Eid-al-Adha 2026 Date: ईद-अल-अजहा मुसलमानों के लिए बड़ा पर्व है. इसे बकरीद, ईद उल जुहा, ईद उल बकरा, बकरा ईद, कुर्बानी आदि जैसे नामों से भी जाना जाता है. इस पर्व की खास बात यह है कि, यह त्योहार रमजान के खत्म होने के 70 दिन बाद मनाया जाता है.
ईद के बाद बकरीद मुसलमानों का दूसरा सबसे बड़ा और महत्वपूर्ण पर्व माना जाता है, जोकि भाईचारे और शांति का प्रतीक है. यह पर्व मुख्य रूप से कुर्बानी से जुड़ा है, जिसे हजरत इब्राहिम के कुर्बानी की याद में मनाया जाता है. आइये जानते हैं साल 2026 में कब मनाया जाएगा ईद-उल-अजहा का त्योहार.
ईद-अल-अजहा 2026 में कब है
इस्लामिक कैलेंडर के अनुसार, हर साल ईद-उल-अजहा या बकरीद इस्लामिक कैलेंडर के 12वें या आखिरी महीने जिल हुज्जा की 10वीं तिथि पर मनाई जाती है. अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार हर साल बकरीद की तिथि बदलती रहती है. बात करें नए साल में बकरीद की तारीख की तो, 2026 में यह त्योहार 26 या 27 जून को मनाए जाने की उम्मीद है. हालांकि पक्की या आधिकारिक तिथि की घोषणा चांद के दिखाई देने के बाद ही की जाती है.
ईद-अल-अजहा का त्योहार क्यों मनाया जाता है
इस्लाम धर्म की प्रमुख किताब, कुरान में ईद-अल-अजहा को हजरत इब्राहिम के कुर्बानी की याद में मनाया जाता है. इस्लामिक मान्यता के अनुसार, एक बार अल्लाह ने इब्राहिम की परीक्षा लेने के लिए उनसे अपनी सबसे प्यारी चीज कुर्बान करने को बोला और हजरत इब्राहिम ने तब अपने बेटे को कुर्बान करने का फैसला किया. उसके बाद जब इब्राहिम ने अपने बेटे को कुर्बान करने के लिए उसकी गर्दन पर तलवार चलाई तभी अल्लाह ने अपनी शक्ति दिखाते हुए उस समय उनके बेटे की जगह बकरे की गर्दन रख दी. तभी से ईद-उल-अजहा का पर्व हर वर्ष मनाया जाता है और इसी को बकरीद कहते है.
ईद-अल-अजहा त्योहार का महत्व
यह पर्व हजरत इब्राहिम के कुर्बानी की याद में मनाया जाता है. इस्लामिक मान्यता के अनुसार, एक बार अल्लाह ने इब्राहिम की परीक्षा लेने के लिए उससे अपनी सबसे प्यारी चीज कुर्बान करने को कहा. हजरत ने बिना हिचकिचाए अपने बेटे को कुर्बान करने का फैसला किया. जब हजरत इब्राहिम बेटे को कुर्बान करने के लिए उसकी गर्दन पर तलवार चलाई तभी अल्लाह ने अपनी शक्ति दिखाते हुए उस समय उसके बेटे की जगह एक मेमने को रख दिया. तब से ही ईद-उल-अजहा का पर्व मनाए जाने की परंपरा की शुरुआत हुई.
मुसलमान कैसे मनाते हैं ईद-उल-अजहा
- मुसलमान नए कपड़े पहनकर नमाज पढ़ने के लिए मस्जिद जाते हैं.
- बकरे, भेड़ आदि जैसे पशु की कुर्बानी दी जाती है.
- कुर्बानी के मांस को तीन हिस्सों में बांटा जाता है, जिसमें पहला हिस्सा रिशतेदारों और दोस्तों के लिए, दूसरा गरीब और जरुरतमंद लोगों के लिए और तीसरा परिवार के लिए रखा जाता है.
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