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रेलवे प्लेटफार्म पर चेकिंग के दौरान आरपीएफ जवानों ने एक यात्री को रोका और पूछा बैग में क्या है? यात्री ने सहज भाव से जवाब दिया कि इसमें कपड़े हैं साहब. आरपीएफ को शक हुआ तो जवानों ने बैग की चेन खोली, इसके बाद अंदर से कई कछुए बाहर प्लेटफार्म पर छिटक गए.
आरपीएफ ने तोते, कबूतर और सांप भी बरामद किए हैं.
कोलकाता. रेलवे प्लेटफार्म पर चेकिंग के दौरान आरपीएफ जवानों ने एक यात्री को रोका और पूछा बैग में क्या है? यात्री ने सहज भाव से जवाब दिया कि इसमें कपड़े हैं साहब. आरपीएफ को शक हुआ तो जवानों ने बैग की चेन खोली, इसके बाद अंदर से कई कछुए बाहर प्लेटफार्म पर छिटक गए. यह देखकर सब हैरान रह गए. यह घटना हाल ही में हुई, जिसमें आरपीएफ की सतर्कता ने वन्यजीव तस्करों को पकड़ा है. आरपीएफ ने तुरंत आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया. मामला पूर्व रेलवे के स्टेशन का है.
आरपीएफ (रेलवे प्रोटेक्शन फोर्स) वन्यजीव तस्करी के खिलाफ लगातार सक्रिय है. बात 2025-26 की हो तो अब तक 20 मामले सामने आए और 26 तस्कर गिरफ्तार किए गए. कुल मिलाकर 2000 से ज्यादा तस्कर को पकड़ा गया है. इसमें सबसे ज्यादा कछुए थे. 1,646 कछुए, 600 तोते, 48 कबूतर, 20 पहाड़ी तोते, 6 खरगोश, 6 राजहंस, मोर के पंखों के 40 बंडल और 3 सांप शामिल हैं.
सभी बचाए गए जीवों को तुरंत वन विभाग को सौंप दिया गया, जहां उनका इलाज और पुनर्वास के बाद जंगल में छोड़ दिया गया. तस्कर ट्रेनों से जीवों की तस्रकी के लिए मुफीद मानते है. इसमें बीच में चेकिंग होने की संभावना नहीं होती है और लंबी दूरी तक का सफर तय किया जा सकता है. जबकि सड़क मार्ग से जाने पर कई पर जांच हो सकती है और पकड़े जाने की आशंका अधिक रहती है.
वित्तीय साल 2024-25 में आरपीएफ ने 14 मामलों का पता लगाया और 3 तस्करों को गिरफ्तार किया. इसमें 188 कछुए, 130 बुलबुल, 6 बाज के बच्चे, 5 इगुआना और 4 फाल्कन समेत कई दुर्लभ जानवर बचाए गए.
आरपीएफ ‘ऑपरेशन वाइलेप’ के तहत ट्रेनों में सख्त निगरानी रख रही है. पूर्व रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी शिबराम माझि ने कहा कि पटरियां सिर्फ शहरों को नहीं जोड़तीं, बल्कि जीवन की रक्षा भी करती हैं. उन्होंने यात्रियों से अपील की कि वे रेलवे की आंख और कान बनें. एक छोटी सी सूचना भी किसी निर्दोष जीव की जान बचा सकती है.

