Saturday, June 13, 2026
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रूस लड़कियों को बच्चे पैदा करने पर ₹1लाख दे रहा: जंग में बड़ी सेना बनाना मकसद, घटती जनसंख्या और बूढ़ी आबादी से जूझ रहा देश


मॉस्को4 मिनट पहले

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रूस में कम उम्र की लड़कियों को बच्चे पैदा करने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। न्यूज एजेंसी PTI के मुताबिक सरकार बच्चे को जन्म देने और उसका पालन-पोषण करने के लिए इन्हें करीब एक लाख रुपए की मदद दे रही है।

यह योजना मार्च 2025 में रूस के 10 हिस्सों में शुरू हुई है। इसका मकसद देश में कम होती जनसंख्या और बढ़ती उम्र के लोगों की समस्या को दूर करना है। पहले यह योजना सिर्फ बालिग (18 साल से ऊपर) महिलाओं के लिए थी। लेकिन अब इसमें नाबालिग लड़कियों को भी शामिल कर लिया गया है, ताकि वे भी बच्चे पैदा करने के लिए प्रोत्साहित हों।

रूस में 2023 में प्रति महिला औसत जन्म दर 1.41 थी, जबकि आबादी को स्थिर रखने के लिए 2.05 की दर जरूरी मानी जाती है। इसलिए रूस सरकार ऐसी योजनाएं चला रही है, जिन्हें ‘प्रोनेटलिस्ट नीतियां’ कहा जाता है। इनका मकसद लोगों को ज्यादा बच्चे पैदा करने के लिए प्रेरित करना है।

फिलहाल आबादी के लिहाज से रूस दुनिया का नौवां सबसे बड़ा देश है, लेकिन वहां जनसंख्या कम होने का खतरा बढ़ रहा है।

जंग लड़कियों को कम उम्र में मां बनने पर मजबूर कर रहा

रूस में स्कूल में पढ़ने वाली लड़कियों को बच्चे पैदा करने के लिए पैसे देना काफी विवादित फैसला है। रूस में हुए एक सर्वे के मुताबिक 43% लोग इस नीति के पक्ष में हैं, जबकि 40% इसका विरोध कर रहे हैं। लेकिन यह साफ है कि रूस की सरकार बच्चों के जन्म को अपनी सबसे बड़ी प्राथमिकताओं में से एक मान रही है।

रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन कई बार ये कह चुके हैं कि बड़ी आबादी से देश को बड़ी सेना बनाने में मदद मिलती है। इससे देश ताकतवर बनता है। कुछ एक्सपर्ट्स इसे रूस और यूक्रेन के जंग से भी जोड़कर देख रहे हैं।

इस युद्ध में अब तक करीब 2.5 लाख रूसी सैनिक मारे जा चुके हैं। इसके अलावा युद्ध की वजह से रूस के सैकड़ों हजार पढ़े-लिखे लोग देश छोड़कर भाग गए हैं। इनमें ज्यादातर युवा पुरुष हैं जो भविष्य में रूस में रहकर बच्चे पैदा कर सकते थे।

रूस में सरकार गर्भवती होने वाली किशोरियों को एक लाख रुपए देती है।

रूस में सरकार गर्भवती होने वाली किशोरियों को एक लाख रुपए देती है।

रूस करियर बनाने वाली महिलाओं को रोक रहा

रूस की संसद ने 2024 में एक ऐसा कानून पास किया है जिसका मकसद लोगों में बच्चे न पैदा करने की सोच को बढ़ावा देने से रोकना है। इस कानून के तहत अब कोई भी व्यक्ति, संगठन या विज्ञापन ऐसा मैसेज नहीं दे सकता जो लोगों को शादी और बच्चे पैदा करने के बजाय सिंगल रहकर या सिर्फ करियर बनाने के लिए प्रेरित करे।

सरकार का मानना है कि ऐसे विचार रूस में पहले से ही गिरती जन्म दर को और खराब कर सकते हैं। इस कानून के साथ-साथ रूस में निजी क्लीनिकों में गर्भपात कराने पर भी सख्त पाबंदियां लगाई जा रही हैं, ताकि महिलाएं बच्चा गिराने का विकल्प आसानी से न चुन सकें।

रूसी सरकार चाहती है कि महिलाएं शादी करें, बच्चे पैदा करें और उन्हें पालें, ताकि देश की जनसंख्या कम होने से रोकी जा सके।

पैसे के लालच देकर भी नहीं बढ़ रहा जन्मदर

इन सभी देशों में यह देखा गया है कि सिर्फ पैसों या सुविधाओं का लालच देकर जन्म दर में बड़ी बढ़ोतरी नहीं हो पाती।

बच्चे पैदा करने का फैसला लोग कई निजी, सामाजिक और आर्थिक वजहों से लेते हैं, जैसे महंगाई, करियर की प्लानिंग, माता-पिता बनने की जिम्मेदारी के लिए खुद को तैयार महसूस करना या बच्चों के लिए बेहतर सुविधाओं का भरोसा होना।

इसलिए जनसंख्या घटने की समस्या दूर करने के लिए सिर्फ पैसों की स्कीमें काफी नहीं हैं।

स्पेन में स्पेनिश भाषी लोगों के लिए अलग इमिग्रेशन पॉलिसी

स्पेन ने भी घटती जनसंख्या की चुनौती से निपटने के लिए एक अलग रास्ता चुना है। वहां सरकार ने इमिग्रेशन पॉलिसी को आसान बना दिया है, खासतौर पर लैटिन अमेरिका के स्पेनिश बोलने वाले लोगों के लिए।

इसका मकसद स्पेन में ऐसे लोगों को लाना है जो भाषा और संस्कृति के लिहाज से पहले से मेल खाते हों, ताकि उन्हें वहां बसाने और रोजगार देने में आसानी हो और देश की जनसंख्या भी बढ़े।

लेकिन दुनिया के कई देशों में जन्म दर बढ़ाने की नीतियां ऐसी बनाई जा रही हैं जिनका फायदा केवल खास वर्ग के लोगों को होता है।

जैसे हंगरी में भले ही सरकार तीन या ज्यादा बच्चों पर टैक्स छूट और सस्ते लोन देती है, लेकिन असल में इन स्कीमों का फायदा ज्यादातर उच्च आय वाले या स्थायी नौकरी करने वाले जोड़ों को ही मिल पाता है। कम आय वाले या अस्थायी काम करने वाले परिवारों के लिए ये सुविधाएं मुश्किल से हासिल होती हैं।

रूस में भी मातृत्व को बढ़ावा देने के लिए कई प्रतीकात्मक कदम उठाए गए हैं। वहां 10 या उससे ज्यादा बच्चे पैदा करने वाली महिलाओं को ‘मदरहुड मेडल’ दिया जाता है।

यह मेडल सोवियत संघ के जमाने में भी दिया जाता था और पुतिन ने इसे फिर से शुरू किया है। इस तरह रूस मातृत्व और बड़े परिवारों को सामाजिक रूप से सम्मान देकर लोगों को ज्यादा बच्चे पैदा करने के लिए प्रेरित करना चाहता है।

यूरोपीय देशों में गर्भपात पर पाबंदी

हंगरी

अल्ट्रासाउंड के दौरान भ्रूण की हार्टबीट सुनवाना जरूरी ताकि महिलाएं गर्भपात का इरादा छोड़ दें।पोलैंड

पोलैंड 2020 गर्भपात पर पाबंदी लगी। सिर्फ महिला की जान को गंभीर खतरा होने या रेप के केस में ही यह संभव है।

माल्टा

गर्भपात पूरी तरह अवैध है। महिला से रेप हुआ हो या जान खतरे में हो तब भी अबॉर्शन की अनुमति नहीं है।

रूस

निजी क्लीनिकों में गर्भपात पर कई क्षेत्रों में प्रतिबंध। सरकारी अस्पतालों में भी मनाही।

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