यमन के हूती विद्रोहियों ने शनिवार को सऊदी अरब के तेल ठिकानों और एयरपोर्ट्स पर हमला किया है। हूती प्रवक्ता याह्या सरी के मुताबिक, निशाने पर सऊदी तेल कंपनी अरामको का यानबू ठिकाना, राबिग तेल रिफाइनरी और रियाद, दम्माम व नजरान के एयरपोर्ट थे। सऊदी सिविल डिफेंस ने मक्का और मदीना में मिसाइलों के टुकड़े गिरने की चेतावनी दी है। लोगों से सुरक्षित जगहों पर रहने को कहा गया है। इस महीने सऊदी अरब पर हूतियों ने 6 बड़े हमले किए हैं। अदन में भी सऊदी ठिकानों पर हमले का दावा हूती प्रवक्ता याह्या सरी के मुताबिक उनकी सेना ने अदन में सैन्य कैंप और नौसैनिक अड्डे को निशाना बनाया। उनके मुताबिक, इन ठिकानों पर सऊदी सेना की निगरानी थी। अदन यमन की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार का अंतरिम केंद्र है। यहां हाल के दिनों में भी हमले हुए हैं। 15 अक्टूबर को अदन में राष्ट्रपति भवन परिसर पर मिसाइल हमला हुआ था। यमनी अधिकारियों के मुताबिक, इसमें पांच लोगों की मौत हुई और 16 घायल हुए। प्रधानमंत्री शाया अल-जिंदानी और सरकार के दूसरे अधिकारी सुरक्षित रहे। 16 अक्टूबर को अदन एयरपोर्ट परिसर में भी दो मिसाइलें गिरी थीं। यमनी अधिकारियों के मुताबिक, ये मिसाइलें काहिरा जाने के लिए तैयार एक यात्री विमान से करीब 500 मीटर दूर गिरीं। इस घटना में किसी की मौत या घायल होने की खबर नहीं थी। सऊदी अरब ने दो मिसाइलें रोकने की बात कही सऊदी अरब के नेतृत्व वाले सैन्य गठबंधन ने कहा कि उसने पश्चिमी सऊदी अरब के ताइफ और यानबू की ओर दागी गई दो मिसाइलों को बीच में ही रोक दिया। इसके बाद सऊदी सिविल डिफेंस ने ताइफ, यानबू, मक्का और जेद्दा में लोगों को खतरे की चेतावनी दी। लोगों से नजदीकी सुरक्षित जगह पर जाने को कहा गया। हूतियों का दावा- सऊदी ने हमले किए हूती मीडिया चैनल अल-मसीरा के मुताबिक, सना और उसके आसपास के इलाकों में सऊदी अरब ने कई हमले किए। चैनल ने मोखा शहर के आसपास करीब 20 हवाई हमले होने की भी जानकारी दी। सना के आसपास एक रिहायशी इमारत पर भी हमला हुआ। इस इमारत में सीमेंट फैक्ट्री में काम करने वाले लोग रहते थे। हूती मीडिया के मुताबिक, हमले में छह महिलाओं और एक बच्चे की मौत हुई, जबकि तीन लोग घायल हुए। सऊदी अरब और हूतियों की दुश्मनी क्यों है इस संघर्ष की शुरुआत यमन के गृहयुद्ध से हुई। यमन में हूतियों ने 2014 में राजधानी सना पर कब्जा कर लिया था। इसके बाद 2015 में सऊदी अरब ने कई देशों के साथ मिलकर उनके खिलाफ सैन्य अभियान शुरू किया। सऊदी अरब चाहता था कि यमन की अंतरराष्ट्रीय मान्यता प्राप्त सरकार दोबारा सत्ता में आए और हूतियों का कब्जा खत्म हो। इसके बाद कई साल तक यमन में हवाई हमले होते रहे। लेकिन हूतियों को पूरी तरह पीछे धकेलने में सऊदी गठबंधन कामयाब नहीं हो पाया। हूती अब भी यमन के बड़े हिस्से में अपनी पकड़ बनाए हुए हैं। उनकी लड़ाई का असर अब सऊदी अरब की सुरक्षा पर भी पड़ रहा है। अक्टूबर में सऊदी अरब पर हूतियों के बड़े हमले 3 अक्टूबर: हूतियों ने दावा किया कि उन्होंने रियाद में सऊदी कंपनी अरामको के तेल ठिकाने पर मिसाइल और ड्रोन से हमला किया। वहां आग लगने और धुआं उठने की खबर आई। 10 अक्टूबर: रियाद के किंग खालिद एयरपोर्ट पर हमला हुआ। रिपोर्ट के मुताबिक, 12 लोगों की मौत हुई और 309 लोग घायल हुए। हूतियों ने हमले की जिम्मेदारी ली। 11 अक्टूबर: रियाद एयरपोर्ट पर फिर हमले की खबर आई। एक व्यक्ति की मौत हुई और 11 लोग घायल हुए। दम्माम शहर के किंग फहद एयरपोर्ट पर भी हमले हुए। 13-14 अक्टूबर: धहरान में अरामको के मुख्यालय में आग लग गई। सऊदी ऊर्जा मंत्रालय ने इसकी पुष्टि की। हूतियों ने रियाद एयरपोर्ट और तेल ठिकानों पर हमले का भी दावा किया। 19 अक्टूबर: सऊदी गठबंधन ने बताया कि उसने यानबू की ओर आ रही एक मिसाइल को रोक दिया। उसने ड्रोन और क्रूज मिसाइलों को भी नष्ट करने की बात कही। 19 अक्टूबर को हूतियों ने यानबू, शायबा तेल क्षेत्र और रियाद-अभा एयरपोर्ट पर हमले का दावा किया। 24 अक्टूबर: हूतियों ने रियाद में रक्षा मंत्रालय, यानबू में अरामको के ठिकाने और दम्माम एयरपोर्ट पर हमले का दावा किया। 24 अक्टूबर को सऊदी गठबंधन ने कहा कि उसने ताइफ और यानबू की ओर आ रही दो मिसाइलों को रोक दिया।
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