Thursday, October 1, 2026
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बाजार की चाल से उल्टा काम करता है ये फंड, 12 अक्टूबर तक निवेश का मौका


नई दिल्ली. शेयर बाजार में निवेश करने वालों के लिए मौजूदा गिरावट के बीच पैसे लगाने का एक बड़ा मौका आया है. वेटरन निवेश सलाहकार संकरन नरेन की अगुवाई में ICICI प्रूडेंशियल म्यूचुअल फंड ने ICICI प्रूडेंशियल कॉन्ट्रा फंड लॉन्च किया है. यह एक ओपन-एंडेड इक्विटी स्कीम है जो कॉन्ट्रेरियन इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटेजी (बाजार के आम रुझान के उलट निवेश करने की रणनीति) पर काम करती है. कॉन्ट्रेरियन इन्वेस्टमेंट इस सोच पर आधारित है कि बाजार अक्सर अपने एसेट्स की गलत कीमत तय करते हैं और यह गलत कीमत तय होना हर एसेट क्लास (चाहे वह इक्विटी हो, डेट हो या रियल एस्टेट) की एक स्वाभाविक विशेषता है.

यह स्कीम ऐसे मौकों की पहचान करने के लिए आम राय से हटकर और रिसर्च पर आधारित तरीका अपनाती है. इसका लक्ष्य ऐसे निवेशक हैं जो लंबे समय के नजरिए से पैसे लगाना चाहते हैं और बाजार के मूड या धारणा के बदलने का इंतजार करने के लिए तैयार हैं. इस स्कीम को संकरन नरेन के अलावा धर्मेश कक्कड़, साक्षात गोयल और गौरव मिलकर मैनेज करेंगे. ICICI प्रूडेंशियल म्यूचुअल फंड के ED और CIO संकरन नरेन ने बताया कि कॉन्ट्रेरियन इन्वेस्टिंग का मतलब सिर्फ सस्ती चीजें खरीदना नहीं है. इसके लिए मजबूत रिसर्च और लंबे समय का नजरिया चाहिए. कॉन्ट्रेरियन इन्वेस्टिंग की खासियत यह है कि हम तब खरीदते हैं जब किसी स्टॉक की मांग कम हो, जब खरीदारों के मुकाबले बेचने वाले ज्यादा हों और इसलिए उसकी कीमत काफी गिर गई हो.

कैसे होती है शेयरों की पहचान
नरेन का कहना है कि इस स्कीम में अलग-अलग मार्केट कैपिटलाइजेशन में निवेश करने की सुविधा है, लेकिन हमारा मुख्य फोकस उन स्टॉक्स की पहचान करना होगा जिनका प्रदर्शन खराब रहा है. जरूरी बात यह है कि रिसर्च के जरिये सही निवेश को पहचाना जाए और इंतजार करने का धैर्य रखा जाए, क्योंकि कॉन्ट्रेरियन स्थिति में बदलाव जल्दी नहीं आता. स्कीम की कॉन्ट्रा स्ट्रैटेजी किसी एक फैक्टर या कई फैक्टर के कॉम्बिनेशन पर आधारित हो सकती है, जिन्हें VCTS फ्रेमवर्क के तहत व्यवस्थित किया गया है.

CLOUD से बनेगा पोर्टफोलियो

  • Calculate : कोई भी फैसला लेने से पहले रिसर्च और गणना करें.
  • Leverage : लीवरेज्ड स्टॉक्स के मामले में सावधानी बरतें.
  • Ownership : कम इंस्टीट्यूशनल ऑनरशिप भी स्टॉक को चुनने में मददगार होगा.
  • Upside : अपसाइड की साफ संभावना हो तभी स्टॉक को पिक करना बेहतर.
  • Disruption : डिसरप्शन के जोखिम को लेकर सावधानी बरतें और जल्दबाजी न करें.

क्या होती है निवेश की रणनीति
निवेश शुरू करते समय टीम आम राय से हटकर सोच-समझकर रास्ता चुन सकती है. यह ऐसी कंपनियां ढूंढती है जिनका डेट-टू-इक्विटी रेश्यो सही हो, संस्थागत हिस्सेदारी पर नजर रखती है और ऐसे मौकों की तलाश करती है जहां सेंटीमेंट कमजोर हो लेकिन सामान्य होती कमाई से आगे बढ़ने की संभावना हो. साथ ही यह उन सेक्टरों का भी ध्यान से मूल्यांकन करती है जिनमें बड़े बदलाव या उथल-पुथल हुई हो. जब ‘कॉन्ट्रेरियन मिसप्राइसिंग’ (बाजार की गलत समझ के कारण गलत कीमत) खत्म हो जाए, सेंटीमेंट बदल जाए या कोई बेहतर स्टॉक मिल जाए (जिससे निवेश का कोई और बेहतर आइडिया मिल सके), तब उस स्टॉक से बाहर निकला जा सकता है.

कैसे होती है गलत प्राइसिंग
मार्केट के हर कोने में गलत प्राइसिंग होती है, जिससे कॉन्ट्ररियन (बाजार के आम रुख के उलट) मौके बनते हैं. इस उलझन में कई चुनौतियां शामिल हैं, जैसे ग्लोबल ग्रोथ की चिंताएं, वेस्ट-एशिया में तनाव, विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) का पैसा निकालना, सेक्टर में बड़े बदलाव, सेंट्रल बैंक की मॉनेटरी पॉलिसी, साइक्लिक मंदी, बहुत ज्यादा कर्ज वाली कंपनियां, वैल्यूएशन और कमाई के अलावा रुपये की गिरती कीमत भी इस पर असर डालती है. उदाहरण के लिए, अमेरिका में S&P 500 इंडेक्स की टॉप 10 कंपनियों का हिस्सा अब 38% है, जबकि 2016 में यह 19% था. ऐसा इसलिए है, क्योंकि कुछ चुनिंदा कंपनियों का दबदबा और AI को लेकर भारी उत्साह वैल्यूएशन को ऐतिहासिक ऊंचाई पर ले जा रहा है. इसके उलट, भारत में ज्यादा कंपनियों की भागीदारी दिखती है, लेकिन अलग-अलग सेक्टर से मिलने वाला रिटर्न मिलाजुला और असमान है.



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