जोधपुर में प्रेमिका का मर्डर कर उसकी बॉडी खेत में गाड़ने वाले प्रेमी ने कई चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। आरोपी ने मर्डर से पहले 10 बार से ज्यादा अजय देवगन की फिल्म ‘दृश्यम’ देखकर पूरी साजिश रची थी।
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शव को ऐसी जगह छिपाया कि पुलिस उसे 5 महीने तक नहीं ढूंढ पाई। आरोपी फिल्मी स्टाइल में बार-बार पुलिस को गुमराह करता रहा।
श्मशान घाट में जली चिताओं में भी हड्डियों को तलाशने की कोशिश हुई। आखिरकार एक क्लू से पुलिस आरोपी के खेत तक पहुंची और खुदाई कर कंकाल में तब्दील हुई डेड बॉडी को रिकवर किया।
दरअसल, जोधपुर के बिलाड़ा का रहने वाले आरोपी प्रेमी राजू ने पुलिस को बताया कि ब्यावर की लीला देवी के साथ 2 साल से अफेयर था।
लेकिन उसने पैसों के लिए ब्लैकमेल करना शुरू कर दिया था। इसी के चलते मर्डर को अंजाम दिया। 14 मार्च की रात को हुए इस मर्डर का पूरा खुलासा पुलिस ने 26 अगस्त को किया। पढ़िए- कैसे इस मर्डर का राज खुला…
होटल में मुलाकात के बाद शुरू हुई लव स्टोरी
जोधपुर के बिलाड़ा कस्बे में गांव पिचियाक निवासी राजू गिरी ट्रेवल एजेंट का काम करता था। उसकी ब्यावर की लीला देवी से 2 साल पहले जैतारण (पाली) के एक होटल में मुलाकात हुई थी।
उस मुलाकात के बाद वह महिला से मोहब्बत करने लगा। दो साल से प्रेम प्रसंग चल रहा था। अफेयर के चलते राजू को उसकी दिव्यांग पत्नी छोड़ कर अपने पीहर चली गई थी।
प्रेमिका को खुश करने के लिए उसने पत्नी के गहने गिफ्ट कर दिए। लेकिन उसकी डिमांड बढ़ती जा रही थी। लीला ने 2 लाख रुपए और देने को कहा। यहीं से मर्डर की साजिश रचना शुरू कर दी।
अब सिलसिलेवार पढ़िए- वारदात की पूरी कहानी
1. घर से 40 किलोमीटर दूर खेत ले जाकर हत्या
ब्यावर एसपी रतनसिंह ने बताया- 13 मार्च, 2026 को पिचियाक निवासी आरोपी राजू गिरी के बुलाने पर लीला उससे मिलने पहुंच गई। आरोपी उसे 40 किमी दूर खोखरिया गांव के पास अपने खेत पर ले गया।
प्लानिंग के तहत उसने लीला को 14-15 मार्च की रात शराब पिलाई। फिर लाठी के वार से हत्या कर दी। शव को खेत के किनारे छोटी झाड़ियों के बीच ले जाकर पटक दिया। आरोपी को पता था कि इस सुनसान इलाके में जंगली जानवर बॉडी को खा जाएंगे।

खोखरिया गांव में वो खेत जहां लीला का मर्डर हुआ।
2. एक माह बाद गुमशुदगी दर्ज, जानवर नोच चुके थे बॉडी
ब्यावर साकेत नगर एसएचओ सुरजीत ठोलिया ने बताया कि – आरोपी राजू गिरी को पता था कि मृतका के परिजन उसकी तलाश नहीं करेंगे, क्योंकि लीला पहले भी कई दिन तक उसके साथ रह चुकी थी।
करीब एक माह बाद 11 अप्रैल 2026 को गणेशपुरा निवासी कालू सिंह ने साकेत नगर थाने में गुमशुदगी की रिपोर्ट दी। रिपोर्ट में बताया कि उसकी बेटी लीला देवी अपने पति से अलग गंगा कॉलोनी में किराए के मकान में रहती थी।
13 मार्च 2026 को बिना बताए कहीं चली गई। इस पर पुलिस ने लीला की तलाश शुरू की। शक के आधार पर लीला के संपर्क में आए लोगों से पूछताछ शुरू की। राजू गिरी से पूछा गया तो उसने स्वीकार किया- लीला मेरे पास 15 मार्च को आई थी, लेकिन चली गई।
पुलिस को उसकी कहानी पर इसलिए यकीन हो गया क्योंकि मृतका का मोबाइल नंबर 15 मार्च तक चालू था। दूसरा- पुलिस को जानकारी थी कि लीला अक्सर घर से बाहर रहती थी।
ऐसे में पुलिस और परिजनों ने गुमशुदगी मामले में ज्यादा ध्यान नहीं दिया। करीब 4 महीने तक लीला का कोई अता-पता नहीं चल पाया।

साकेत नगर थाना पुलिस ने अगस्त में मृतका के बेटे की ओर से दर्ज मुकदमे के बाद सर्च ऑपरेशन तेज किया।
3. चार महीने बाद बेटे के मुकदमे पर एक्टिव हुई पुलिस
11 अगस्त को मृतका लीला के बेटे ने अपने ननिहाल पक्ष पर अपहरण और हत्या के आरोप में केस दर्ज कराया। उसे शक था कि प्रॉपर्टी के लिए मां लीला की हत्या करवाई गई है।
इस पर पुलिस ने संदेह और तकनीकी एक्सपर्ट की मदद से लीला से आखिरी बार संपर्क में आए राजू गिरी को दुबारा पकड़कर पूछताछ की।
इस बार आरोपी ने हत्या करने की बात तो कबूल कर ली। लेकिन शातिर को यकीन था कि जबतक वह नहीं बताएगा पुलिस डेड बॉडी रिकवर नहीं कर पाएगी और वो जेल जाने से बच जाएगा। अब उसने डेड बॉडी की को लेकर गुमराह करना शुरू किया। झूठी कहानी बनाता रहा।
4 . कभी श्मशान की राख में खोजी हड्डियां, कभी तालाब में रेस्क्यू
पहला झूठ: एसएचओ सुरजीत ठोलिया ने बताया कि- आरोपी ने सबसे पहले बताया कि बॉडी को उसने तालाब में फेंका। लेकिन कई घंटे रेस्क्यू चलाने के बाद भी बॉडी नहीं मिली।

पुलिस ने तालाब में भी शव के लिए गोताखोरों की मदद से सर्च ऑपरेशन चलाया।
दूसरा झूठ: फिर गुमराह करते हुए कहा- श्मशान में एक आदमी की जलती हुई चिता में लीला के शव को जला दिया। पुलिस ने पता लगाया कि गांव में आखिरी मौत 19 मई, 2026 को हुई थी। वारदात के करीब 2 माह बाद महिला की बॉडी जलाने के बात पुलिस के भी गले नहीं उतर रही थी। फिर भी क्लू जुटाने के लिए पुलिस ने श्मशान की राख में हड्डियां खोजी, लेकिन वहां भी कुछ नहीं मिला।
तीसरा झूठ : आरोपी ने पुलिस को फिर गुमराह करते हुए बताया- उसने पिचियाक निवासी विजयसिंह नाम के परिचित को 20 हजार रुपए में महिला की बॉडी ठिकाने लगाने को कहा था। इन्वेस्टिगेशन में सामने आया कि विजयसिंह नाम के व्यक्ति की मौत तो आठ माह पहले जनवरी में हो चुकी थी।

खेत में ट्रैक्टर से खुदाई करवाकर शव की तलाश करते हुए पुलिस।
5. खेत की खुदाई में निकला कंकाल
पुलिस ने साइबर एक्सपर्ट की मदद से पता लगा लिया कि मृतका का मोबाइल 15 मार्च तक एक्टिव था। तब लोकेशन बिलाड़ा स्थित आरोपी के गांव पिचियाक की आ रही थी।
लेकिन इससे 1-2 दिन पहले की लोकेशन घर से काफी दूर खोखरिया गांव की थी। इससे क्लू मिला की तब भी लीला आरोपी के साथ थी।
ब्यावर एसपी रतनसिंह ने बताया- विशेष टीम की मदद से खोखरिया गांव में आरोपी के खेत में ट्रैक्टर से खुदाई कराई गई। इस दौरान आरोपी राजू गिरी टूट गया।
उसने वारदात कबूल करते हुए पूरा सच उगल दिया। पुलिस ने मौके पर खेत में दबे मृतका के कंकाल, हड्डियां, बैग, आधार कार्ड बरामद कर लिए।

गायब होने के करीब 6 महीने के बाद लीला देवी का कंकाल राजू गिरी के खेत से मिला।
6. मर्डर के लिए 10 बार देखी थी दृश्यम मूवी
आरोपी राजू ने कबूल किया कि लीला को मारने की साजिश जनवरी-फरवरी से ही रच रहा था। इसके लिए उसने अजय देवगन की फिल्म दृश्यम के दोनों पार्ट कम से कम 10 बार देखे थे।
यहीं से उसे आइडिया मिला कि डेड बॉडी को ऐसी जगह ठिकाने लगाना है जहां से पुलिस उसे ढूंढ नहीं पाए। लेकिन एक सुराग के चलते वह पकड़ा गया।

साकेत नगर एसएचओ सुरजीत ठोलिया ने बताया कि तकनीकी एक्सपर्ट की मदद से पुलिस ने शव रिकवर कर लिया।
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