Thursday, July 30, 2026
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गर्भावस्था के आधार पर नौकरी से वंचित नहीं कर सकते: लखनऊ हाईकोर्ट ने महिला अभ्यर्थी की दोबारा पीईटी कराने का आयोग को आदेश दिया – Lucknow News




इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि गर्भावस्था किसी महिला को सरकारी नौकरी से वंचित करने का आधार नहीं हो सकती। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि मातृत्व के कारण किसी महिला को भर्ती प्रक्रिया से बाहर करना उसके प्रजनन और रोजगार के अधिकारों का उल्लंघन है। मुख्य न्यायमूर्ति अरुण भंसाली और न्यायमूर्ति जसप्रीत सिंह की खंडपीठ ने यह फैसला वन रक्षक एवं वन्यजीव रक्षक भर्ती की अभ्यर्थी कोमल जायसवाल की विशेष अपील को स्वीकार करते हुए सुनाया। कोर्ट ने उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (यूपीएसएसएससी) के उस निर्णय को रद्द कर दिया, जिसमें कोमल की पीईटी स्थगित करने की मांग खारिज कर दी गई थी। कोमल जायसवाल ने वर्ष 2023 की भर्ती में लिखित परीक्षा सफलतापूर्वक पास कर ली थी। हालांकि, शारीरिक दक्षता परीक्षा (पीईटी) के समय वह नौ माह की गर्भवती थीं। उन्होंने आयोग से अनुरोध किया था कि उनकी पीईटी बाद में आयोजित की जाए। आयोग ने कोमल के अनुरोध को यह कहते हुए अस्वीकार कर दिया था कि नियमों में शारीरिक दक्षता परीक्षा स्थगित करने का कोई प्रावधान नहीं है। इसके बाद, एकल पीठ ने भी उनकी याचिका को खारिज कर दिया था, जिसके विरुद्ध उन्होंने विशेष अपील दायर की थी। न्यायालय ने अपने फैसले में जोर दिया कि किसी महिला का विवाहित होना या गर्भवती होना नियुक्ति के लिए अयोग्यता नहीं है। कोर्ट ने कहा कि यदि नियमों में पीईटी स्थगित करने पर कोई स्पष्ट रोक नहीं है, तो आयोग को ऐसे मामलों में संवेदनशील और मानवीय दृष्टिकोण अपनाना चाहिए था। खंडपीठ ने यह भी माना कि भर्ती प्रक्रिया काफी लंबी चली। लिखित परीक्षा और शारीरिक दक्षता परीक्षा के बीच दो वर्ष से अधिक का अंतर रहा, जिसके कारण इस अवधि में विवाह और गर्भधारण होना स्वाभाविक है। न्यायालय ने उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग को निर्देश दिया है कि वह चार सप्ताह के भीतर कोमल जायसवाल की शारीरिक दक्षता परीक्षा दोबारा आयोजित करे। यदि वह पीईटी, मेडिकल परीक्षण और मेरिट में सफल होती हैं, तो उन्हें उसी तिथि से नियुक्ति का लाभ दिया जाएगा, जिस दिन उनसे कम मेरिट वाले अभ्यर्थी को नियुक्ति मिली थी। साथ ही, अदालत ने ओबीसी महिला वर्ग का एक पद तब तक रिक्त रखने का भी आदेश दिया है।



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