प्रमोद यादव | प्रयागराज5 मिनट पहले
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प्रयागराज के मोतीलाल नेहरू राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (MNNIT) में मंगल भूमि फाउंडेशन ने ‘भारतीय ज्ञान परंपरा में पर्यावरण संरक्षण’ विषय पर एक विचार गोष्ठी का आयोजन किया। इसमें विशेषज्ञों ने सर्वसम्मति से कहा कि पर्यावरण की रक्षा केवल सरकारी योजनाओं के भरोसे नहीं छोड़ी जा सकती, बल्कि पृथ्वी पर हरियाली वापस लाने के लिए इसे प्रत्येक नागरिक का नैतिक दायित्व बनाना होगा।
गोष्ठी के मुख्य वक्ता प्रो. राजेश गर्ग ने इस बात पर जोर दिया कि वेद, उपनिषद और पुराणों में जल, वायु, भूमि और वन संरक्षण को मानव का अनिवार्य धर्म माना गया है। उन्होंने कहा कि आज जब विश्व पर्यावरणीय असंतुलन से जूझ रहा है, तब प्रकृति के प्रति भारतीय ज्ञान परंपरा में निहित श्रद्धा का भाव ही समाधान का मार्ग दिखाता है।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि भारत भारती के राष्ट्रीय कार्याध्यक्ष विनय पत्राले ने अपने संबोधन में कहा कि भारत की सांस्कृतिक विरासत हमेशा प्रकृति के साथ संतुलन और सह-अस्तित्व का संदेश देती है। उन्होंने आह्वान किया कि यदि समाज भारतीय जीवन मूल्यों को अपनी दैनिक दिनचर्या में अपना ले, तो पर्यावरण संरक्षण मात्र सरकारी प्रयास न रहकर एक सशक्त जन-आंदोलन का रूप ले सकता है।
अतिथि वक्ता प्रमोद द्विवेदी ने उपस्थित युवाओं और शोधार्थियों को प्रेरित करते हुए कहा कि स्थानीय स्तर पर जैव विविधता और जल स्रोतों के संरक्षण में युवाओं की सक्रिय भूमिका निर्णायक होगी। उन्होंने यह भी कहा कि पर्यावरण की रक्षा के लिए अब समाज को स्वयं आगे आना होगा।
कार्यक्रम का संचालन डॉ. श्रवण मिश्रा ने किया, जबकि रामबाबू तिवारी ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया। इस अवसर पर शिक्षाविदों, शोधार्थियों और विद्यार्थियों ने जल संरक्षण, वृक्षारोपण और प्राकृतिक संसाधनों के संवर्धन हेतु सामूहिक प्रयास करने का संकल्प लिया। आयोजन का मुख्य उद्देश्य भारतीय ज्ञान परंपरा के माध्यम से समाज में पर्यावरण के प्रति नई चेतना जागृत करना था।


