Tuesday, June 2, 2026
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Free Fire गेम ने ली बच्चे की जान, जानें क्या है ‘सडन गेमर डेथ’?


Image Source : UNSPLASH
गेमिंग की लत

Free Fire गेम ने एक 13 साल के मासूम की जान ले ली। गेमिंग की लत की वजह से मानसिक परेशानियों से लेकर मौत के हर साल मामले सामने आते हैं। ताजा मामला उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ का है, जहां 13 साल के बच्चे की मौत फ्री फायर गेम खेलते-खेलते हो गई। रिपोर्ट के मुताबिक, फ्री फायर गेम की वजह से होने वाले इस सडन गेमर डेथ वाले मामले ने बच्चे के परिवार समेत आसपास के लोगों को हैरान कर दिया।

रिपोर्ट के मुताबिक, फ्री फायर गेम खेलते-खेलते बच्चा अचानक बिस्तर पर लेट गया। मोबाइल में गेम चल रहा था, परिवार के लोगों को लगा कि बच्चा गेम खेलते-खेलते सो गया लेकिन काफी देर तक बच्चे ने कोई मूवमेंट नहीं किया तो पता चला की उसकी मौत हो गई। यह एक सडन गेमर डेथ का मामला है, जिसमें मोबाइल या कम्प्यूटर पर गेम खेलते-खेलते गेमर की मौत हो जाती है। आइए, जानते हैं क्या है ‘Sudden Gamer Death’?

क्या है सडन गेमर डेथ?

जैसा कि नाम से साफ है कि इसका मतलब है कि गेम खेलने वाले की अचनाक मौत। दुनियाभर में ऐसे कई मामले सामने आ चुके हैं, जिनमें गेमर की गेम खेलने के दौरान अचानक मौत हो जाती है। उसमे न तो कोई चोट या इंजरी होती है और न ही किसी भी तरह की हाथापाई या मारपीट होती है। अमेरिकी लाइब्रेरी जर्नल के मुताबिक, यह अकस्मात मौत है।

अमेरिकी राष्ट्रीय स्वास्थ संस्थान (NIH) के नेशनल लाइब्रेरी मेडिसन (NLM) के एक रिसर्च के मुताबिक, दुनियाभर में कई लोगों की मौत ऐसे ही मोबाइल पर गेम खेलते-खेलते हो गई है। इसमें न तो कोई हिंसा होती है और न ही किसी तरह की इंजरी। इसे इंटरनेट गेमिंग डिसऑर्डर से कनेक्ट किया गया है।

रिसर्च के मुताबिक, दुनियाभर में सडन गेमर डेथ के 24 मामले आ चुके हैं। सबसे पहला मामला 1982 में आया था। वहीं, 2021 तक 23 लोगों की मौत इसकी वजह से हुई थी। मरने वाले लोगों की उम्र 11 साल से लेकर 40 साल के बीच रही है। इनमें से सबसे ज्यादा मामले दक्षिण पूर्वी एशिया से हैं, जिनमें सिंगापुर, मलेशिया, इंडोनेशिया जैसे देश शामिल हैं।

क्या है वजह?

रिसर्च रिपोर्ट में कहा गया है कि ऐसा कई घंटे तक एक ही पोजीशन में मोबाइल गेम खेलने की वजह से हो सकता है। गेमर्स घंटों गेम खेलते हैं, जिसकी वजह से वो एक ही पोजीशन में बैठे रहते हैं। इस दौरान हाई ब्लड प्रेशर और हार्ट बीट भी तेज रहती है। रिसर्च में बताया गया है कि कुल मौतों में 5 लोगों की मौत पल्मोनरी एम्बोलिज्म यानी फेफड़ों में रक्त का थक्का जमने की वजह से हुई है। वहीं, 2 ऐसे मामले सामने आए हैं, जिनमें सेरेब्रल हेमरेज यानी ब्रेन हेमरेज और बांकि मामलों में कार्डियक एरिथिमिया की संभावना थी।

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