दिल्ली में 21 दिनों से जंतर-मंतर पर अनशन पर बैठे देश के प्रसिद्ध शिक्षाविद और एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक को पुलिस द्वारा जबरन उठाए जाने और युवाओं पर हुए लाठीचार्ज को लेकर आम आदमी पार्टी (AAP) ने केंद्र की मोदी सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। AAP के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल और वरिष्ठ नेता संजय सिंह ने सरकार के इस कदम की तीखे शब्दों में आलोचना करते हुए इसे ‘तानाशाही’ करार दिया है। ‘कॉकरोच आंदोलन को कुचलने की बजाय व्यवस्था सुधारो’ अरविंद केजरीवाल ने सोशल मीडिया पर लिखा कि “इतना अहंकार ठीक नहीं है। उन्हें जबरन उठाने की बजाय, मोदी सरकार को सोनम वांगचुक से बात करनी चाहिए थी। कॉकरोच आंदोलन को कुचलने की बजाय, देश की शिक्षा और परीक्षा व्यवस्था सुधारो। सोनम वांगचुक के साथ ज़बरदस्ती मोदी सरकार की हार है।” अरविंद केजरीवाल बोले- धक्के-मुक्के मार कर अस्पताल ले गए अरविंद केजरीवाल ने X पर डाले वीडियो में कहा कि “आज सुबह-सुबह जब सोकर उठे, तो सुनने को मिला कि सोनम वांगचुक जी को बहुत ही गलत तरीके से उठा लिया गया, उनका अनशन तोड़ने की कोशिश की गई है। सादे कपड़ों में पुलिस भेजकर, चारों तरफ से चादर से ढक के, उनके साथियों के साथ बदसलूकी, बदतमीजी करके, धक्के-मुक्के मार के उन्हें उठा के अस्पताल में भर्ती करा दिया गया। उन्होंने कहा कि गांधी जी ने कितने लंबे-लंबे फास्ट किए थे, ऐसे तो अंग्रेज भी नहीं करते थे। क्या इसी- इसी के लिए हमने आज़ादी ली थी कि एक दिन ऐसा आएगा जब हमारी सरकार हम लोगों के साथ इस तरह से बदसलूकी करेगी? मैं मोदी जी से कहना चाहता हूँ कि ये बच्चे क्या मांग रहे हैं? ये हमारे देश के बच्चे हैं, इनके साथ इस तरह की बदसलूकी करना सही नहीं है। ये बच्चे यही तो मांग रहे हैं कि हमें अच्छी शिक्षा व्यवस्था चाहिए, ये बच्चे यही तो मांग रहे हैं कि पेपर लीक नहीं होने चाहिए, ये बच्चे यही तो मांग रहे हैं कि अच्छी- अच्छी परीक्षा व्यवस्था होनी चाहिए।
उस पे ध्यान देने की बजाय सरकार का पूरा फोकस इस चीज़ पे है कि इनके आंदोलन को कैसे फेल किया जाए, इनके आंदोलन को कैसे डिस्क्रेडिट किया जाए, इनके आंदोलन को कैसे अपमानित किया जाए। मैं मोदी जी से प्रार्थना करता हूँ कि ऐसे मत करो, इतना अहंकार मत करो, इतना अहंकार अच्छा नहीं होता। इतिहास गवाह है कि जब-जब किसी ने इतना अहंकार किया है, उस आदमी का नाश हुआ है।” दूसरी तरफ आप’ के वरिष्ठ नेता और सांसद संजय सिंह ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान सरकार पर कई गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि 59 साल के सोनम वांगचुक अपनी जान दांव पर लगाकर देश के उन करोड़ों युवाओं के हक की लड़ाई लड़ रहे हैं, जो पिछले कुछ समय में हुए 93 पेपर लीक की वजह से बर्बाद हो चुके हैं। संजय सिंह ने आरोप लगाया कि सरकार वांगचुक के 20 जुलाई को होने वाले संसद मार्च से बुरी तरह डर गई थी। संजय सिंह ने कहा कि 59 साल के सोनम वांगचुक पिछले 21 दिनों से आमरण अनशन पर बैठे हुए थे और अपनी जिंदगी दांव पर लगाकर देश के उन करोड़ों युवाओं की आवाज उठा रहे थे जो 93 पेपर लीक से बर्बाद हो चुके थे। वे युवा बेबस थे और उनकी आवाज उठाने वाला कोई नहीं था। भारत के प्रधानमंत्री ने 21 दिन तक उनसे बात नहीं की और अनशन खत्म करने की अपील करने के लिए एक ट्वीट करना भी जरूरी नहीं समझा। सरकार का कोई प्रतिनिधि उनसे बातचीत करने के लिए नहीं आया कि आखिर वे क्यों अपनी जान देने पर आमादा हैं?
प्रधानमंत्री को पता था कि यह आवाज बहुत बड़ी बनने वाली है, इसलिए उन्होंने दिल्ली का पुलिस कमिश्नर बदलकर एक ऐसा पुलिस कमिश्नर बिठाया जिससे सोनम वांगचुक को गिरफ्तार किया जा सके। मीडिया के माध्यम से जानकारी मिल रही है कि अभिजीत दिपके को भी डिटेन कर लिया गया है।
सत्ता का यह अहंकार यही नौजवान खत्म करेगा और जिसके ऊपर आज लाठियां बजाई जा रही हैं, वही इस सत्ता को उखाड़ कर फेंकेगा। इसलिए मैं देश के युवाओं से अपील करना चाहता हूं कि सोनम वांगचुक का साथ दीजिए और अपने आंदोलन को कमजोर ना पड़ने दीजिए।
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