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Opinion: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के चीन दौरे से बहुत उम्मीदें हैं. इसे भारत-चीन के बीच संबंधों को सुधारने के लिए गंभीर प्रयास माना जा रहा है. ऐसे में सवाल उठता है कि क्या अमेरिकी टैरिफ वॉर की वजह से दोनों देश…और पढ़ें
फाइल फोटो.हालांकि, गलवान घाटी की हिंसक झड़प के बाद इसी महीने के आखिर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की चीन यात्रा सिर्फ एक राजनयिक दौरा नहीं है, बल्कि यह एक ऐतिहासिक अवसर है, जो दोनों देशों के भविष्य की दिशा तय कर सकता है. हो सकता है कि भारत-चीन अपनी मैत्री को अगले लेवल तक ले जाएं और एकजुट होकर दुनिया को दिखा दें कि एशिया के दो दिग्गज एक साथ हैं. हो सकता है कि इस दौरे के बाद भारत अपनी शर्तों पर एक बार फिर से टिकटॉक, यूसी ब्राउजर जैसी तमाम चीनी ऐप्स को एंट्री भी दे दे. लेकिन क्या ये दोस्ताना वाकई में पाक-साफ होगा, क्योंकि चीन अक्सर दगाबाजी करने में आगे रहता है. इसके लिए अगर हम हम पिछले एक दशक के संबंधों को ही देखें तो बहुत कुछ साफ हो जाता है. प्रधानमंत्री मोदी के कार्यकाल में भारत-चीन के रिश्ते के बीच एक जटिल पैटर्न दिखता है. सितंबर 2014 में राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने भारत का दौरा किया, जहां उनका गर्मजोशी से स्वागत हुआ. फिर मई 2015 में पीएम मोदी चीन गए, जहां व्यापारिक समझौते हुए. लेकिन संबंधों में उतार-चढ़ाव आने में देर नहीं लगी. साल 2017 में डोकलाम में लंबा सैन्य गतिरोध हुआ, जिसका भारतीय सैनिकों ने मुंहतोड़ जवाब दिया.
क्या चीन ऐप्स की हो सकती है दोबारा एंट्री?
यह कहना जल्दबाजी होगी. जबसे गलवान की झड़प हुई, भारत ने राष्ट्रीय सुरक्षा और डेटा गोपनीयता का हवाला देते हुए सैकड़ों चीनी ऐप्स (जैसे टिकटॉक, यूसी ब्राउजर, पबजी) पर प्रतिबंध लगा दिया और चीनी निवेश के नियमों को भी सख्त कर दिया. हाल ही में सरकार ने इन बातों से इनकार भी किया है. इसके बावजूद 2023-24 में चीन भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार बना रहा. यह बताता है कि राजनीतिक तनाव के बावजूद दोनों देशों के बीच आर्थिक संबंध गहरे हैं. इस यात्रा का एक बड़ा सवाल यह है कि क्या चीनी कंपनियों को भारत में वापसी का मौका मिलेगा. भारत एक बहुत बड़ा उपभोक्ता बाजार है और चीनी कंपनियों के लिए भारत में बने रहना बहुत जरूरी है. अगर दोनों देशों के बीच रिश्ते सुधरते हैं, तो निवेश का प्रवाह फिर से बढ़ सकता है, खासकर उन क्षेत्रों में जहां चीन की टेक्नोलॉजी दुनिया में अग्रणी है. हालांकि, सरकार का रुख राष्ट्रीय सुरक्षा को लेकर बहुत सख्त है. जिन ऐप्स पर प्रतिबंध लगा है, वे डेटा और गोपनीयता के कारण थे और यह संभावना बहुत कम है कि सरकार सिर्फ एक दौरे के लिए इन प्रतिबंधों को हटा लेगी. दोनों देशों के बीच अभी भी “विश्वास की कमी” है और भारत सरकार शायद चीनी कंपनियों को संवेदनशील क्षेत्रों में आसानी से वापस आने की अनुमति न दे.

न्यूज़18 हिंदी (Network 18) डिजिटल में सीनियर एसोसिएट एडिटर के तौर कार्यरत. इंटरनेशनल, वेब स्टोरी, ऑफबीट, रिजनल सिनेमा के इंचार्ज. डेढ़ दशक से ज्यादा समय से मीडिया में सक्रिय. नेटवर्क 18 के अलावा टाइम्स ग्रुप, …और पढ़ें
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