल में दाखिले लगभग 31.5 लाख बढ़े, जबकि प्रीपरेटरी स्तर पर दाखिले 42 लाख कम हुए। सेकेंडरी स्तर पर GRE 2023-24 में 68.5 प्रतिशत से बढ़कर 2025-26 में 71.7 प्रतिशत हो गया।
ज़ीरो एनरोलमेंट और सिंगल टीचर वाले स्कूल
यह रिपोर्ट ज़ीरो एनरोलमेंट (बिना दाखिले वाले) स्कूलों और सिंगल टीचर (एक शिक्षक) वाले स्कूलों की संख्या में कमी को भी दिखाती है। पिछले सालों की तुलना में इस साल सिंगल टीचर वाले स्कूलों की संख्या में लगभग 3% की कमी आई है। इसी तरह, ज़ीरो एनरोलमेंट वाले स्कूलों की संख्या में भी लगभग 2 प्रतिशत की कमी आई है।
बेहतर ट्रांज़िशन रेट भी दिखा
जारी रिपोर्ट के मुताबिक मौजूदा एकेडमिक ईयर में शिक्षा के अलग-अलग चरणों के बीच ट्रांज़िशन रेट (एक चरण से दूसरे चरण में जाने की दर) में भी सुधार देखा गया है। मंत्रालय के अनुसार, यह सुधार शिक्षा प्रणाली में छात्रों की बेहतर प्रगति को दर्शाता है और यह भी बताता है कि ज्यादा छात्रों ने पढ़ाई बीच में छोड़े बिना अपनी पढ़ाई जारी रखी। वहीं फाउंडेशनल से प्रीपरेटरी लेवल तक ट्रांज़िशन रेट 2024-25 में 98.6 प्रतिशत से बढ़कर 2025-26 में 99.2 प्रतिशत हो गया।
शिक्षा मंत्रालय की तरफ से जारी डेटा से यह भी पता चलता है कि मिडिल और सेकेंडरी चरणों में भी ट्रांज़िशन रेट बढ़ा है। प्रीपरेटरी से मिडिल लेवल में 92.2 प्रतिशत से बढ़कर 93.8 प्रतिशत और मिडिल से सेकेंडरी चरण में 2024-25 में 86.6 प्रतिशत से बढ़कर 2025-26 में 88.3 प्रतिशत हो गया है।
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